बुधवार, 28 नवंबर 2007

जन शिकायतों के त्‍वरित व समयबद्ध निराकरण के लिए शिकायत विण्डो से होगा शिकायतों का निपटारा

जन शिकायतों के त्‍वरित व समयबद्ध निराकरण के लिए शिकायत विण्डो से होगा शिकायतों का निपटारा

खास खबर

मुरैना 27 नवम्बर 2007 // राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जन शिकायतों के त्वरित एवं स्थाई निराकरण हेतु मुरैना जिले में नवाचार के तहत प्रक्रिया को सरल बनाया गया है । यह व्यवस्था न्यायिक और पुलिस विभाग को छोड़कर समस्त विभागों पर लागू की गई है ।

      कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि शिकायतों के निराकरण हेतु लागू इस नवीन प्रक्रिया के तहत शिकायत विण्डों पर रखी पंजी में क्रमानुसार आवेदन पत्र इन्द्राज किये जायेंगे । इसमें आवेदक का नाम, आवेदन के संक्षिप्त तथ्य, बिण्डो पर तैनात कर्मचारी के संक्षिप्त हस्ताक्षर और विभाग का नाम अंकित रहेगा । आवेदन प्राप्त होने के उपरांत आवेदक को आवेदन निराकरण पर्ची तत्काल अथवा डाक के माध्यम से उपलब्ध कराई जायेगी । शिकायत विण्डों से प्रभारी अधिकारी के हस्ताक्षर युक्त पर्ची आवेदन सहित संबंधित विभाग में पहुंचने पर उसे पंजी में दर्ज किया जायेगा  और आवेदन पर अनुक्रम नम्बर का उल्लेख किया जायेगा । आवेदन पत्र का निर्धारित समय-सीमा में आवेदक को विधिवत सुनने के पश्चात निराकरण किया जायेगा और इससे आवेदक को अवगत कराया जायेगा । निराकरण की प्रति शिकायत विण्डों पर भेजी जायेगी, जहां उसे पंजी में दर्ज कर शिकायत को विलोपित करने की कार्रवाई की जायेगी ।

      इस व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर कार्यालय में सहायक ग्रेड-2 श्री सोवरन सिंह सिकरवार, मुख्य प्रभारी लिपिक के रूप में कार्य करेंगे तथा प्रस्तुत आवेदन पत्रों को पेड पर तथ्य सहित पूर्ति कर अपने संक्षिप्त हस्ताक्षर सहित सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे । सक्षम अधिकारी के पर्ची पर हस्ताक्षर कराने के बाद सहायक क्रमांक-1 के माध्यम से आवेदन निराकरण पर्ची आवेदक को सौंपी जायेगी । सहायक ग्रेड-3 श्री त्रिलोक शिवहरे मुख्यमंत्री, मंत्री , सांसद आदि जन प्रतिनिधि से प्राप्त पत्रों को उक्तानुसार इन्द्राज कर कार्रवाई करेंगे ।

      सहायक क्रमांक-1 श्री खुशेन्द्र उपाध्याय सहायक ग्रेड-3 मुख्य लिपिक से प्राप्त आवेदन पर्ची और आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित विभाग के नाम से संधारित की गई पंजी में दर्ज करेंगे और वितरण के लिए पत्र वाहक को सौंपेंगे । सहायक क्रमांक-2 श्री महेन्द्र राजौरिया सहायक ग्रेड-3 जिला कार्यालय से संबंधित विभाग को भेजे गये आवेदन के निराकरण का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर उसे पंजी में दर्ज करेंगे और कार्रवाई से सक्षम अधिकारी को अवगत करायेंगे । सहायक क्रमांक-3 श्री रामसेवक पाराशर सहायक ग्रेड-3 प्रारूप ' ' में पंजी संधारित करेंगे, जिसमें निराकृत आवेदनों का ब्यौरा दर्ज रहेगा । कम्प्यूटर संचालक श्री सुरेश सिंह सोलंकी, भृत्य श्री पूरन यादव और श्री चिरोंजी लाल भी इस व्यवस्था के तहत तैनात रहेंगे ।

     जिले के अन्य कार्यालय कलेक्टर कार्यालय से भेजे गये आवेदन पत्रों का निराकरण कराने का उत्तर दायित्व निर्धारित करते हुए कर्मचारियों व भृत्य को तैनात करेंगे और इसकी सूचना पत्र के माध्यम से जिला कार्यालय को देंगे । इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे नियमित इन पत्रों को गतिशील बनाये रखें और जिला कार्यालय से सतत संपर्क में रह कर आवेदन प्राप्त करने और निराकृत आवेदनों को विलोपित कराने तक की कार्रवाई करायें । सभी विभाग प्रारूप ' ' पर पंजी संधारित कर आवेदन का नियमानुसार निराकरण करेंगे।

भूमि विवाद के आवेदन जिला कार्यालय की भू- अभिलेख शाखा को प्रेषित किये जायेंगे । इन आवेदन पत्रों को संबंधित अनुविभागीय अधिकारी अथवा तहसीलदार को भेजा जायेगा । जो म.प्र.भू- राजस्वसंहिता के अधीन आवेदन पत्रों का प्रारूप ' ' में इन्द्राज करनिराकरण की कार्रवाई करेंगे । ग्रामीण विकास के आवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को प्रेषित किये जायेंगे, जो संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद के माध्यम से निराकरण करायेंगें ।

      जन शिकायतों के निराकरण हेतु लागू इस नवाचार के लिए 30 नवम्बर तक सभी व्यवस्थायें पूर्ण किये जाने के निर्देश दिए गये हैं । यह व्यवस्था 1 दिसम्बर 07 से प्रभावशील हो जायेगी । इस प्रक्रिया के माध्यम से आवेदक के आवेदन का त्वरित और स्थाई निराकरण सम्भव हो सकेगा और आवेदन करने के लिए लगातार कार्यालय में चक्कर लगाने के अपव्यय से बच सकेगा ।

 

मंगलवार, 27 नवंबर 2007

सफलता का मूल मंत्र है - समय पर नियंत्रण

सफलता का मूल मंत्र है - समय पर नियंत्रण

नरेन्‍द्र सिंह तोमर 'आनन्‍द'

 

