Friday, July 10, 2009

किस्‍सा ए मुरैना: पत्रकार बनना है तो लाओ दो हजार, सरकार उवाच ......

किस्‍सा ए मुरैना: पत्रकार बनना है तो लाओ दो हजार, सरकार उवाच ......

मुरैना डायरी (वर्ष 1999 से प्रकाशित)

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

(लेखक अनेक पुरूस्‍कारों व सम्‍मानों से सम्‍मानित प्रख्‍यात समाजसेवी, साहित्‍यकार, पत्रकार एवं क्रिमिनल लॉयर व इन्‍वेस्‍टीगेटर है )

आज फिर एक बार मुरैना डायरी का अंक आपके सामने है, एक लम्‍बा अर्सा हुआ यह स्‍तम्‍भ प्रकाशित नहीं हो पा रहा था । पर थोड़ी रूकावट के बाद सही फिर आपके सामने आया ।

मोगाम्‍बो खुश हुआ

हमारे मुरैना में एक मोगाम्‍बो हैं, काफी फेमस हैं और एक अर्सा पहले अखबारों की हाकरी किया करते थे आजकल बड़े साहब के मुँह लगे है, मुँह क्‍या लगे हैं यूं कहिये कि छाती पान लगा है । अब लोग उन्‍हें साहब का दलाल कहते हैं तो भई ये तो गलत बात है , सरासर गलत । अकेले बेचारे मोगाम्‍बो को ही काहे बदनाम करते फिरते हो , साहब के छाती पान तो शहर में, जिले में गली गली में आवारा कुत्‍तों के मानिन्‍द ब्‍याये पड़े हैं ।

मोगाम्‍बो जो भी हो बड़ा दयालु है, काम करवा ही देता है , पक्‍के में करवा देता है अब थोड़ा बहुत तो हर जगह ही खर्च होता है, कुछ साहब पर कुछ साहब के बीवी बच्‍चों पर , कुछ खुद पर कुछ खुद के बीवी बच्‍चों पर अब सब एडजस्‍ट तो करना ही पड़ेगा न । मोगाम्‍बो चाहे जिसे पत्रकार बना देता है चाहे जिसे पत्रकार से बेलदार बना देता है । एक किस्‍सा गौर फरमाईये ।  

एक बेलदार एक मकान पर बेलदारी कर रहा था, मोगाम्‍बो भाई वहॉं घूमते घामते पहुँच गये, मोगाम्‍बो भाई ने पहली नजर में ही भॉंप लिया कि शिकार मुकम्‍मल और वजनदार है । मोगाम्‍बो भाई बेलदार से बोले काहे कित्‍ता कमा लेते हो रोजाना, बेलदार बोला कि साब हमारी रेट सबको मालुम है लेकिन काम मिलता रहे इसकी कोई गारण्‍टी नहीं, जब काम नहीं मिलता तब दिक्‍कत हो जाती है ।

मोगाम्‍बो भाई बोले कि चल बीड़ी पिला , बेलदार ने बीड़ी सुलगाई कश के साथ बाते आगे बढ़ाते मोगाम्‍बो बोला कि बोल कुछ इन्‍तजाम करवाऊं क्‍या, बेलदार ने गदगद स्‍वर में कहा कि का साब का करवाओगे ।

मोगाम्‍बो भाई बोला कि ऐसा कर कब तक ये मजदूरी फजदूरी करता फिरेगा, नरेगा की रोजगार गारण्‍टी में फंस गया तो निबट जायेगा, कम रेट और कमीशन कटा के मजदूरी के नाम पर ढेढ़स पावेगा, और मजदूरी नहीं करेगा तो गरीबी रेखा से भी नाम कटा बैठेगा, तू ऐसा कर कि पत्रकार बन जा ।

मोगाम्‍बो की बात सुन कर बेलदार चौंका और बोला कि साहब जे का होता है । मोगाम्‍बो ने उसे ईगर फुल देखा तो बोला कि अबे तेरे को नहीं पता कि जे का होता है, साला पत्रकार तो बहुत बड़ी तोप होता है , हरेक में डण्‍डा डाल देता है ।

बेलदार उत्‍सुक होता हुआ बोला कि बनवाय देओ साब, कैसें बनेंगे, का तरीका है ।

मोगाम्‍बो बोला कि अरे कुछ नहीं दो हजार जमा कर सो लोकल नीला पर्चा, हरा पर्चा , हवाबाण टाइम्‍स किसी से भी लिखवा लेंगें कि तू उनका पत्रकार है , फिर दो हजार और लगेंगे सो अधिमान्‍यता के कागज बनवा दूंगा, तीन हजार उसके बाद दे दीओ तो अधिमान्‍यता दिलवा दूंगा बस फिर तो तेरे जलवे ही जलवे हैं ।

बेलदार जो अब तक टांग पसार कर जमीन पर बैठा था , फुर्ती से उकड़ू होता हुआ बोला पत्रकार बन के अधिमान्‍यता मिले पर का फायदा होगा ।

मोगाम्‍बो ने जलती आग में थोड़ा घी और उड़ेला बोला कि बेटा साल में 20 हजार तो आर्थिक सहायता, बस और रेल का कंसेशन पास, घर वालों की दवा दारू और इलाज सब मुफ्त, इसके संग हर वी.आई.पी. के कार्यक्रम में अगाड़ी वाली कुर्सी पक्‍की, नहीं तो वैसे साला भीड़ में धक्‍के खाता फिरेगा और मंत्री, नेता, अफसर के दरसन भी नहीं पावेगा । पुलिस भी सैल्‍यूट मारे तो बात करना ।

बेलदार की ऑखें चौड़ी हो गयीं और हैरत से बोला ऐं इत्‍ते फायदा बाप रे बाप मैं अभी तक कहॉं गढ्ढे में पड़ा पशुयुग में जी रहा था , प्रभु प्रभु कहॉं थे आप अभी तक , धन्‍य हैं आप प्रभु धन्‍य हैं आप । मोगाम्‍बो बोला तो फिर निकाल फटाफट दो हजार और खुलवा देता हूँ तेरा पत्रकारिता का अकाउंट ।

बेचारे बेलदार ने अपने पड़ौसियों से कर्जा लिया और मोगाम्‍बो को दो हजार थमा कर पत्रकार बनने के सपने में बेलदारी छोड़ कर आजकल घर आराम फरमा रहा है ।

