रविवार, 6 सितंबर 2009

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी - उम्दा प्रशासन लाने के प्रयास

सूचना प्रौद्योगिकी

 

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी - उम्दा प्रशासन लाने के प्रयास

                                                     -- अभिषेक सिंह उप सचिव (ई-गवर्नेस) ; एनईजीपी जागरूकता एवं संचार के नोडल अधिकारी हैं

       पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों और केन्द्रीय मंत्रालयों ने ई-गवर्नेन्‍स के युग में प्रवेश के लिए अनेक कदम उठाए हैं। लोक सेवाओं की अदायगी को बेहतर और उनकी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए अनेक स्तरों पर सतत प्रयास किये जा रहे हैं।

 

       राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्‍स योजना (एनईजीपी) ई-गवर्नेन्‍स के संबंध में उठाए गए कदमों को देश भर के सामूहिक विजन (अन्तर्दृष्टि) में समेकित कर समग्र रूप से एक साझा लक्ष्य के रूप में देखती है। इसी विचार के  अनुरूप देश के सुदूर गांवों तक पहुंच रहे देशव्यापी बुनियादी ढांचे का विशाल नेटवर्क विकसित हो रहा है। अभिलेखों का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि इन्टरनेट पर आसानी से भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

 

       मूल उद्देश्य उम्दा और सुस्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाना है। आखिरकार, भू-दस्तावेजों  की जानकारी प्राप्त करना, जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट हासिल करना, आयकर  विवरणी दाखिल करना और देश के सर्वोत्तम चिकित्सकों से परामर्श लेना माउस को क्लिक करने जैसा सरल ही होना चाहिए। और यह सब इतना निकट होना चाहिए कि जितना कि पड़ोस की दुकान।

 

राष्ट्रीय योजना की उत्पत्ति

       भारत में ई-गवर्नेन्‍स का परिदृश्य अब सरकारी विभागों के कम्प्यूटरीकरण से आगे बढक़र नागरिकों को केन्द्र में रखते हुए  सेवोन्मुखी और पारदर्शी हो चला है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्‍स योजना का दृष्टिकोण, कार्यान्वयन पध्दति और प्रबंधन संरचना का अनुमोदन सरकार ने 2006 में किया था। पूर्व में उठाये गए विभिन्न कदमों की सफलताओं और विफलताओं  के अनुभवों ने देश की ई-गवर्नेन्‍स रणनीति को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

 

       इस धारणा का उचित संज्ञान लिया गया है कि यदि राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ई-गवर्नेन्‍स में तेजी लानी है तो साझे विजन और रणनीति से निर्देशित कार्यक्रम का दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

       इस दृष्टिकोण को मुख्य और सहायक बुनियादी सुविधाओं के  आदान-प्रदान के जरिए खर्च में पर्याप्त बचत करने वाले उपाय के रूप में देखा गया है। निश्चित मानदंडों के आधार पर एक दूसरे के साथ मिलकर व्यवस्था को चलाया जा सकता है। इस दृष्टिकोण को नागरिकों के समक्ष सरकार का सही दृश्य पेश करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

एनईजीपी यूनिवर्स

       एनईजीपी में केन्द्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के स्तर पर लागू की जाने वाली 27 मिशन रूपी और आठ सहायक घटकों वाली परियोजनाएं  शामिल हैं। सहायक घटकों का उद्देश्य उचित प्रशासनिक और संस्थागत व्यवस्था, मुख्य बुनियादी ढांचा, और ई-गवनर्ेंस अपनाने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचे का गठन करना है। आठ सहायक घटक मिशन रूपी परियोजनाओं से परे हैं और उनकी जवाबदेही सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी) और प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत निवारण विभाग (डीएआर एंड पीजी) पर है। डीआईटी के घटक हैं कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर (एसडब्ल्यूएएन, एसडीसी और सीएससी), सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सहायता टेक्निकल असिसस्टेंस, प्रमुख नीतियां कोर पालिसीज और आर एंड डी  डीआईटी और डीएआर एंड पीजी के संयुक्त उत्तरदायित्व के क्षेत्र हैं-एचआरडीप्रशिक्षण, संगठनात्मक संरचना और जागरूकता तथा मूल्यांकन।

 

मिशन रूपी परियोजनाएं

 

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केन्द्रीय मिशन रूपी परियोजनाएं

       एमसीए 21, पेंशन, आयकर, पासपोर्ट और वीसा आव्रजन, केन्द्रीय उत्पाद कर, बैंकिंग, एमएनआईसी  यूआईडी, ई-कार्यालय और बीमा।

 

राज्यों की मिशन रूपी परियोजनाएं

       भू-अभिलेख प्रथम चरण, भू-अभिलेख द्वितीय चरण एवं पंजीकरण, सड़क परिवहन, कृषि, पुलिस, कोषालय, नगरपालिकाएं, ई-जिला, वाणिज्यिक कर ग्राम पंचायत और रोजगार कार्यालय।