आपने एक पुराना हिन्‍दी गीत सुना होगा 'समय तू धीरे धीरे चल, सारी दुनिया छोड़ के पीछे आगे जाऊँ निकल' यह पंक्तियां महज एक हिन्‍दी फिल्‍म का मनोरंजन व चित्‍त को सुख देने वाला गाना ही नहीं बल्कि समय प्रबंधन जिसे अंग्रेजी में टाइम मैनेजमेण्‍ट कहते हैं पर एक सर्वोत्‍तम सारोक्ति है । हिन्‍दी फिल्‍म संगीत में प्रेरणास्‍पद गीतों की भरमार है, अच्‍छे गीत चुनिये उन्‍हें सुनिये और अवसाद व निराशावाद से तुरन्‍त बाहर आ जाइये । वाकई करिश्‍मा होता है । मैं वर्ष 1979 से स्‍वयं ऐसा करता रहा हूँ , मुझे न केवल चित्‍त शान्ति प्राप्‍त हो जाती है, बल्कि एक नई जीवटता के साथ पुन: एक नई सक्रिय व सशक्‍त शुरूआत की शक्ति प्राप्‍त होती है ।

मैंने ज्‍योतिष तंत्र मंत्र व यंत्रों पर काफी काम किया है अत: ध्‍वनि व उसके विलक्षण गुणों व उपयोग से भली भांति सुपरिचित हूँ, यह संयोग ही है कि मैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी का छात्र भी रहा हूँ और स्‍नातकोत्‍तर में भौतिक शास्‍त्र मेरा विषय रहा वहीं इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग मेरे विषय रहे अत: ध्‍वनि विज्ञान को काफी नजदीक से जानने का सुअवसर मुझे मिला ।

मंत्रों में ध्‍वनि के विशिष्‍ट गुणों का उपयोग कर करिश्‍में किये जाते हैं, शब्‍दों, अक्षरों व वाक्‍यों के समुचित समायोजन और सप्रवाहन को ही मंत्रमय किया जाता है, चाहे उसके लिये भाषा कोई भी प्रयोग क्‍यों न की जाये । उचित अक्षर, शब्‍द या वाक्‍य चयन के उपरान्‍त उसकी आवृत्ति, तारत्‍व एवं आयाम तय कर लिये जाते हैं । इसके बाद गुंजन और कम्‍पन का उचित समायोजन किसी भी वाक्‍य या शब्‍द को मंत्र बना देता है और फिर वह काम करने लगता है, अपना असर करने लगता है । हालांकि इस पर पूरा एक ग्रंथ लिखा जा सकता है किन्‍तु इस आलेख की विषय वस्‍तु न होने से इस पर अधिक उल्‍लेख उचित न होगा ।

आजकल के नौजवानों और किशोरों के समक्ष समय प्रबंधन सबसे बड़ी समस्‍या और चुनौती है । समय नियंत्रण एवं समय प्रबंधन की अकुशलता के कारण अनेक बार उनको उनके परिश्रम के अनुरूप परिणाम प्राप्‍त नहीं होते और काफी मेहनत के बाद भी उनके श्रम का यथोचित मूल्‍य न प्राप्‍त होने से वे या तो पलायनवादी हो उठते हैं या फिर निराशावादी । अच्‍छे भारत के निर्माण के लिये यह लक्षण ठीक नहीं हैं । किशोरों और युवाओं का दुर्भाग्‍य है कि उन्‍हें वर्तमान में लगभग सभी विषयों पर और सभी प्रकार की शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्‍ध है लेकिन मनौवैज्ञानिक, दार्शनिक सिद्धांतों व व्‍यावहारिक जीवन विज्ञान की शिक्षा आज तक अनुपलब्‍ध है । अत: कई बार देखने में आता है कि अनेक प्रतिभाशाली, मेधावी और सर्वोच्‍च सफलता प्राप्‍त अनेक किशोर व नौजवान अवसाद और नैराश्‍य के शिकार हो जाते हैं । जिसे अंग्रेजी भाषा में फ्रस्‍ट्रेशन कहते हैं । कई बार यह परिणिति काफी दुखद भी होती है ।

किशोरों और नौजवानों का असमय मृत्‍यु का आहवान यानि आत्‍महत्‍या की ओर प्रवृत्‍त होना, नशे पत्‍ते की लत पड़ना, या फिर मनोवैज्ञानिक बीमारीयों से ग्रसित होकर अपराध की ओर उन्‍मुख हो जाना, या उनकी रचनात्‍मक शक्तियों का विध्‍वंसकारी हो उठना आदि कतिपय ऐसी बातें हैं जिनमें दरअसल विकृत्‍त मनोवृत्तियों के उदगम और विकास के पीछे वे किशोर और युवा कतई दोषी नहीं होते बल्कि हमारा सामाजिक व राष्‍ट्रीय परिवेश ही इसका प्रमुख कारण होता है । ओर हम अपने पीडि़त किशोरो और नौजवानों को उस हद तक पतन के गर्त में जाने का इंतजार करते हैं जब उसे मानसिक आरोग्‍यशाला और जेल (तथाकथित सुधारगृह) या अस्‍पताल में भर्ती कराने लायक नहीं बना लेते ।

दरअसल सच यह है कि ज्ञात रोग के उत्‍पन्‍न होने से पूर्व ही उसका निवारण संभव था, लेकिन हमारी मूर्खता व अज्ञानतावश कभी कभी अविवेकवश हम उसे नजर अंदाज करते चले जाते हैं और अंतत: अपने कीमती किशोरों और नौजवानों को पतन के अंतिम व लाइलाज गर्त तक पहुँचा कर उसे तथाकथत विभिन्‍न सुधारगृहों व चिकित्सालयों की शरण में छोड़ कर संतुष्‍ट हो लेते हैं ।