बेलदार को पत्रकार और पत्रकार को बेलदार बना देने के हुनर में माहिर मोगाम्‍बो का कारनामा हमारे सामने तब आया जब म.प्र. के पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल गौर के मुरैना आगमन को मीडिया ने प्रकाशित करने से बहिष्‍कार कर दिया और मीडिया के कुछ मोगाम्‍बो के पालतूओं को छोड़ किसी ने कार्यक्रम को तवज्‍जुह नहीं दी, भाई हम भी बहिष्‍कार कर आये थे (बढि़या श्‍लोक और पुराण सुना आये थे, अफसर कुर्सी टेबलों के पीछे दुबकते फिर रहे थे)   इसलिये ग्‍वालियर टाइम्‍स ने बाबूलाल गौर का समाचार प्रकाशित नहीं किया था, हमें काफी ई मेल पाठकों ने इस सम्‍बन्‍ध में भेजे थे आशा है उन्‍हें जवाब मिल गया होगा । बाबूलाल गौर हमारे अतिशय प्रिय और हमारी नजर में अर्जुन सिंह के पश्‍चात सर्वाधिक सफल मंत्री व मुख्‍यमंत्री रहे हैं , उनका म.प्र. का मुख्‍यमंत्रित्‍व काल स्‍वर्णिम रहा है, हम गौर साहब से भी इस सम्‍बन्‍ध में क्षमा मांगना चाहेंगें कि हमारे प्रिय व आदरणीय होते हुये भी हम भरे दिल से न चाहकर भी मोगाम्‍बो के कारण अपने प्रिय मंत्री का समाचार प्रकाशित करने का बहिष्‍कार करना पड़ा । 

जेंगरे और पिल्‍ले

मुरैना में जेंगरा और पिल्‍ला बड़े लोकप्रिय हैं । दरअसल जेंगरा गाय के छोटे मगर कमजोर बछड़े को कहते हैं और पिल्‍ला कुत्‍ते के बच्‍चे को कहते हैं । लेकिन हमारी डायरी के इस भाग में जिन जेंगरो और पिल्‍लों की बात हम यहॉं कर रहे हैं वे न तो गाय के बछेरे हैं, और न कुत्‍ते के पिल्‍ले बल्कि जाने माने मुरैना के नामवर इंसानात हैं और कभी बाकायदा आदमी थे मगर कहते हैं न कि वक्‍त ने गालिब कुत्‍ता कर दिया , सो कुछ ऐसी ही कहानी शहर के मशहूर इन पालतू और दलाल जेंगरों और पिल्‍लों की है ।

 

...............क्रमश: अगले अंक में जारी 

Tuesday, July 7, 2009

गुरूपर्व पूर्णिमा पर विशेष : अपनी पूजा करवायें वे प्रभु को क्या पहचानें

गुरूपर्व पूर्णिमा पर विशेष : अपनी पूजा करवायें वे प्रभु को क्या पहचानें

नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

हालांकि कल या परसों तक जब तक यह आलेख अखबारों में प्रकाशित होगा तब तक गुरूपर्व निकल चुका होगा ! मेरी इच्छा हुयी कि अबकी बार इस महान गुरू पूर्णिमा पर अपने विचार और अनुभव आपके बीच बॉटू !

मनोज कुमार की पुरानी फिल्म सन्यासी का एक प्रसिध्द गीत है, स्व. मुकेश एवं लता जी ने इसे गाया है - इसे जरूर सुना जाना चाहिये -

गीत में काम की पंक्तियां है- ये साधु के वेष में पापी रोज पाखण्ड रचायें, दिन में डाके डाले पापी रात में कतल करायें, सच बोले सन्यासी इनका कभी न हो कल्यान ...ये है गीता का ज्ञान

वेद शास्त्रों की भाषा को ये ढोंगी क्या जानें, अपनी पूजा करवायें ये प्रभु को क्या पहचानें .....ये है गीता का ज्ञान

यू तो गुरू महिमा अनन्त है और गुरू एक ऐसी कड़ी एक ऐसा सहारा होता है जो अपने शिष्य को कैसी भी मंझधार में फंसने पर येन केन प्रकारेण पार लगाता है, और इस दरम्यान अगर स्वयं साक्षात ईश्वर से भी उसका टकराव हो जाये तो सीधी टक्कर लेकर स्वयं की बलि भी देकर अपने शिष्य की रक्षा करता है !

गुरू बनना बेहद कठिन है, आजकल तो लगभग नामुमकिन है ! गुरू हजार मायावी बंधनों में बंधा है, गुरू लाखों कामनाओं की पतंग उड़ाता रहता है, गुरू मार्केटिंग की ख्वाहिश से ऐसे शिष्य तलाशता है कि जल्दी से जल्दी ख्यातनाम हो जाये और धनवान शिष्यों का मेला उसके पास टूट पड़े ! गुरू बनना वाकई कठिन हो गया है, फर्जी ढकोसले बाज मार्केटियर्स - ब्राण्ड नेम आज बाजार में अपार हैं लेकिन गुरू कोई नहीं दिखता !

भगवान श्रीकृष्ण, श्री गणेश, भगवान शंकर और प्रभु विष्णु, भगवान ब्रह्मा जी की चरण पादुकाओं का पूजन या अभीष्ट देव, देवता या देवी की पूजा या उनका पादुका वन्दन गुरू पर्व पर मुझे श्रेष्ठ जान पड़ता है !

आजकल गुरू की जगह पाखण्डी अधिक मिलते हैं ! जिन्हें न शास्त्रों का ही ज्ञान है, न शास्त्रों आदेशों से सुभिज्ञ हैं न गुरू शिष्य परम्परा से वाकिफ हैं और न संस्कार प्रणाली से परिचित ही ! मेरा आशय व संकेत किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कतई नहीं हैं ! लेकिन मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ !

कई वर्ष पहले बचपन से ही मुझे ईश्वर और ईश्वरीय चमत्कारों से साक्षात्कार की गहन तमन्ना रही और मैंने अपने जीवन का हर पल कुछ न कुछ पाने में गुजारा ! मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से लेकर एल.एल.बी. और एम.एस.सी. भौतिक शास्त्र तक की पढ़ाई लिखाई की और यह भी खास बात है कि मैं सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण रहा, कई बार टॉपर रहा ! मुझे कुछ रिसर्च और अनुसंधान अन्वेषण करने का भी अवसर प्राप्त हुआ ! पर इस सबके बीच जो खास बात है वह यह कि मुझे गाँव में वक्त गुजारने का अधिक मौका मिला है और मेरी पहली पसन्द ग्रामीण जीवन है ! अपने गाँव में जब भी छुटिटयां बिताने या अन्य किसी अवसर पर जाता तो छुटटी बीतने के भी बाद एकाध दो महीने गॉव में बिता ही देता था ! सो मुझे हल जोतने और गाय भैंस जैसे प्शु चराने का खूब आनन्द मिला ! गहरे डाँग बेहड़ जंगल, चरवाई, नदी मछण्ड मुझे नापने का खूब अवसर मिला !

