मंगलवार, 10 जून 2008

पंचायती राज संस्थाओं में प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास– Dainik Madhyarajya

पंचायती राज संस्थाओं में प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास– Dainik Madhyarajya

 

राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय अनेक मंचों पर पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन में कार्यशील कर्मचारियों को क्षमता विकास सहायता उपलब्ध कराने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। अभी हाल ही में ज़िला तथा मध्यवर्ती पंचायतों के अध्यक्षों का दिल्ली में एक तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें 26 राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के 8,000 से भी अधिक प्रतिनिधिमण्डलों ने भाग लिया था। इस अवसर पर दो रिपोर्टे जारी की गई थी। एक रिपोर्ट द स्टेट ऑफ पंचायत्स 2007-2008 थी जिसे प्रधनमंत्री ने जारी किया था। दूसरी रिपोर्ट पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों पर अधययन थी जिसे यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने जारी किया। इस अध्ययन में कहा गया है कि बेहतर प्रशिक्षण, निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के कार्य प्रदर्शन में एक प्रमुख तत्व के रूप में उभरकर सामने आया है। जिन महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया है उन्होंने अपने क्षेत्रों में बेहतर कार्य का प्रदर्शन किया है। अत: इस बात की भी सिफारिश की गई है कि न केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए इसे अनिवार्य किया जाए बल्कि इसे नियमित रूप से आयोजित भी किया जाना चाहिए। उसका बहुपक्षीय विस्तार हो जिसमें नियम-विनियम, बजट एवं वित्त और विकास योजनाओं का कार्यान्वयन भी हो। क्षमता विकास प्रशिक्षण के लिए मुख्य तर्क इस प्रकार हैं - मौजूदा सामाजिक असमानताओं में यह अनिवार्य है कि महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजातिओं को पिछड़ेपन से लड़ने के लिए सहायता दी जाए और आत्मविश्वास के साथ स्थानीय प्रशासन में भागीदारी के लिए उन्हें सक्षम बनाया जाए। प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास पहलों से वे न केवल अपने घरों से बाहर आयेंगी बल्कि इसके ज़रिए वे बेहतर भागीदारी के लिए सक्षम हो सकेंगी।

       हमें इस बात को भी अपने दिमाग में रखना है कि स्थानीय प्रशासन व्यवस्था में भाग लेने वाले बड़ी संख्या में हैं जो पहली बार इसमें भाग ले रहे हैं। अत: उनके कौशल अनुभव को बढ़ाने की बेहद ज़रूरत है, और उन्हें आवश्यक एवं उचित सूचना मुहैया कराई जाये तथा उन्हें ताज़ा जानकारी से लगातार अवगत कराया जाता रहे।

       73वें संविधान संशोधन की भावना के दायरे में ही स्थानीय प्रशासन व्यवस्था का स्थिरीकरण करते हुए स्थानीय नेतृत्व के सृजन के लिए क्षमता विकास प्रयासों की भी जरूरत है, जो असमानता तथा अन्याय में परिवर्तन लाये जोकि अभी देश में मौजूद है।

       साथ ही इसी समय अधिकतर सरकारी अधिकारियों के लिए शक्तियों का अधोहस्तांतरण एक नई अवधारणा है। विकेन्द्रीकरण तथा शक्तियों का अधोहस्तांतरण के कार्य करने के विभिन्न तरीकों की ज़रूरत है और उनके व्यवहार तथा दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने के लिए प्रशिक्षण की भी ज़रूरत है ताकि वे स्थानीय प्रशासन कार्य को प्रभावी बना सके। विकेन्द्रीकरण तथा शक्तियों का अधोहस्तांतरण को ग़रीबी उपशमन, सीमांत वर्गों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तथा बड़ी जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक माना गया है। विकेन्द्रीकरण के लिए गति बल, जोकि बहुपक्षीय तथा द्विपक्षीय संस्थाओं द्वारा आगे बढ़ाया गया है, को बहुत माना गया है। यदि आवश्यक तकनीक शर्तें पूरी कर दी गई हों तो भागीदारी तथा जवाबदेही अपने आप ही आ जाएगी। हालांकि विद्वान तथा कार्यकर्ता गवर्नेन्स के मुद्दे पर कार्य कर रहे हैं। साथ ही साथ महिलावादी लेखन तथा विचार ने विकेन्द्रीकरण के विश्वास को राज्य की संस्थाओं का केवल तकनीकी पुनर्गठन मानने को चुनौती दी है। संस्थाओं में लिंग विचारधारा के आसपास ही सारी कवायद केंद्रित रहती है जो इस बात को सिध्द करती है कि किसी भी संस्थागत् प्रबंधन के लिए प्रक्रियाओं तथा लिंग एजेंडा को प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। महिलाओं अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की उपस्थित की आशा अपने आप ही विकास के एजेंडा की तरफ ले जाएगी। इस बात को भी समझना जरूरी है कि यहां पर अन्य परिस्थितियों के साथ-साथ किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण परिवर्तन होना आवश्यक है। क्षमता विकास प्रक्रिया में यह भी अपेक्षित है कि सरकारी नौकरशाही में ऊपर से लेकर निचले स्तर तक एक उचित परिपेक्ष्य स्थापित किये जाने की ज़रूरत है।