मैं एक उदाहरण देता हूँ- फिल्‍म अभिनेता संजयदत्‍त का उदाहरण देखिये और एक मुकम्‍मल शेर भी याद कीजिये लम्‍हों ने की खता और सदियों ने सजा पाई है संजयदत्‍त ने तब क्‍या किया यह अदालत का विषय है लेकिन लोग जानते हैं कि बाद में वह सुधर गया, केवल सुधर ही नहीं गया बल्कि नेकनीयत और आदर्श इंसान बन गया, फिर भी उसे सजा हो गयी । अब सवाल यह है कि भूले चूके अगर किसी से गलती या अपराध हो जाये और फिर वह पश्‍चाताप कर सुधरने के पथ पर चल कर आदर्श बनने का प्रयास करे तो हमें उसे हतोत्‍साहित करना चाहिये या प्रोत्‍साहित । संजयदत्‍त के उदाहरण के बाद भारत में अब कितने लोग सुधरना चाहेंगें और दोबारा अपराध या गलती न करने की सौगंध खायेंगें । जब सजा मिलनी ही है और सुधरने के सुफल प्राप्‍त नहीं होने हैं तो कोई क्‍यों एक बार अपराध का आरोप लगने के बाद अपराध की पुनरावृत्ति से दूर भागेगा । केवल न्‍यायिक संतुष्टि के लिये ऐसे फैसले एक बहुत बड़े भारतीय किशोर व नौजवानों के समूह के लिये दुखद उदाहरण बन कर प्रस्‍तुत हुये हैं, अब यदि किसी पर गलत आरोप भी एक बार लगा तो वह सुधरने का प्रयास तो कतई नहीं करेगा बल्कि अपराध की दललदली दुनिया में डूब ही जायेगा । इस घटनाक्रम में साथ ही संदेश यह भी गया कि संजयदत्‍त तो बड़ा आदमी था और पैसा भी उसके पास था, सो कैसे न कैसे वह सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया और जैसे तैसे बाहर निकल आया, लेकिन भारत के औसत परिवार और प्रति व्‍यक्ति औसत आय का आंकड़ा जरा सामने रखकर सोचिये कि कितने लोग हैं जो हाईकोर्ट तक भी पहुँच पाते हैं । सरकार भले ही सस्‍ते सुगम और सहज सुलभ न्‍याय की बात करती रहे हकीकत यही है कि आम आदमी की तो जिला न्‍यायालयों में ही मुकदमे लड़ते लड़ते घर मड़ैया सब बिक जाते हैं, आशियाने की बात छोडि़ये बर्तन भांड़े भी हिल्‍ले लग जाते हैं । हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भारत के आम आदमी के लिये स्‍वप्‍न मात्र ही हैं । वहॉं तक पहुंचना टेढ़ी खीर है, सच तो यही है । अब जिला अदालते गलत फैसले कर दें तो भी भारत का आम आदमी झेलता ही है, मैंने कई ऐसे मामले देखे कि जिस अपराध में लोग जेल में बन्‍द किये गये उसमें सजा बमुश्‍िकल छ महीने या एक साल की अधिकतम थी किन्‍तु वे दो साल या तीन साल तक या अधिक समय तक जेलों में सड़ रहे थे । मगर लाचार थे ।

न्‍यायायिक सुधारों की बात पर भी पूरा एक ग्रंथ ही तैयार हो जायेगा, लेकिन फिर वही विषय से भटकने की बात हो जायेगी ।

आज के किशोरो और नौजवानों को समय प्रबन्‍ध या समय पर नियंत्रण स्‍थापित करना जहॉं उनकी स्‍वयं की सफलता के लिये आवश्‍यक है, वहीं राष्‍ट्र के सर्वांगीण व सर्वआयामी विकास के लिये भी नितान्‍त जरूरी है ।

 

क्रमश: जारी अगले अंक में ........        

 

शनिवार, 24 नवंबर 2007

लाइनें बी.एस.एन.एल. कीं फोन सेठजी के, एक्‍सचेन्‍ज किसी का वसूली किसी और की

लाइनें बी.एस.एन.एल. कीं फोन सेठजी के, एक्‍सचेन्‍ज किसी का वसूली किसी और की

किस्‍सा ए बी.एस.एन.एल.भ्रष्‍टाचार बनाम अंधेरगर्दी विद गुण्‍डागर्दी

किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज भाग- 4

 

मुरैना 24 नवम्‍बर 2007 । जैसा कि हम पिछले अंकों में बता चुके हैं कि बी. एस. एन. एल. के पालनहार और रखवालों ने ही उसे भ्रष्‍टाचार संचार निगम लिमिटेड में तब्‍दील कर उसे व उसके उपभोक्‍ताओं को प्राइवेट कंपनियों को थाली में परोसकर सौंप दिया । मुरैना शहर में एक प्राइवेट कम्‍पनी पर बी. एस. एन. एल. के भ्रष्‍टाचारी इस कदर महरबां हुये कि मुरैना शहर में इस प्राइवेट कंपनी को लगभग 67 किलोमीटर लम्‍बी बी. एस. एन. एल. की अंडरग्राउण्‍ड केबिलें उपहार में या यूं कहिये कि दहेज में दे डाली उल्‍लेखनीय है कि मुरैना शहर में बी. एस. एन. एल. के अलावा एक अन्‍य प्राइवेट कम्‍पनी द्वारा भी वर्ष 2003 से लेंड लाइन टेलीफोनिक एवं इंटरनेट सेवाऐं दी जा रही हैं, मजे की बात ये है कि इस प्राइवेट कंपनी का स्‍वयं का कोई कार्यालय और अधोसंरचना मुरैना शहर में नहीं हैं । एक सेठजी इसके फ्रेंचाइजी बनकर न केवल शहर को चूना लगा रहे हैं बल्कि बी. एस. एन. एल. को भी उनने लाखों करोड़ों से नाप दिया है ।

        उल्‍लेखनीय है कि मुरैना शहर में भूमिगत टेलीफोन केबिलों का बिछाव वर्षों पहले बी. एस. एन. एल. द्वारा किया गया था, और प्राइवेट कंपनी के तथाकथित फ्रेंचाइजी के पास न तो इतनी अधिक अधोसंरचना उपलब्‍ध थी और न इतनी अनुमतियां कि सारी मुरैना शहर में अपनी ओवरहैड और अंडरग्राउण्‍ड लाइनें बिछा सकें । बी. एस. एन. एल. के भ्रष्‍ट नुमाइंदों की महरबानी से प्राइवेट फ्रेंचाइजी यानि सेठजी की प्रोब्‍लम सोल्‍व हो गयी और बी. एस. एन. एल. ने अपनी लगभग 67 किलोमीटर लम्‍बी केबिलें प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी सेठजी को सुपुर्द व समर्पित कर दीं । ग्‍यातव्‍य है कि इसकी कोई लिखत-पढ़त बी. एस. एन. एल. में नहीं है, और स्थिती यह है कि लाइनें बी. एस. एन. एल. की हैं और उनमें टैग एवं सर्किट प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी के हैं । ग्‍वालियर टाइम्‍स द्वारा इस तथ्‍य की तहकीकात की गयी जिसमें हर परीक्षित जगह पर बी. एस. एन. एल. की लाइनों में ही प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी की पैरेलल केबिलें और पैरेलल टेग एवं सर्किट मिले ।

         मजे की बात ये है कि जब भी प्राइवेट कंपनी का कोई टैग या सर्किट फेलुअर या डिसेबल्‍ड या डैमेज होता है, तो प्राइवेट कम्‍पनी वाले अपनी लाइन ट्रेसिंग में बी. एस. एन. एल.  की केबिलें खोद और काट डालते हैं । परिणाम यह होता है कि बी. एस. एन. एल.  के लाइनमैन शहर में यही खोजते रहते हैं कि लाईन कहां कटी ।

     बी. एस. एन. एल. के टेलीफोन और इण्‍टरनेट कनेक्‍शन इस कदर आये दिन ठप्‍प ओर नेटवर्क ध्‍वस्‍त ही बने रहते हैं ।

इसके अलावा और भी चौंकाने वाली और हैरतगंज बात ये है कि बी. एस. एन. एल. के फोनों में कभी कभी प्रायवेट कम्‍पनी के फ्रेंचाइजी सेठजी की लाइन भी मिश्रित हो जाती है और लोगों का नम्‍बर कहीं लगाते लगाते कहीं और लग जाता है या कभी कभी फोन अज्ञात जगह से अपने आप आने लगते हैं ।

 

   क्रमश: जारी अगले अंक में .........