जंगलों और बेहड़ों में आप थोड़ा गहरे घुस जायेंगें तो आपको कई अनुपम व अदभुत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलेंगें ! कई बार अनेक साधु, तांत्रिक, और विचित्र वेशभूषा वाले जादूगर, टोनागर, तो अनेक बार बागी, बदमाश या अपहरण करके लड़कियां बेचने वाले गिरोह के गिरोह मिल जायेंगें ! मुझे तकरीबन सभी प्रकार के लोगों से मिलने का सौभाग्य मिला है, खैर अब तो काफी वक्त हुआ जंगलों बेहड़ों में जाना नहीं हुआ, लेकिन जंगलों में बेहड़ों में काफी रहस्य छिपे पड़े हैं ! मैंने हजारों (शायद लाखों साल) पुरानी कई विशाल शिला प्रतिमायें बीच घने घनघोर जंगलों में यूं ही बिखरी पड़ी देंखीं हैं !

राजस्थान में करौली माचलपुर की एक लम्बी चौड़ी डाँग है, जहाँ प्रकृति के रहस्यमय खजानों का अदभुत व विपुल भण्डार है ! बहुत बरस हुये तब मैंने इन्हें अपनी ऑंखों से देखा ! गुप्त गुफाओं में कई मंदिर, बीच जंगली खारों में विशाल प्रतिमाये ंतो कई सूनसान वीराने मंदिर भी मुझे देखने को मिले ! तब मैं उनके महत्व से अपरिचित था और उनकी मूल्यवत्ता से अनभिज्ञ था ! आज आभास होता है कि कई बेशकीमती ऐतिहासिक और प्राकृतिक खजाने वहाँ थे ! अब जब यह सब समझ आया तो वहाँ जाना ही नसीब नहीं हो पाया ! अब तो सुना है कि वह क्षेत्र डकैतों की शरण स्थली बन गया है, खैर डकैत वहाँ तब भी थे लेकिन छोटे मोटे और बीड़ी बण्डल छीनने वाले भैंस चोर ही थे ! और कई बार तो हम सब गाय भैंस चराने वालों ने उनकी जमकर लठठों से धुनाई भी की थी, दरअसल वे लोग नदी से मछली पकड़ते मारते थे, और हम सब इसे पाप मानते थे सो सारे बालक मिलकर उनकी जमकर कुटाई कर देते थे, कई बार पीलू के पेड़ों में बॉध कर डलवा देते थे तथा सेहियां (सेही एक बड़े काँटो वाला जानवर होता है) छोड़ कर उन्हें तंग करते थे ! सेही अगर चिपक जाये तो खून पी जाती है यह बाद में पता चला, लेकिन लाठी से सेही जमीन पर गिरा ली जाती है अगर आप तेज लाठी चलाना जानते हों ! सेही का तंत्र मंत्र भी काफी इस्तेमाल होता है, सेही का कांटा अगर आप किसी घर में गाड़ दे ंतो वहाँ कभी शान्ति नहीं रहेगी, घरवाले आपस में ही लड़ते रहेंगे, ऐसी ंकिंवदन्ती है ! और सेही का कॉटा यदि दही की नाँद के नीचे गाड़ दें या चक्की यानि चकिया के नीचे गाड़ दें घर में दूध दही घी और आटे की कमी नहीं रहती , ऐसी किंवदन्ती भी है ! किसी जमाने में सेही के कॉटों और सेहीयों के बीच रह कर आज कल एक कॉटा भी सेही का नहीं मिल पा रहा वरना सब भ्रष्टों के घर एक एक गाड़ देते ! मिलेगा तो गाड़ेंगे जरूर, देखते हैं क्या होता है !

कई साधुओं से जंगल डॉग में भेंट हुयी , बाल स्वाभाविक कौतूहलता वश हरेक से पूछा - काये बाबा भगवान के दरसन कराय दोगे का - लेकिन हर बाबा ने हर बार यही कहा कि अरे बच्चा भगवान का ऐसे ही मिलते हैं का, बाकें लें भजन करों बिनकी माला फेरो तब जायकें दस बीस जनम में भगवान मिलेंगे ! सो भईया जिस बाबा से जब भी मिले, दे दे भगवान के नाम पर कहने वाले मिले भगवान के दरसन कराने वाला कोई नहीं मिला ! कई गुरू ऐसे मिले जो हवा में हाथ उठा देते और जो भी चीज उनसे माँगो वही हवा में से प्रकट कर देते ! मैंने आजमाइश के तौर पर कुछ विचित्र चीजों के नाम लिये उनने वे भी मंगा दीं, पर बाद में जब इस लाइन में आगे बढ़ा तो पता चला कि जिन्नात की सिध्दि कर लेने से ऐसा हो जाता है ! मेरा मामला वहाँ भी नहीं जमा, कुछ मुसलमानी, कुछ बौध्द तो कुछ जैन साधकों को भी मैंने गुरू बनाया लेकिन बात वही रही सब पर थोड़ा थोड़ा था, पूर्ण कोई नहीं था ! मैंने ज्योतिष में कई लोग तलाशे लेकिन कोई भी ज्योतिष में मेरे सवालों के उत्तर नहीं दे पाया ! एक गुरू ऐसे मिले जो रोज एक ऍग्रेजी व्हिस्की मंगाते हलांकि उन पर बहुत कुछ देने को था लेकिन वे किसी को कुछ देते नहीं थे, थोड़ा बहुत वहाँ से बटोरने की कोशिश की ! जादू टोना टोटका, तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष सबके गुरू तलाशे लेकिन पक्का काम किसी के पास नहीं था ! दक्षिण मार्गी वाम मार्गी हर विद्या में कहीं कोई कच्चा पड़ता तो कोई कहीं ! खैर मुझे अभी भी गुरूओं की तलाश है, कोई मिलेगा तो जरूर बनाऊंगा, फिलहाल मेरा कोई एकमात्र शरीरधारी गुरू नहीं है !      

खैर बहुत लम्बी तलाश के बाद आखिर सच्चा गुरू मिला और तमाशा यह कि वह कोई शारीरिक व्यक्ति नहीं बल्कि आध्यात्मिक व्यक्ति था ! मेरी खोज कुछ यूं पूरी हुयी कि जब मुझे एक गुरू नहीं मिला और मेरे मानदण्डों पर खरा नहीं उतरा तो मैंने जहाँ से भी जो भी सीखा उसे ही अपना गुरू मानना शुरू कर दिया, सो भई मेंरे पास मेंरे गुरूओं की लम्बी चौड़ी फौज बनना शुरू हो गयी, लेकिन अक्सर ये हुया कि किसी से चन्द बातें सींखीं तो किसी से चन्द सूत्र टिकाऊ गुरू तो चन्द ही हुये ! आज इस आलेख के जरिये अपने गुरूओं का स्मरण कर उन्हें सादर प्रणाम एवं नमन करता हूँ !