 

एकीकृत मिशन रूपी परियोजनाएं

       सीएससी, ई-न्यायालय, ईडीआई, इंडिया पोर्टल, एनएसडीजी, ई-बिज़, ई-प्रोक्योरमेंट (वसूली)।

 

सामान्य सेवा केन्द्र

       सरकार ने 6 लाख से अधिक गांवों में एक लाख से अधिक सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना की मंजूरी दे दी है। सरकार ने जो योजना मंजूर की हैं, उसके अनुसार, सीएससी की भारतीय नागरिकों को केन्द्रीय, निजी और सामाजिक क्षेत्र की सेवाओं की एकीकृत अदायगी का प्रारंभिक बिन्दु के रूप में कल्पना की गई है। इसका उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जो सरकारी, निजी और सामाजिक क्षेत्र के संगठनों को उनके सामाजिक और व्यावसायिक लक्ष्यों विशेषकर देश के सुदूर गांवों की जनसंख्या के कल्याण से जुड़े विषयों को आईटी आधारित और अन्य सेवाओं के माध्यम से जोड़ सके।

 

       सीएससी, ई-गवर्नेन्‍स, शिक्षा, स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में उच्च स्तरीय और किफायती वीडियो, आवाज और आंकड़ों की जानकारी सेवायें प्रदान करने में सक्षम हैं। सीएससी की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदन पत्र को डाउनलोड करने, प्रमाण पत्र, बिजली, टेलीफोन, पानी और अन्य सेवाओं के बिलों के भुगतान जैसी वेब-योग्य ई-गवर्नेन्‍स से जुड़ी सेवायें प्रदान कर सकेगा।

 

स्वान (एसडब्ल्यूएएन) के साथ उड़ान भरना और एसडीसी'ज के जरिये सेवा प्रदान करना

       राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (एसडब्ल्यूएएन) योजना एनईजीपी की तीन प्रमुख अधोसंरचनात्मक स्तंभों में से एक है। मार्च 2005 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित इस योजना के लिए अनुमानत: 33 अरब 34 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य केन्द्र शासित प्रदेश के मुख्यालय को जिला मुख्यालय से और जिला मुख्यालय को (2 मेगाबाइट्स प्रति सेकेंड) ब्लाक मुख्यालयों से आपस में जोड़ते हुए राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (स्वान-एसडब्ल्यूएएन) स्थापित करना है। यह सुविधा न्यूनतम 2एमवीपीएस (मेगा बाइट्स प्रति सेकेंड) की लीज्ड लाइन पर दी जाएगी। योजना का उद्देश्य जी 2जी और जी2सी सेवायें प्रदान करने के आशय से एक सुरक्षित घनिष्ठ उपयोगकर्ता समूह (सीयूजी) सरकारी नेटवर्क स्थापित करना है।

 

       परियोजना की अवधि 5 वर्ष है जबकि पूर्व परियोजना क्रियान्वयन अवधि  18 महीने की है। एक केन्द्रीय योजना के रूप में अमल में लायी जा रही इस परियोजना के लिए 20 अरब 5 करोड़ रुपए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अनुदान के रूप में दिये हैं। शेष राशि अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता (एसीए) के रूप में मिलने वाली राज्य योजना के तहत प्राप्त होगी।

 

       राज्य आंकड़ा केन्द्र (स्टेट डाटा सेन्टर-एसडीसी)- एनईजीपी के तहत एक और प्रमुख संरचनात्मक स्तंभ है। जी-2जी, जी2सी और जी2बी सेवाओं की उम्दा इलेक्ट्रॉनिक अदायगी के लिए सेवा व्यवस्था  उसके इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे को सुगठित बनाने के लिए राज्यों में एसडीसीज स्थापित करने का प्रस्ताव है। राज्यों द्वारा ये सेवायें राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (स्वान) और सामान्य सेवा केन्द्र (सीएससी) की ग्रामीण स्तर  तक की कनेक्टीविटी  (संचार संपर्क) जैसी बुनियादी संचार सुविधाओं के सहयोग से दोषरहित ढंग से मुहैया करायी जा सकती हैं।

 

       राज्य आंकड़ा केन्द्र (एसडीसीज) राज्य के केन्द्रीय भंडार, सुरक्षित आंकड़ा कोष, ऑन लाइन सेवा अदायगी, नागरिक सूचना  सेवा पोर्टल, राज्य इन्टरनेट पोर्टल, आपदा की भरपाई, सुदूर प्रबंधन और सेवा एकीकरण का कार्य  करते हुए  अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। एसडीसी'ज की सहायता से आंकड़ा प्रबंधन, आईटी संसाधन प्रबंधन, तैनाती और अन्य खर्चों में अधिक से अधिक कमी लाई जा सकती है।

 

 

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