 

मंगलवार, 20 नवंबर 2007

कांग्रेस: कांटों भरी राह पर एक और 'मि. क्लीन'

कांग्रेस: कांटों भरी राह पर एक और 'मि. क्लीन'

तनवीर जांफरी

अम्बाला शहर। हरियाणा फोन : 0171-2535628 मो: 098962-19228

       भारतवर्ष की स्वतन्त्रता से लेकर अब तक कांग्रेस को संरक्षण देने तथा उसका पोषण करने वाले देश के सबसे बड़े स्वतन्त्रता सेनानी परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में राहुल गांधी का नाम इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी के 37 वर्षीय इस होनहार एवं युवा राजनीतिज्ञ पुत्र पर भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के राजनैतिक विशेषकों की नंजरें टिकी हुई हैं। स्वतन्त्रता संग्राम में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने वाले पंडित मोती लाल नेहरु, उसके पश्चात भारत की स्वतन्त्रता के बाद देश के सबसे पहले प्रधानमंत्री बने पंडित जवाहर लाल नेहरु, तत्पश्चात पंडित नेहरु की एकमात्र पुत्री इन्दिरा प्रियदर्शनी गांधी जोकि अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी प्रधानमंत्री की हैसियत से देश की सेवा कर रहीं थीं तथा उसके पश्चात मिस्टर क्लीन की अपनी छवि बनाने वाले राजीव गांधी तथा इसके बाद अब इसी नेहरु-गांधी परिवार के राहुल गांधी को इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में देखा जा रहा है।

             इसमें कोई शक नहीं कि भारत की केन्द्रीय सत्ता पर नेहरु-गांधी परिवार का स्वतन्त्रता के समय से लेकर आज तक अधिकांशतय: जो नियंत्रण था तथा है वैसा नियंत्रण देश के किसी भी अन्य राजनैतिक घराने का नहीं रहा। जिन लोगों ने नेहरु-गांधी परिवार के विषय में अध्ययन किया है तथा इस परिवार के निकट रहने का जिन्हें अवसर प्राप्त हुआ है वे इस परिवार के द्वारा दी गई ंकुर्बानियों से भली भांति परिचित हैं। पंडित मोती लाल नेहरु व जवाहर लाल नेहरु ने देश की आंजादी के लिए अनेकों बार जेल यात्राएं कीं और अंग्रेंजों की यातनाएं सहीं। स्वतन्त्रता के बाद पंडित नेहरु ने भारत के प्रथम एवं सफल प्रधानमंत्री के रूप में लगभग 16 वर्षों तक देश की सेवा की। अपने शानदार शासनकाल के दौरान पंडित नेहरु ने देश को आत्मनिर्भर बनाने तथा इसे विकास की राह पर ले जाने का वह अद्भुत कार्य किया जिसके लिए भारतवासी हमेशा पंडित नेहरु के आभारी रहेंगे। उनके पश्चात लाल बहादुर शास्त्री ने अपना शानदार लघुकालीन शासन चलाया। इसके बाद पुन: पंडित नेहरु की एकमात्र पुत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की सत्ता संभाली। अपने शासनकाल में भारत के नाम को अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचाने वाली इस निडर एवं साहसी महिला ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के पक्ष में अपनी ंकुर्बानी तक दे डाली। 1984 में हुई इन्दिरा जी की हत्या के बाद हुए आम चुनावों में राजीव गांधी पूर्ण बहुमत के साथ विजयी हुए तथा भारत के प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित हुए। राजीव गांधी ने आम जनता तथा मीडिया के समक्ष अपनी ऐसी छवि स्थापित की थी कि उन्हें मिस्टर क्लीन के नाम से सम्बोधित किया जाने लगा था। आंखिरकार नेहरु गांधी परिवार का मिस्टर क्लीन रूपी यह चश्म-ए-चिरांग भी श्रीलंका में सक्रिय आतंकवादी संगठन लिट्टे के आत्मघाती सदस्यों द्वारा 1991 में शहीद कर दिया गया।

              राजीव गांधी की हत्या के बाद नेहरु गांधी परिवार को बहुत गहरा झटका लगा। एक बार तो ऐसा महसूस होने लगा था कि शायद भारतीय राजनीति में वर्चस्व बनाए रखने के इस परिवार के दिन अब लद चुके। यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रही। ंखासतौर से उस समय तक जब तक कि स्वर्गीय राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने सक्रिय राजनीति में भाग लेने की अपनी मंशा कांग्रेसजनों को ंजाहिर नहीं कर दी। परन्तु वास्तविकता यह है कि सोनिया गांधी जब तक कांग्रेस की पतवार संभालतीं उस समय तक कांफी देर हो चुकी थी। कभी पूरे देश व पूरे देशवासियों के दिलों पर राज करने वाली यह कांग्रेस सोनिया गांधी के सक्रिय होते-होते इतनी पीछे खिसक गई थी कि मौंकापरस्त एवं सत्ता से चिपके रहने वाले अनेकों तथाकथित पलायनकारी कांग्रेसी नेताओं को ऐसा महसूस होने लगा था कि सम्भवत: अब पुन: सत्ता में आना कांग्रेस के भाग्य में नहीं है। उधर विपक्षी दलों द्वारा भी कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए अनेकों ऐसे हथकंडे अपनाए  जाने लगे जिन्हें न सिंर्फ शर्मनाक कहा जाने चाहिए बल्कि वे अनैतिक भी थे। उदाहरण के तौर पर राजीव गांधी की बांकायदा ब्याहता पत्नी को यह कहकर नीचा दिखाने का प्रयास किया गया कि वे विदेशी महिला हैं तथा उनपर विश्वास नहीं किया जा सकता। यहां तक कि 2004 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस संसदीय दल द्वारा सोनिया गांधी को अपना नेता चुनने व प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें निर्वाचित किए जाने के बावजूद विपक्षी दलों विशेषकर भारतीय जनता पार्टी के कुछ तथाकथित राष्ट्रभक्त नेताओं द्वारा सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री चुने जाने के प्रयासों का अत्यन्त निचले व घटिया स्तर तक विरोध किया गया। अपनी अथाह दूरदर्शिता एवं अपूर्व बलिदान का परिचय देते हुए सोनिया गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री पद को संभालने से इन्कार कर दिया। ऐसा कर उन्होंने अपनी गरिमा को और अधिक चार चांद लगा दिया तथा स्वयं प्रधानमंत्री बनने के बजाए बेदांग छवि के महान अर्थशास्त्री डा. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित कर दिया।