असल गुरू कौन कौन - गुरू पर्व मानने वालों को निम्न असल गुरूओं को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिये (यह लोग मेरे गुरू हैं)

 

माता (जन्मदात्री और पालनहारिणी)

 

पिता (जन्मदाता और पालनहार)

 

गुरू - बुध्दि, ज्ञान, चेतना, विवके प्रदाता और अहंकार सहित पंचमकार नाशक, लोभहीन, निर्विकार, योगी, समदृष्टा, सुपथदर्शी, सदा रक्षक

 

श्री कृष्ण -अपरिमित, अपरिभाषित, योगेश्वर, अखिलेश्वर, सच्चिदानंदघन, सर्व समाधान कारक, सर्व पथ प्रदर्शक

 

श्री गणेश- बुध्दि, ज्ञान, विवेक, शुभ लाभ प्रदाता, विघ्न कारक, विघ्न हारक, शत्रु, ऋण, रोग, दारिद्रय संहारक

 

भगवान शंकर- कालकूट हलाहल नाशक, मान अपमान पर विजय प्रदाता, परम योगी, तमोगुण हारक, सर्व कल्याण प्रदाता, अवगुण एवं दोष नाशक

 

स्वामी विवेकानन्द- सदगुरू- सर्वपथ प्रदर्शक, विवेक प्रदाता

 

जेम्स एलन श्रेष्ठ मार्गदर्शक, तमोगुण नाशक सतोपथ दर्शक, विजय प्रदाता

 

दस महाविद्या- सर्व रक्षक

 

         

अधिकतर लोग गुरू पूर्णिमा पर गोवर्धन गिरिराज जी पूजन और परिक्रमा के लिये जाते हैं, कुछ लोग दतिया पीताम्बरा पीठ पर स्वामी जी के विग्रह पर चरण वन्दन के लिये जाते हैं मुझे लगता है यह ठीक है एवं सर्वोत्तम है ! मैं अपने प्रिय गुरूजन प्रभु श्रीकृष्ण एवं पीताम्बरापीठ के अतुलनीय शक्तियों के स्वामी जी महाराज के चरणों में गुरू पर्व पर अपना सादर चरण वन्दन करता हूँ !

पीताम्बरापीठ के स्वामी जी महाराज के लिये कहा गया है -

करारविन्देन परामृषण्तं, पदमाक्षमालां शिवरूपिणतं !

पीताम्बरा ध्यान निमग्नचित्तं, श्री स्वामिनं राष्ट्रगुरूं स्मरामि !!

अर्जुन ने श्रीमदभगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण को गुरूओं का गुरू सबसे बड़ा गुरू कह कर प्रभु श्रीकृष्ण की गुरू स्वरूप में महत्ता प्रतिपादित की है -

पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरूर्गरीयान !

न त्वत्समोत्स्त्यभ्यधिक: कुतोऽन्योलोकत्रये प्यप्रमिप्रभाव !!

यत्र योगेश्वर: कृष्णो, यत्र पार्थो धनुर्धर: !

तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्धु्रवा नीतिर्मतिर्मम !!

अनन्याश्चिन्तयतों मां ये जना: पर्युपासते !

तेषां नित्याभुक्तांनां योगक्षेमं वहाम्यहम् !!

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्‍णु गुरूर्देवो महेश्‍वर: ।

गुरूर्साक्ष्‍परब्रह्म तस्‍मैश्री गुरूवै नम:  

Sunday, July 5, 2009

आओ विद्युत बचाएं: देश को आगे ले जायें, विद्युत की बचत ही विद्युत का उत्पादन है

आओ विद्युत बचाएं: देश को आगे ले जायें, विद्युत की बचत ही विद्युत का उत्पादन है

आदेश शर्मा (भारद्वाज)

काशी नरेश की गली , भारद्वाज बाडा ग्वालियर, बाइल : 9826284045

       विद्युत राष्ट्रीय ऊर्जा है तथा राष्ट्र की समृध्दि और विकास का आधार भी। विद्युत ऊर्जा के उपयोग और उपभोग के प्रति आम जनता और उपभोक्ता की सोच दूरगामी परिणामों को लेकर गंभीर नहीं है। विद्युत का उपयोग  बेदर्दी और प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर हो रहा है। आम तौर पर होने वाले कार्यक्रमों में इस तरह की स्पर्धा बढ़-चढ़ कर देखी जा सकती है । प्राय: लोग विद्युत उपयोग का भी दिखावा करते हैं और कहते हैं कि ''हमने इतनी रोशनी की'' हमें ऐसे थोथे विचारों को त्यागना होगा जो राष्ट्रीय ऊर्जा का संकट बढाने वाले साबित हों । दरअसल विद्युत का मितव्ययता से उपयोग ही राष्ट्र  और समाज के भविष्य को मजबूती प्रदान करने वाला हो सकता है।

       विद्युत ऊर्जा का उपयोग हमें अपनी कड़ी मेहनत से अर्जित धन की तरह करना चाहिए। साथ ही हमें अपने मन में यह भाव भी लाना होगा कि हम राष्ट्रीय ऊर्जा का अनावश्यक और अनाधिकृत उपयोग कर अपराध न करें । विद्युत ऊर्जा के अनियमित उपयोग से बिजली और पानी की समस्या विकराल रूप ले रही है जिससे सामाजिक वैमनस्यता बढ रही है और राष्ट्रीय और सामाजिक प्रगति भी अवरूध्द होती है।

       हमारे देश में पॉच तरीकों से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है इनमें से (हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी ) जल विद्युत इकाई के निर्माण एवं उपयोग योग्य बनाने में लगभग 10 से 12 वर्ष का समय, हजारों व्यक्तियों का श्रम और 1000 करोड़ की  अनुमानित लागत आती है तब कहीं  450 से 500 मेगावॉट विद्युत उत्पादन वाली विद्युत इकाई स्थापित होती है । जिससे प्रति यूनिट उत्पादन लागत लगभग 60 पैसे आती है ।

कोयले से उत्पादित की जाने वाली (ताप विद्युत) इकाई के कार्य को पूरा करने में पांच वर्ष छ: माह का समय और लगभग 500 करोड़ की लागत आती है जिससे 250 से 500 मेगावॉट का उत्पादन होता है । ताप विद्युत ऊर्जा की  लागत 2.50 रूपये प्रति यूनिट आती है। वहीं नाभिकीय विद्युत (न्युक्लिीयर इलेक्ट्रिीसिटी) इकाई को उत्पादन योग्य बनाने में पॉच वर्ष का समय और 900 करोड़ रूपये की राशि खर्च कर 500 से 1000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन किया जा सकता है । नाभिकीय ऊर्जा की प्रति यूनिटउत्पादन लागत लगभग 1.90 रूपये  आती है। सौर ऊर्जा और वायु वेग से  (विन्ड इलेक्ट्रिसिटी) विद्युत उर्जा का उत्पादन रेगिस्तानों अथवा समुद्री तटों आदि पर जहां सूर्य की तेज किरणों से अथवा तीव्र गति वायु औसतन 60 से 75 किमी प्रति घण्टा के वेग से चलती हो से किया जाता है ।

काफी समय, कठिनाईयों, करोड़ों रूपये की लागत तथा हजारों हाथों की मेहनत से उत्पादित विद्युत ऊर्जा की मांग जिस तेजी से बढ रही है उसके अनुरूप उत्पादन किया जाना संभव नहीं हो पा रहा । भविष्य  में ऊर्जा संकट से निजात दिलाने के लिये सरकार ने बिरसिंगपुर में 500 मेगावॉट और अमरकंटक में 210 मेगावॉट बाणसागर, टोन्स, रीवा के सिलपरा में तीन विद्युत इकाईयों में 40 मेगावॉट, 30 मेगावॉट और 20 मेगावॉट के अलावा मणी खेडा बांध पर भी एक  जल विद्युत ईकाई को उत्पादन योग्य बनाया जा रहा है । म.प्र. शासन और विद्युत मण्डल दोनों की जागरूकता से विद्युत के क्षेत्र में किये जा रहे सकारात्मक प्रयास  भी दिखाई दे रहे हैं। इन प्रयत्नों के साथ - साथ विद्युत उपभोक्ताओं का सक्रिय सहयोग भी अति आवश्यक है।  हमें विद्युत उर्जा बचत के लिये कम उर्जा खपत कर अधिक रोशनी प्रदान करने वाले सी.एफएल को उपयोग में लाना चाहिये। साथ ही जब भी घर के बाहर जावें बत्ती  बुझाना भी न भूलें 

       सड़क बत्ती के उपयोग में 250 वॉट के हैलोजन बल्वों की जगह 100 वॉट की सी.एफ.एल उपयोग में लावें ।  साथ ही सर्किट व्यवस्था से चलने वाली सड़क बत्ती को अमल में लाना चाहिये। ऊर्जा संकट में ए.सी. तथा अधिक विद्युत खपत वाले उपकरणों का मित्तव्ययता से उपयोग करना चाहिये ताकि ए.सी. से बाहर निकलने पर होने वाले शारीरिक तापमान के असन्तुलन से  होने वाली बीमारियों से भी बचा जा सके ।  इस प्रकार सावधानी से जहाँ हम शरीर को स्वस्थ्य रख सकते हैं वहीं ऊर्जा बचत के महायज्ञ में भी अपना योगदान दे सकते हैं ।

       ऊर्जा बचत हमें जोड़ती है । परिवार के सभी सदस्य एक कमरे में इकट्ठा बैठकर बत्ती, पंखा या कूलर का सामूहिक उपभोग करके भी विद्युत की बचत कर सकते हैं ।  नगरीय क्षेत्र में पानी के लिये प्रत्येक घर में प्रयुक्त होने वाली 250 वॉट की विद्युत मोटरों को एक साथ एक समय में चलाकर भारी विद्युत ऊर्जा खर्च की जाती है । अगर वार्ड और मोहल्लों में पानी की बडी टंकियों निर्मित की जाकर ज्यादा दबाब से पानी दिये जाने की व्यवस्था को व्यवहार में लावें तो विद्युत की काफी बचत की जा सकती है।   

       विवाह समारोह और अन्य सार्वजनिक आयोजनों हेतु उपयोगी क्षेत्रफल में पर्याप्त प्रकाश मिलने में उपयोग होने लायक भार की  ही स्वीकृति प्रदान की जावे । एक ही स्थान पर    चार-चार बल्वों का उपयोग न करें । अनावश्यक उपयोग की जा रही विद्युत ऊर्जा को रोका जाकर विद्युत बचत की जा सकती है। यदि संभव हो तो शादी समारोह आदि दिन में आयोजित किये जावें जिससे बिजली की बचत होगी । स्कूलों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को विद्युत उपयोग की महत्ता से अवगत कराने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा सकते हैं ।साथ ही सरकारी कार्यालयों में सीमित विद्युत उपयोग किया जावे । प्रदेश के शासकीय कार्यालयों द्वारा देश के अन्य राज्यों के समान पांच दिवसीय कार्यशील सप्ताह शैली को अंगीकार किया जाना चाहिये। बाजार सायं काल जल्दी बन्द किये जावें। सड़क बत्ती सांयकाल देरी से चालू की जाकर सुबह जल्दी बन्द की जावें।  हीटर/गीजर की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण का उपयोग किया जावे तथा सी एफ एल सस्ती दरों पर सुलभ हों । विद्युत बचत के उपायों को अपनाकर हम मॉल एवं शापिंग कॉम्पलेकसों में उपयोगिता के आधार पर विद्युत का उपयोग हो न की प्रदर्शनार्थ अनाप - शनाप विद्युत प्रयुक्त की जावे। भवनों के निर्माण में प्राकृतिक  प्रकाश का अधिक लाभ मिले, इस बात का ध्यान रखा जावे।     विद्युत बचत के उपायों को अपनाकर हम  करोड़ों रूपये और हजारों हाथों की कड़ी मेहनत से उत्पादित की जाने वाली विद्युत ऊर्जा के उचित उपयोग से प्रदेश के उद्योगों, कृषि क्षेत्र और चिकित्सा जैसे अतिमहत्वपूर्ण कार्य हेतु पर्याप्त विद्युत ऊर्जा प्रदान कर प्रदेश और देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकते हैं।

 

आदेश शर्मा (भारद्वाज)

काशी नरेश की गली

भारद्वाज बाडा ग्वालियर

मेबाइल : 9826284045

 

समलैंगिक विवाद : 'सर्वश्रेष्ठ प्राणी' की 'श्रेष्ठता' पर उठते सवाल

समलैंगिक विवाद :  'सर्वश्रेष्ठ प्राणी' की 'श्रेष्ठता' पर उठते सवाल

निर्मल रानी, email: nirmalrani@gmail.com nirmalrani2000@yahoo.co.in nirmalrani2003@yahoo.com 163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा फोन-98962-93341