              भारत में गत् दो दशकों से गठबंधन सरकार का दौर चल रहा है। सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पार्टी को उस हद तक तो अवश्य पहुंचा दिया है जहां आज कांग्रेस देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल के रूप में भारतीय संसद में भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करते देखी जा सकती है। परन्तु पूर्ण बहुमत की सरकार बना पाना ंफिलहाल कांग्रेस के लिए इतना आसान एवं उतना ंकरीब नंजर नहीं आता। परन्तु यह भी सच है कि कांग्रेस अपने वर्तमान समर्पित कांग्रेसजनों की विशाल टीम के साथ प्रत्येक उस रणनीति पर अमल करने में जुटी है जिसके द्वारा कांग्रेस को पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्रीय सत्ता में वापस लाया जा सके। राजीव एवं सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी की राजनीति में सक्रियता, 2004 के चुनावों में राहुल का अपने पिता की सीट अमेठी से लोकसभा हेतु चुनाव लड़ना तथा निर्वाचित होना, अभी कुछ समय पूर्व ही राहुल को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महसचिव बनाया जाना तथा देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में उन्हें अग्रणी किरदार अदा करने हेतु पार्टी हाईकमान द्वारा तैनात किया जाना यह समझ पाने के लिए कांफी है कि नेहरु गांधी परिवार का एक और 'मिस्टर क्लीन' कांग्रेस को पटरी पर लाने के लिए अपने आपको समर्पित करने हेतु तैयार है।

              इसमें कोई शक नहीं कि देश के वर्तमान राजनैतिक हालात में राहुल गांधी को कांटों भरी राह से होकर गुंजरना पड़ेगा। देश में चारों ओर क्षेत्रीय राजनीति का बोलबाला होता जा रहा है। आज केंद्रीय गठबंधन में कांग्रेस के सहयोगी वामपंथी दल आने वाले चुनावों में उनके समक्ष खड़े होंगे। उत्तर प्रदेश राज्य जहां कि राहुल गांधी अपने राजनैतिक कौशल की परीक्षा देने जा रहे हैं वहां ंजबरदस्त साम्प्रदायिक एवं जातिगत ध्रुवीकरण हो चुका है। कांग्रेस के परम्परागत वोट तीन बड़े भागों में विभाजित हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर साम्प्रदायिकता का वह ंखतरनाक खेल खेला जा रहा है जो इस देश में पहले कभी नहीं खेला गया। और यह सब कुछ केवल सत्ता की ंखातिर किया जा रहा है।

              ऐसे में कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश को एक साथ लेकर चलने की दुहाई देने वाली, देश को एकता, अखंडता तथा सर्वधर्म सम्भाव जैसा गांधी दर्शन देने वाली कांग्रेस को राहुल गांधी क्या दे सकेंगे क्या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में ही सुरक्षित है। परन्तु इतना ंजरूर है कि कांग्रेस को राजीव गांधी की ही तरह 'मिस्टर क्लीन' जैसी एक और छवि प्राप्त हो चुकी है। ंजरूरत इस बात की है कि कांग्रेसजन चमत्कारी ढंग से सत्ता के अपनी झोली में आने की प्रतीक्षा करने के बजाए कार्यकर्ता स्तर पर संगठन को मंजबूत करें तथा उन दूसरे संगठनों से सबक़ लें जिनका अस्तित्व तो नया ंजरूर है परन्तु अपनी संगठनात्मक क्षमता की बदौलत वे आज कांग्रेस को पीछे छोड़कर अग्रिम पंक्ति में आ खड़े हुए हैं।

              गत् दिनों नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उनके या राहुल के पास कोई जादुई छड़ी नहीं है। यह वास्तविकता भी है कि चाहे वह सोनिया गांधी हों अथवा राहुल गांधी। यह नेता अपनी लोकप्रियता, ग्लैमर तथा आकर्षण के बल पर अपनी जनसभाओं में लाखों लोगों को अपने नाम पर आकर्षित तो ंजरूरत कर सकते हैं तथा करते भी हैं परन्तु मतदान के दिन मतदाताओं को घर से बाहर निकाल कर उन्हें पोलिंग स्टेशन तक पहुंचाने का काम तो आंखिरकार कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही करना पड़ेगा। नुक्कड़, गली कूचों, पंचायत तथा चौपाल स्तर पर विपक्षी दुष्प्रचारों का जवाब तो आंखिरकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही देना होगा। अब यह कांग्रेस संगठन के स्थानीय मुखियाओं पर निर्भर है कि वे कार्यकर्ताओं की ऐसी जुझारु, कर्मठ, ईमानदार एवं समर्पित टीम का गठन करें जो राहुल गांधी रूपी इस दूसरे 'मिस्टर क्लीन' की छवि का समुचित लाभ उठा सकें।      

 

सोमवार, 19 नवंबर 2007

म.प्र. शासन का सूचना प्रसारण तंत्र ठप्‍प किया बी.एस.एन.एल. ने शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं

शुक्रवार को ठप्‍प हुआ बी.एस.एन.एल. नहीं हुआ आज मंगलवार तक चालू

अंचल की ब्राडबैण्‍ड इण्‍टरनेट सेवायें ध्‍वस्‍त, रूक गये सरकार के समाचार

म.प्र. शासन का सूचना प्रसारण तंत्र ठप्‍प किया बी.एस.एन.एल. ने

शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं 

किस्‍सा ए बी.एस.एन.एल.भ्रष्‍टाचार बनाम अंधेरगर्दी विद गुण्‍डागर्दी

किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज भाग- 3

 

मुरैना 20 नवम्‍बर 2007 । बौखलाये भ्रष्‍टाचार संचार निगम लिमिटेड उर्फ बी.एस.एन.एल. ने अंतत: मुरैना की ब्राडबैण्‍ड सेवाये तथा टेलीफोनिक व मोबाइल सेवायें शुक्रवार को यानि 16 नवम्‍बर को पूर्णत: ठप्‍प कर दीं । हालांकि समूचे मध्‍यप्रदेश में बी.एस.एन.एल. की यह नेटवर्क जानबूझ कर ध्‍वस्‍त की गयी, आपने हमारे इस रिपोर्ताज की पहली और दूसरी किश्‍तें अगर पढ़ीं होंगी तो आप जान व समझ सकते हैं कि ऐसा क्‍यों हुआ । वैसे हर महीने मध्‍यप्रदेश में यह आमतौर पर होता है (सबूत हमारे पास हैं) चम्‍बल यानि मुरैना में तो होता ही है ।

 