       हमारे धर्मशास्त्र हमें यह बताते हैं कि ईश्वर ने पृथ्वी पर 84 लाख विभिन्न यौनियों के रूप में प्राणियों की संरचना की है। प्राणियों की इस विशाल सूची में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ प्राणी के रूप में स्वीकार किया गया है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार भी अल्लाह ने इंसान को अशरंफुल मंखलूंकात के रूप में स्थान दिया है। जिसका अर्थ है प्रकृति की सभी रचनाओं में सर्वोत्तम। ंजाहिर है इंसान रूपी ऐसे विशिष्ट प्राणी से इसी प्रकार की विशिष्ट, असाधारण तथा सर्वश्रेष्ठ कारगुंजारियों की भी उम्मीद की जानी चाहिए। नि:संदेह समय व काल के अनुरूप यह सर्वश्रेष्ठ प्राणी ऐसी अनेक कारगुंजारियां अंजाम देता आ रहा है जिसने इंसान के सर्वश्रेष्ठ होने की मान्यताओं पर मोहर लगाई है तथा इसकी पुष्टि की है। परन्तु इसी के साथ-साथ कभी-कभी यह भी देखा गया है कि इसी इंसान रूपी प्राणी ने कभी-कभी अनैतिकता तथा घटियापन की उन सीमाओं को भी पार किया है जिनकी उम्मीद जानवरों से भी नहीं की जा सकती।

              कुदरत ने पृथ्वी पर जितने प्राणियों की संरचना की, उन सभी में दो प्रकार के लिंग की व्यवस्था की। एक पुल्लिंग तथा दूसरा स्त्रीलिंग। इन्हीं दोनों लिंगों के माध्यम से पूरी सृष्टि का निर्माण हुआ तथा यह सिलसिला अभी तक जारी है। बड़े आश्चर्य की बात है कि इंसान रूपी तथाकथित सर्वश्रेष्ठ प्राणी के अतिरिक्त पृथ्वी के शेष अन्य सभी 'अश्रेष्ठ' कहे जा सकने वाले प्राणियों ने तो प्रकृति द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों की लाज रखते हुए उसके बनाए नियमों का अक्षरश: पालन किया तथा आज भी करते आ रहे हैं। परन्तु अपनी बुद्धिमता का परचम लहराने वाला इंसान ंकुदरत द्वारा निर्धारित लिंग भेद की सीमाओं तथा मापदंडों की अवहेलना करने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है।

              इंसानों के मध्य से एक नए एवं अप्राकृतिक रिश्ते के सूत्रपात की ंखबरें आ रही हैं जिसे समलैंगिक रिश्तों का नाम दिया जा रहा है। इसका अर्थ है कि कोई भी पुरुष किसी अन्य पुरुष के साथ तथा कोई भी स्त्री किसी अन्य स्त्री के साथ अपनी इच्छानुसार यौन संबंध स्थापित कर सकते हैं। इस प्रकरण में सुखद बात केवल यह है कि इंसानों में ऐसी सोच तथा ऐसे विचार रखने वालों की संख्या नाममात्र है। परन्तु इसके बावजूद भारत सहित दुनिया के अन्य तमाम देशों को मिलाकर ऐसे लोगों की संख्या अब इतनी ंजरूर हो गई है कि इनकी आवांज को दुनिया सुन रही है तथा महत्व भी दे रही है।

              भारतवर्ष अपनी स्वयं की संस्कृति एवं सभ्यता रखने वाला एक प्राचीन देश है। यहां धार्मिक एवं प्राकृतिक मान्यताओं का सदैव आदर किया जाता रहा है। यही वजह है कि समलैंगिकता जैसा मनोरोग इस देश में कभी भी फल-फूल नहीं पाया। संभवत: यही वजह रही होगी जबकि विश्वव्यापी ब्रिटिश उपसाम्राज्यवाद के दौर में समलैंगिकता के विरुद्ध यदि कहीं ंकानून बनाया गया अथवा समलैंगिकता को ंगैरंकानूनी घोषित किया गया तो वह भारत ही दुनिया का पहला देश था। 1860 0 में लॉर्ड मैकॉले ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अन्तर्गत इसे अपराध घोषित किया। परन्तु गत् 2 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने समलैंगिक आन्दोलन चलाने वालों के पक्ष में एक ऐसा निर्णय सुना दिया जिससे कि 'सर्वश्रेष्ठ प्राणी' की श्रेष्ठता पर वांकई एक बड़ा प्रश्चिन्ह लग गया। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए पी शाह तथा न्यायाधीश एस मुरलीधर की न्यायपीठ ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए यह ंफैसला दिया कि समलैंगिक रिश्ते बनाना धारा 377 के अन्तर्गत अपराध की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि इस ंफैसले के साथ-साथ न्यायपीठ ने व्यस्क होने अर्थात् 18 वर्ष से अधिक की आयु होने तथा आपसी रंजामंदी होने की शतर्ें भी साथ रखी हैं। अदालत के इस ंफैसले से समलैंगिक रिश्ते रखने वाले तथा इनके प्रति हमदर्दी रखने वालों में कांफी जोश व उत्साह देखा जा रहा है। परन्तु भारत का सभ्य समाज चाहे वह किसी भी धर्म व सम्प्रदाय का क्यों न हो, उच्च न्यायालय के इस ंफैसले से हतप्रभ है।

              समलैंगिक रिश्तों को मान्यता दिलाए जाने की लड़ाई लड़ने वाले संगठन जो गत् 8 वर्षों से अपने कथित अधिकारों के लिए संघर्षरत थे, अब लुकछुप कर अपने रिश्ते स्थापित करने के बजाए और मुखरित होकर अपने संबंधों का ढिंढोरा पीटने तथा इसे प्रचारित करने की मुद्रा में हैं। यह मुट्ठीभर लोग समलैंगिक रिश्तों को लेकर अपने सामाजिक व मानवाधिकारों की बात कर रहे हैं। इनका तर्क है कि इन्हें इनकी ंखुशी व मंर्जी के अनुरूप रहने व जीने दिया जाए। अपनी निराली तथा आश्चर्यपूर्ण इच्छाओं को मनवाने की कोशिशों में लगा यह वर्ग प्राकृतिक तथा नैतिक मान्यताओं की ओर ध्यान देना ही नहीं चाहता। इस नाममात्र वर्ग को तो बस अपनी संतुष्टि तथा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने मात्र की ही चिंता है। यह वर्ग इस ओर भी ध्यान नहीं देना चाहता कि उनकी इन हरकतों का नई युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

              आज दुनिया मौसम के बदलते मिंजाज को लेकर कितना चिंतित व परेशान है। इसका कारण मनुष्य द्वारा सही दिशा में आगे बढ़ते हुए विकास के मार्ग तेंजी से तय करना तथा विकास के ही नाम पर होने वाले जंगलों की कटाई, चिमनी से उठने वाले धुएं, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में प्रतिदिन होने वाला इंजांफा तथा युद्ध से जूझने वाले हालात आदि हैं। इन सभी क्रियाओं के सकारात्मक तथा प्राकृतिक होने के बावजूद इस समय सृष्टि पर ऐसा ंखतरा मंडरा है जिसे ग्लोबल वार्मिंग का नाम दिया जा रहा है। कल्पना कीजिए कि यदि इंसान द्वारा इंसानी रिश्ते स्थापित करने के लिए अप्राकृतिक यौन संबंधों का सहारा लिया गया और वह भी केवल इंसान की संतुष्टि एवं उसकी ंखुशी की ंखातिर तो इस पृथ्वी पर क्या कुछ नहीं घट सकता।

              इंसान की इच्छाएं असीम होती हैं। अप्राकृतिक रूप से समलैंगिक संबंध स्थापित करने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति अपने यौन सुख की ंखातिर समलैंगिक होने के अतिरिक्त अन्य किसी स्तर तक भी जा सकता है। यदि वह किसी अन्य प्राणी के साथ यौन संबंध स्थापित करना चाहे, तब भी ऐसा इंसान अपने पक्ष में तरह-तरह के तर्क पेश कर सकता है। और यदि भविष्य में 'बदलते समय' के नाम पर ऐसे रिश्ते स्थापित किए जाने को भी सामाजिक मान्यता प्रदान कर दी गई तो निश्चित रूप से यह पृथ्वी रहने योग्य नहीं रह जाएगी। ऐसे रिश्ते समाज में कैसे विकार पैदा करेंगे, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

              अत: ंजरूरत इस बात की है कि समलैंगिक रिश्तों को ंकायम करने वाले तथा इनकी वकालत करने वाले लोग जो निश्चित रूप से हमारे ही भाई-बहनों के समान हैं तथा हमारे ही समाज के प्रमुख अंग हैं, को इस विषय पर समझाया बुझाया जाए तथा समलैंगिकता के रूप में प्रकट होने वाले मनोरोग रूपी इस लक्षण का समुचित इलाज कराया जाए। ऐसा नहीं है कि समलैंगिकता के पक्ष में सैकड़ों तर्क प्रस्तुत करने वाला यह मुट्ठी भर वर्ग समलैंगिक रिश्तों के बाद मिलने वाले संभावित भयावह परिणामों को समझ नहीं सकेगा। यहां इस विषय पर इस्लामी इतिहास की एक घटना का उल्लेख करना उचित होगा। इस्लामी इतिहास में हंजरत लूत नामक एक पैंगम्बर हुए हैं। कहा जाता है कि एक विशेष क्षेत्र के लोग उनके समय में पुरुषों के मध्य समलैंगिक रिश्ते अत्याधिक स्थापित करते थे। ंखुदा को जब यह बात नागवार गुंजरी तब आकाशवाणी के माध्यम से खुदा ने हंजरत लूत को यह पैंगाम दिया कि वे लोगों को अपनी इस ंगैर ंकुदरती हरकतों से बांज आने को कहें अन्यथा उन्हें ंखुदा के ंकहर का सामना करना पड़ेगा। हंजरत लूत ने ंखुदा का पैंगाम आम लोगों तक पहुंचाया परन्तु आवाम ने पैंगम्बर द्वारा जारी किए गए ंखुदा के हुक्म की अनसुनी कर दी। परिणामस्वरूप उस पूरे क्षेत्र में बड़े-बड़े पत्थरों की भीषण बारिश हुई। ंखुदा के इस अंजाब के बाद लोगों की आंखें खुलीं और उन्होंने अपने दुष्कर्मों से तौबा की।

              प्राकृतिक प्रतिक्रया से सम्भवत: बेंखबर दिल्ली उच्च न्यायालय के ंफैसले ने हालांकि समलैंगिकों की हौसलाअंफंजाई की है। परन्तु ऐसा नहीं लगता कि उच्चतम न्यायालय व भारतीय संसद भी दिल्ली उच्च न्यायालय का समर्थन करेगा। समाज तथा सरकार को इस बात की पूरी कोशिश करनी चाहिए कि किसी भी प्रकार से भारत में रहने वाले समलैंगिकों को यह समझाया जा सके कि उनके द्वारा मात्र उनकी यौन संतुष्टि अथवा ंखुशी के लिए उठाया जाने वाला उनका कोई भी ंकदम न केवल प्रकृति विरोधी तथा भारतीय संस्कृति व सभ्यता का विरोधी है बल्कि देश की कर्णधार नई युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए भी ऐसी कोशिशें अत्यन्त घातक हैं।   निर्मल रानी

 

Thursday, July 2, 2009

योग के आठों अंगों का पालन करने से शरीर, चित्त की शुध्दि होती है

योग के आठों अंगों का पालन करने से शरीर, चित्त की शुध्दि होती है

ग्वालियर 2 जुलाई 09। जिला पतन्जलि योग समिति द्वारा पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के तत्वाधान में विनय नगर सेक्टर तीन में नियमित रूप से प्रात: 5 बजे से 6.30 तक योग कक्षाओं का निशुल्क संचालन किया जा रहा है। सभी साधक साधिकायें आसन प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कर रहे हैं। रोग मुक्ति योग एक्यूप्रेशर तथा भजन के साथ पातन्जलि योग सूत्रों का ज्ञान भी श्री रामचन्द्र गुप्त योग शिक्षक द्वारा नियमित रूप से दिया जा रहा है। अध्याय दो सूत्र 28 ' योग अंगानु अष्ठापद शुध्दि क्षये ज्ञानदीप्ति शविवेक ख्याते:' की व्याख्या कतरे हुए श्री गुप्त द्वारा बताया गया कि योग के आठ अंगों (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) का पालन करने से अशुध्दि का क्षय हो जाता है। शरीर और चित्त दोनों की शुध्दि हो जाती है। और चित्त की शुध्दि हो जाने से ज्ञान का प्रकाश हृदय में जागृत हो जाता है। जिससे हम स्वयं व मन की पृथकता का अनुभव करने लगते हैं। इसके प्रकाश में ही विवेक ख्याति का उदय होता है जिससे हम स्वयं को प्रकृति से पृथक समझने लगते हैं और यही सम्प्रज्ञात समाधि की अन्तिम अवस्था है जो हमें धीरे -धीरे प्रकृति के पार ले जाकर ईश्वर का साक्षात्कार करा देती है।

 

Tuesday, June 30, 2009

फोन नंबर एवं ई मेल पते- मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड, मुरैना

मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड, मुरैना

 

ईमेल : semorena@mpmkvvc.com

क्र

नाम

 

पद

 

पद स्थान

 

एसटीड़ी
कोड नं

 

फोन नं

 

मोबाईल नं

 

ऑफिस

 

निवास

 

1

 