बी.एस.एन.एल. के खिलाफ पहली और दूसरी रिपोर्ताज किश्‍तों मात्र से बिलबिलाये बौखलाये भ्रष्‍टाचार संचार निगम अनलिमिटेड के कारिन्‍दे यह सब करेंगें यह हम जानते थे और इसकी तैयारी हमारे पास पहले से ही थी । सो अभी मजा और लेंगें ।

 

मजे की बात यह है कि बी.एस.एन.एल. का कहर मुरैना वालों पर जम कर टूटा है, पिछले शुक्रवार यानि 16 नवम्‍बर से मुरैना में इण्‍टरनेट और ब्राडबैण्‍ड सेवायें पूरी तरह से ध्‍वस्‍त और ठप्‍प हैं । लोग शिकायतें कर रहे हैं, पर कोई सुन नहीं रिया है । साला कान में तेल नहीं पूरा कोल्‍हू डाल कर बैठे हैं । मजा आ रिया है, देश में लोकतंत्र है, भ्रष्‍टाचारीयों के बाप का राज है ।

 

हालांकि हमारे इस रिपोर्ताज की पहली और दूसरी किश्‍तों में मात्र आने वाले तूफानिया रिपोर्ताज की महज भूमिका मात्र थी और ऐसा खासा कुछ नहीं था पर फिर भी हिल गये, हिल क्‍या कँप गये । अरे अभी तो आगाज है, बहुत कुछ है आगे अभी से हिलोगे तो कैसे बात बनेगी जानी । इब्‍तदाये इश्‍क है रोता है क्‍या आगे आगे देखिये होता है क्‍या । गब्‍बर की भाषा में कहें तो कालिया तेरा जो होगा सबको पता है, मगर धीरे धीरे घिस घिस कर होगा । मजे ले लेकर होगा । पाप का घड़ा धीरे धीरे फूटे, यह एक नया स्‍टायल है ।

 

वे समझे कि म.प्र. शासन का सूचना प्रसारण विभाग हमें मदद कर रिया है और इण्‍टरनेट सुविधा दे रिया है, सो भईया उड़ा दिया सरकार का इण्‍टरनेट, गोया चार दिन हो गये म.प्र. सरकार शिकायत पे शिकायत ठोके जा रही है कोई सुनवायी नहीं हो रही (सबूत हमारे पास हैं), ब्राडबैण्‍ड इण्‍टरनेट के वे कामर्शियल उपभोक्‍ता हैं, बिल भुगतान भी अप टू डेट है, फिर भी जूझ रहे हैं, जूझ क्‍या रहे हैं संघर्ष कर रहे हैं । जो संघर्ष हमने किया और जो कहानी हमारे साथ चली अब उनके साथ चल रही है, अरे वे तो सरकार हैं उनका ये हाल है तो सोचो हमारा क्‍या होता होगा, हम तो महज आम आदमी थे एक साधारण पब्लिक के आदमी - पूरी तरह । साल भर का उडवान्‍स दे बैठे थे, सो साल भर रोये और तीन महीने पहले ही डिसकनेक्‍ट होकर शिकायत शिकवा कर रो गा कर बैठ गये । अब तो सरकार से पंगा है । खैर अपने विनोद त्रिपाठी दैनिक भास्‍कर वाले की लैंग्‍वेज में कहें तो जय हो आपकी ।

 

अखबार वाले परेशान हैं, सरकार के यानि जिला प्रशासन और कमिश्‍नर चम्‍बल तक के समाचार मिलना बन्‍द हो गये, राज्‍य सरकार के एरिया रिलेटेड खबरें मिलना बन्‍द हो गयीं, सरकारी खबरें अखबारों में छप नहीं पा रहीं, ससुरा सरकार का ई मेल और इण्‍टरनेट ठपप पड़ा है ।

 

वैसे लगे हाथ उनके इस मुगालते को दूर कर दें, फिर भी हम रोज अपडेट कर रहे हैं, और किसी सरकारी सेवा या कनेक्‍शन या सुविधा का कभी भी हम उपयोग नहीं करते, भ्रष्‍टाचार निवारण के लिये हम कभी भ्रष्‍टाचार नहीं करते । हम सरकार की मदद करते हैं वह भी अपने खर्च पर अपने पैसे से, हम सरकारी यानि जनता के धन को छूना या इस्‍तेमाल हराम मानते हैं, सो भईया हमने तो उनका एक पल भी इस्‍तेमाल नहीं किया, फालतू उन्‍हें तंग कर रहे हो फालतू पंगा ले रहे हो, और बकौल शिव पुराण किसी निर्दोष पर दोषारोपण ब्रहमहत्‍या के समान है, सो काहे को ब्रहमहत्‍यारे बन रहे हो, अब ये पहेली है तुम्‍हारे लिये कि फिर कहॉं से हमें इण्‍टरनेट मिल रिया है । वैसे किश्‍तें पढ़ते जाओ खुद ही जान जाओगे कि 'हरि रक्‍खे तो मारे कौन, और हरि मारे तो रक्‍खे कौन'

आततायी तो हर युग में हर काल में पैदा होते है, सत्‍ता, धन, पद, सम्‍पत्ति, प्रभाव और बल के अभिमान से चूर हो उनके कृत्‍य अनवरत रहते हैं सतयुग से त्रेता, द्वापर और कलयुग तक सभी आतताईयों ने अपने अपने प्रदर्शन किये और अपने अस्तित्‍व व रूतबा बोध का अहसास आम जनमानस को हमेशा कराया, आप भी कर रहे हैं तो आप अपनी जगह सही हैं, अपने लिहाज से आप ठीक कर रहे हैं, हम अपने लिहाज से ठीक कर रहे हैं, आतताईयों का अंत अपने लिहाज से ठीक होता है । अपना सूत्र वाक्‍य है 'यदा यदा हि धर्मस्‍य ग्‍लानिर्भवति भारत.......''

 

                        

 

क्रमश: जारी अगले अंक में .........

 

शनिवार, 17 नवंबर 2007

आने वालों से ज्‍यादा खिसकने वाले बी.एस.एन.एल. की जोरदार उपलब्धि

आने वालों से ज्‍यादा खिसकने वाले बी.एस.एन.एल. की जोरदार उपलब्धि

बी.एस.एन.एल. भ्रष्‍टाचार में आकण्‍ठ डूबा, कमर्चारीयों ने छेड़ी जंग

मुरैना बी.एस.एन.एल. में करोड़ों का बन्‍दर बांट, अधिकारी कर्मचारी आमने सामने

भ्रष्‍टाचार उजागर हुआ तो खिसियाये बी.एस.एन.एल. ने ग्‍वालियर टाइम्‍स का इण्‍टरनेट बन्‍द किया

किस्‍सा ए बी.एस.एन.एल.भ्रष्‍टाचार बनाम अंधेरगर्दी विद गुण्‍डागर्दी

किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज भाग- 2

 

 

मुरैना 18 नवम्‍बर 2007 । बी.एस.एन.एल. मुरैना में ईजाद व विकसित भ्रष्‍टाचार के एक नये व अदभुत फार्मूले से आपका परिचय इस रिपोर्ताज के दूसरे भाग में आपसे करा रहे हैं । जरा बानगी देखिये और दांतो तले ऊंगली भले ही न दबायें लेकिन वाह तो बोल ही दीजिये ।

देश ने पिछले कुछ सालों में वाकई तरक्‍की की है कोई शक नहीं । दयानिधि मारन जब संचार मंत्री थे तो सरकार थोड़ा टाइट काम भी करती थी और गड़बड़ी की शिकायत शिकवा होने पर दिल्‍ली से एक पेचकस प्‍लायर्स उठता था और बिगड़ी मशीनरी के नट बोल्‍टों की खबर लेना शुरू कर देता था, मगर अब वो बात नहीं रही, वे नाम के भले ही राजा हों मगर हमारे एरिया के सबसे ज्‍यादा गये बीते नेता (नाम लिखना बेवजह होगी ) से भी ज्‍यादा गये बीते हैं, ऐसा इण्‍टरनेट पर कई बार कई भाई बन्‍धु पहले ही लिख चुके हैं सो हम क्‍यों रिपीट करें ।

हॉं तो भ्रष्‍टाचार संचार निगम अनलिमिटेड यानि बी.एस.एन.एल. इलाके की प्रायवेट कम्‍पनीयों पर कुछ इस कदर मेहरबां हुआ कि उसने सबस्‍क्राइबर्स यानि कस्‍टमर्स यानि माननीय सम्‍मानीय ग्राहक गण को 70 प्रतिशत की एक बड़ी संख्‍या में अन्‍य कम्‍पनीयों को थाली में परोस कर बाइज्‍जत उन्‍हें परोस कर सौंप दिया । यह डिटेल्‍स काफी मजेदार हैं आप दांतो तले वाकई ऊंगली दबा लेंगे आप पढ़ते जाइये हम बताते जाते हैं, अगली किश्‍तों में अपने आप खुलेंगे सारे राज ।  

यूं तो तरक्‍की दिखाने के कई तरीके होते हैं, मसलन ग्राफ चार्ट, बार चार्ट, रैखिक चार्ट वगैरह वगैरह , मगर बी.एस.एन.एल. का अपना एक अनोखा अंदाज है तरक्‍की प्रदर्शन का । ग्‍वालियर टाइम्‍स ने बारीकी से न केवल बी.एस.एन.एल. (मुरैना) की तरक्‍की चार्टों का न केवल अध्‍ययन व अवलोकन बल्कि विशद विश्‍लेषण भी किया । वे बताते हैं कि हर साल कितने नये ग्राहक यानि सबस्‍क्राइबर्स यानि कस्‍टमर्स जुड़े, मगर कभी ये नहीं बताते कि हर साल कितने कस्‍टमर्स यानि सबस्‍क्राइबर्स यानि ग्राहक बी.एस.एन.एल. से किनारा यानि पलायन कर गये, हमारी रिपोर्ट के मुताबिक यह संख्‍या आश्‍चर्यजनक और ज्‍यादा बड़ी है । गणित की भाषा में इसे कुछ यूं लिखेंगें

बी.एस.एन.एल. तरक्‍की गणना = Total Subscribers in existence + New Subscribers Added – Number of Subscribers left the B.S.N.L

 

(Where Researched result found certain & sure observation always – Subscribers added new are always < Subscribers left the B.S.N.L.)

 

Actual & Real Progress of B.S.N.L. (Morena) = 0/ Sannata

 

अब उक्‍त फार्मूले से प्राप्‍त परिणाम 0/ सन्‍नाटा (शून्‍य बटा सन्‍नाटा) ये हे हुजूर असल तरक्‍की बी.एस.एन.एल. की । पिछले दस साल के दौरान सर्वाधिक लोगों ने बी.एस. एन. एल. से पलायन यानि अंग्रेजी में क्विट किया जिसमें अत्‍यधिक व सर्वाच्‍च मान वर्ष 2003 से 2007 तक हैं ।

वर्तमान में मुरैना में टेलीफोन कम्‍यूनिकेशन उपभोक्‍ताओं का महज 10 या 20 फीसदी हिस्‍सा मात्र बी.एस.एन.एल. के पास शेष बचा है यह खासा अनुमान है । बाकी 80या 90 फीसदी ग्राहक में बहुत बड़ा हिस्‍सा उनका है जो बी.एस.एन.एल. से पिण्‍ड छुड़ा कर भागे ।

यह आंकड़े केवल मोबाइल क्रान्ति के कारण और मोबाइल संचार में अन्‍य कम्‍पनीयों के आने से पैदा हुये हों ऐसा नहीं है । बल्कि साधारण लैण्‍ड लाइन टेलीफोन से लेकर डायलअप इण्‍टरनेट एक्‍सेस और ब्राडबैण्‍ड इण्‍टरनेट तक यही हालात हैं । बल्कि यह अनुपात कहीं ज्‍यादा ही है ।

मोनोपॉली और अन्‍धाधुन्‍ध सरकारी इमदाद के जरिये भले ही कुछ क्षेत्रों में अभी अन्‍य कम्‍पनीयां बी.एस.एन.एल. के मानिन्‍द सेवायें उपलब्‍ध न करवा पा रहीं हों लेकिन यह तय है कि यदि बी.एस.एन.एल. के लिये खुली स्‍पर्धा जिस दिन भी छिड़ेगी या जब भी छिड़ेगी बी.एस.एन.एल. की बंटाढार तय है और म.प्र. राज्‍य परिवहन निगम का आज जो हश्र हुआ है, शायद उससे भी बुरा हश्र बी.एस.एन.एल. का होना तय है, और भविष्‍य के लिये यदि इसक सही व उपयुक्‍त नाम पुकारा जायेगा तो इसे '' बंटाढार संचार निगम'' कहना या पुकारना ज्‍यादा माकूल होगा ।

आप बी.एस.एन.एल. की मार्केटिंग व सर्विंसिंग की तो बात छोडि़ये वह फटेहालिया फटीचर सेवायें तो किसी से छिपी नहीं हैं लेकिन व्‍यावहारिक बर्ताव सम्‍मानीय ग्राहकों के साथ देखिये तो कहीं से नहीं लगता कि वे विक्रेता है और सेवा व्‍यवसाय कर रहे हैं और आप ग्राहक हैं, बल्कि अंग्रेजी राज का वो जमाना याद आ जायेगा जब अफसर अधिकारी रूतबा झाड़ते हुये जनता यानि पब्लिक को कीड़े मकोड़े के मानिन्‍द हेय और नीची नजर से देखता था और तब बदसलूकी व रूतबा बोध कराना आम रिवाज हुआ करता था ।

मुझे याद है कि वर्ष 2004 में इण्‍टरनेट पर जब बी.एस.एन.एल. की वेब साइट पर अनलिमिटेड इण्‍टरनेट का प्‍लान 399 जम कर न केवल प्रचारित किया जा रहा था बल्कि इस प्‍लान के लिये उपभोक्‍ता ढूढ़ने की खासी मशक्‍कत बी.एस.एन.एल. कर रहा था ।

    

 

क्रमश: जारी अगले अंक में .........