2

 

3

 

4

 

 

 

 

 

 

 

5

 

अधीक्षण कार्यालय वृत्त मुरैना

 

1

 

एसक़े क़ंसल

 

अधीक्षण यंत्री

 

वृत्त मुरैना

 

07532

 

234452

 

232347

 

9406902230

 

2

 

एमएस ग़ौर

 

अधीक्षण यंत्री

 

-''-

 

07532

 

234452

 

-

 

9406902580

 

3

 

अमित श्रीवास्तव

 

कार्यपालन यंत्री

 

-''-

 

07532

 

234452

 

 

 

9301108190

 

कार्यालय कार्यपालन यंत्री (संचासंधा) प्रथम

 

1

 

आरक़ेएस राठौर

 

कार्यपालन यंत्री

 

कापायं मुरैना

 

07532

 

234797

 

232963

 

9406902574

 

2

 

आरपी भटनागर

 

सहायक यंत्री

 

-

 

07532

 

 

 

 

 

9406902575

 

3

 

केड़ी भौमिक

 

सहायक यंत्री

 

मुरैना (श)

 

07532

 

234156

 

 

 

9406902576

 

4

 

रघुवीर सिंह

 

कनिष्ठ यंत्री

 

मुरैना (श)

 

07532

 

 

 

 

 

9406902579

 

5

 

संजय सिंह

 

सहायक यंत्री

 

अम्वाह वितरण केन्द्र

 

07538

 

256429

 

 

 

9993166067

 

6

 

मुकेश कुमार बंसल

 

कनिष्ठ यंत्री

 

अम्वाह वितरण केन्द्र

 

07538

 

256429

 

 

 

9406902378

 

7

 

व्हीएस यादव

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

थरारछेड विक़े

 

07532

 

 

 

 

 

9406902375

 

8

 

बीपी ग़ोयल

 

कनिष्ठ यंत्री

 

गणेशपुरा वितरण केन्द्र

 

07532

 

242816

 

 

 

9406902523

 

9

 

यूएस मित्तल

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

रजौदा वितरण केन्द्र

 

07532

 

226217

 

 

 

9926626262

 

10

 

विशाल भालाधरे

 

कनिष्ठ यंत्री

 

दत्तपुरा वितरण केन्द्र

 

07538

 

 

 

 

 

9424924609

 

11

 

राजीव रंजन

 

सहायक यंत्री

 

पोरसा वितरण केन्द्र

 

07538

 

254008

 

 

 

9406957196

 

12

 

आरक़े लटोरिया

 

कनिष्ठ यंत्री

 

पोरसा वितरण केन्द्र

 

07538

 

254008

 

 

 

9993525531

 

13

 

मोहन लाल जैन

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

दिमनी वितरण केन्द्र

 

 

 

 

 

 

 

9329196532

 

14

 

पीएस क़ुशवाह

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

खडियाहार विक़े

 

07538

 

231080

 

 

 

9926213364

 

कार्यालय कार्यपालन यंत्री (संचासंधा) द्वितीय

 

1

 

सुनील धूपड

 

कार्यपालन यंत्री

 

कापायं मुरैना-॥

 

07532

 

232918

 

 

 

9406902587

 

2

 

एसपी दुबे

 

सहायक यंत्री

 

मुरैना द्वितीय

 

07532

 

 

 

 

 

9406902588

 

3

 

सीक़े ज़ैन

 

सहायक यंत्री

 

बानमौर

 

07532

 

255550

 

 

 

9406902390

 

4

 

सुभाष कडर्ेकर

 

कनिष्ट यंत्री

 

बानमौर

 

07533

 

255551

 

 

 

9406902270

 

4

 

बीएल यादव

 

कनिष्ठ यंत्री

 

जीगनी

 

 

 

 

 

 

 

9406902522

 

5

 

अनिल गुप्ता

 

कनिष्ठ यंत्री

 

हेतमपुरबागचीनी

 

07532

 

 

 

 

 

9406902525

 

6

 

जेबी श्रीवास्तव

 

कनिष्ठ यंत्री

 

सुमावलीनूराबाद

 

07532

 

 

 

 

 

9406902389

 

कार्यालय कार्यपालन यंत्री (संचासंधा) सबलगढ

 

1

 

अमर सिंह मौर्या

 

कार्यपालन यंत्री

 

कापायं सबलगढ

 

07536

 

252369

 

252306

 

9406902577

 

2

 

एक़े श्रीवास्तव

 

सहायक यंत्री

 

कार्या सबलगढ

 

07536

 

252362

 

 

 

9755424314

 

3

 

प्रकाश आर्या

 

कनिष्ठ यंत्री

 

पहाडगढ वितरण केन्द्र

 

07536

 

286227

 

 

 

9406902377

 

4

 

एएल अहीरवार

 

कनिष्ठ यंत्री

 

जौरा वितरण केन्द्र

 

07537

 

245037

 

 

 

9406902356

 

5

 

सुरेश कुमार

 

सहायंक यंत्री

 

जौरा वितरण केन्द्र

 

07537

 

245037

 

 

 

9406902357

 

6

 

आरक़े रजक

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

सवलगढ (आर)

 

07536

 

252352

 

 

 

9406902360

 

7

 

डीएस तोमर

 

कनिष्ठ यंत्री(जेटी)

 

झुण्डपुरा

 

 

 

 

 

 

 

9754689140

 

8

 

जीएस यादव

 

सहायक यंत्री

 

कैलारस वितरण केन्द्र

 

07536

 

287041

 

 

 

9406902362

 

9

 

आरक़े दुबे

 

सहायक यंत्री

 

कैलारस वितरण केन्द्र

 

07536

 

287041

 

 

 

9301598796

 

10

 

सोमदत्त मिश्रा

 

कनिष्ठ यंत्री

 

अलापुर वितरण केन्द्र

 

07537

 

245028

 

 

 

9406902500

 

11

 

डीएस ज़ादौन

 

कनिष्ठ यंत्री

 

रामपुर विक़े

 

07537

 

255296

 

 

 

9993612266

 

12

 

रमेश कुमार

 

कनिष्ठ यंत्री

 

सुर्जमा

 

 

 

 

 

 

 

9406902396

 

कार्यालय कार्यपालन यंत्री (एसटीसी) मुरैना

 

1

 

एसक़े त्रिवेदी

 

कार्यपालन यंत्री

 

कापायं एसटीसी

 

07532

 

233495

 

 

 

9406902581

 

2

 

पीएस तोमर

 

सहायक यंत्री

 

कापायं एसटीसी

 

07532

 

233495

 

 

 

9406902524

 

कार्यपालन यंत्री (एसटीएम)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1

 

बृजेश कुमार त्रिवेदी

 

सहायक यंत्री