 

गुरुवार, 15 नवंबर 2007

मुरैना बी.एस.एन.एल. में करोड़ों का बन्‍दर बांट, अधिकारी कर्मचारी आमने सामने

बी.एस.एन.एल. भ्रष्‍टाचार में आकण्‍ठ डूबा, कमर्चारीयों ने छेड़ी जंग

मुरैना बी.एस.एन.एल. में करोड़ों का बन्‍दर बांट, अधिकारी कर्मचारी आमने सामने

भ्रष्‍टाचार उजागर हुआ तो खिसियाये बी.एस.एन.एल. ने ग्‍वालियर टाइम्‍स का इण्‍टरनेट बन्‍द किया

किस्‍सा ए बी.एस.एन.एल.भ्रष्‍टाचार बनाम अंधेरगर्दी विद गुण्‍डागर्दी

किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज भाग- 1

 

मुरैना 1 नवम्‍बर 2007 । बी.एस.एन.एल. यानि भ्रष्‍टाचार संचार निगम अनलिमिटेड, जैसा कि नाम से ही जाहिर है , और पूर्व में प्रकाशित एक समाचार में हमने वायदा किया था कि बी.एस.एन.एल. के मुरैना कार्यालय में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार, अंधेरगर्दी और गुण्‍डागर्दी का हम खुलासा करेंगें । और हम अपना वायदा पूरा कर रहें हैं इस किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज के जरिये ।

जैसा कि हमने आपसे कहा था कि बी.एस.एन.एल. के कतिपय अधिकारी कुछ म.प्र.शासन और कुछ दिल्‍ली भोपाल तक के स्‍तर के अधिकारीयों से व्‍यक्तिगत भ्रष्‍टाचाराना मित्रता या सम्‍बन्‍ध रखते हैं, और ग्‍वालियर टाइम्‍स डॉट कॉम पर साल भर कुछ विशेष समाचारों या आलेखों को प्रकाशित न किये जाने, या कुछ लोगों के फेवर में छापे जाने के लिये न केवल दवाब डालते हैं बल्कि डरा धमका कर और आतंकित कर भी दवाब बनाते हैं । यूं तो कोई उपभोक्‍ता अपना साल भर का एडवान्‍स बिल ब्राडबैण्‍ड इण्‍टरनेट के लिये जमा कर दे और अनलिमिटैड प्‍लान के तहत उपभोक्‍ता बने तो, कायदे से बी.एस.एन.एल. का फर्ज बनता है कि उस उपभोक्‍ता को साल भर नियमित व अबाध सेवायें मुहैया कराये । लेकिन अगर इसके बजाय ऐसा हो कि पहले तो कनेक्‍शन चालू करने के नाम पर रिश्‍वत मांगी जाये (हमारे पास लिखित सबूत हैं) और फिर इसकी शिकायत होने पर मुरैना से दिल्‍ली और भोपाल तक कोई कार्यवाही न की जावे, अंतत: उपभोक्‍ता द्वारा मजबूर होकर रिश्‍वत देनी पड़े तब कनेक्‍शन चालू किया जावे, और फिर कनेक्‍शन चालू होने के बाद भी उसे शिकायत करने के दण्‍ड के एवज में हर महीने में दो तीन बार पॉंच छह दिन के लिये यानि दस बारह दिन औसतन प्रतिमाह उसका कनेक्‍शन बन्‍द करा जावे तो इसे आप क्‍या कहेंगें अंधेरगर्दी, भ्रष्‍टाचार, अनसुनापन या गुण्‍डागर्दी या फिर कुछ और । इसके बावजूद साल पूरी होने से तीन महीने पहिले ही उसके कनेक्‍शन को काट दिया जाये तो इसे आप क्‍या कहेंगें , आप खुद सोचिये । (सारे सबूत हमारे पास हैं)

खैर इस किश्‍तबद्ध श्रंखला में स्‍वत: ही सारी बातें खुद ब खुद सामने आयेंगीं और खुलकर सामने आयेंगीं । आप पढ़ते जाइये हम बताते हैं कि देश में क्‍या हो रहा है । हम कितनी उन्‍नति कर रहे हैं ।

फिलवक्‍त इस रिपोर्ताज के लिये जो सामग्री और सबूत हमने एकत्रित किये हैं, उससे खिसियाये, बौखलाये मुरैना बी.एस.एन.एल. ने हमारा कनेक्‍शन हमारे एडवान्‍स भुगतान के बावजूद साल पूरी होने से तीन महीने पहिले ही डिसकनेक्‍ट कर दिया है । परिणामत: ग्‍वालियर टाइम्‍स पर हम कुछ समय अपडेशन नहीं कर पाये, वर्तमान में इस कनेक्‍शन की शिकायतें मुरैना से दिल्‍ली और भोपाल तक पेण्डिंग हैं भईया अभी तक तो कोई कार्यवाही हुयी नहीं, आगे देखते हैं क्‍या होता है, फिलहाल कनेक्‍शन बन्‍द है ।

बस एक बात जरूर मजेदार हुयी जैसा कि कहते हैं कि ''रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय, भलो बुरो सब आपनो जान परत सब कोय''

इस दरम्‍यान सारा मुरैना शहर हमारे साथ आ गया ओर लोगों ने अपने कनेक्‍शन हमें सुपुर्द और समर्पित कर दिये, चलो प्‍यारे कुछ दिन दूसरों के कनेक्‍शनों पर ही काम चलायेंगें । नो प्राब्‍लम । पहले अपना इकलौता कनेक्‍शन था अब यह संख्‍या हजारों में हो गयी है । जरूरत पड़ी तो वेबसाइट के रिसोर्स कोड जनता में बंटवा देंगें, चलो प्‍यारे ग्‍वालियर चम्‍बल के हर घर से होने दो अपडेशन । फिर क्‍या करोगे, यानि गब्‍बर सिंह की भाषा में कहें तो, कि बेटा हम तो गंगा नही ही लेंगें पर तेरा क्‍या होगा कालिया ।

 

क्रमश: जारी अगले अंक में .........