अधययन - केरल

       केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान (केआईएलए), केरल स्थानीय स्वशासन विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। इसकी स्थापना 1990 में प्रशिक्षण सुविधा, अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण और स्थानीय प्रशासन के बारे में विचार-विमर्श के लिए की गई थी। इसके अलावा यह संस्थान विकेन्द्रीकरण के मुद्दे पर राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर की कार्यशालाओं और सेमीनारों का भी आयाोजन करता है। यह संस्थान आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के लिए क्षेत्रीय संसाधन केन्द्र है।

जीवन के सभी पक्षों, जैसे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा तकनीक आदि में हो रहे परिवर्तनों को अपनी मान्यता देते हुए केरल ने लोगों के विभिन्न वर्गों को व्यापक प्रशिक्षण देने के लिए योजना बनाई है।

केआईएलए के प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास प्रयासों को इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है कि पूरी केरल विकास योजना के प्रति तार्किक एवं लगातार सहायता को सुनिश्चित किया जा सके। केआईएलए राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के साथ करीबी स्तर पर मिलकर कार्य कर रहा है। विभिन्न कार्य वर्गों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से जो फीडबैक मिल रहा है उससे राज्य सरकार को नीतियों के निर्माण में सहायता मिल रही है। केआईएलए के सभी कर्मचारी केरल विकास योजना को पूरा करने में लग गये हैं। यह संपूर्ण व्यवस्था के विभिन्न वर्गों के साथ मिल कर कार्य कर रहा है तथा लक्षित विभिन्न वर्गों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है।

विकेन्द्रीकृत प्रशिक्षण

       स्थानीय शासन, तकनीकी सलाहकार समिति तथा तकनीकी समिति के सदस्यों को जगह-जगह चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। यह कार्य क्षेत्रीय, ज़िला तथा ब्लॉक स्तर पर किया जा रहा है। वर्ष 2003-04 में 1,36,080 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।

निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

       केआईएलए निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए स्थानीय प्रशासन पर एक 10 महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है ताकि ये प्रतिनिधि तुच्छ राजनीति से ऊपर उठ सकें और अपनेर् कत्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके। इसे दूरस्थ एवं संपर्क कार्यक्रम के रूप में डिज़ाइन किया गया है। इसमें परिसर से बाहर जाकर अध्ययन करना तथा अनुसंधान कार्य भी शामिल है। जो लोग यहां अपना प्रशिक्षण पूरा कर लेते हैं उन्हें विभिन्न स्तरों पर तकनीकी सलाहकार समितियों के सदस्यों के रूप में तथा वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया जाता है।

विकेन्द्रीकृत शासन पर पाठयक्रम

       केआईएलए प्रत्येक दो महीने में एक बार विकेन्द्रीकृत शासन पर एक राष्ट्रीय स्तर का पाठयक्रम चलाता है। यह पाठयक्रम केरल में स्थानीय निकायों की कार्यविधि के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान कराता है। विभिन्न राज्यों के नीति निर्माता, अधिकारी और निर्वाचित सदस्य इन कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते हैं। यह विकेन्द्रीकरण पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम भी चलाता है। जिसमें सार्क देशों जैसे पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बंगलादेश के निर्वाचित सदस्य तथा अधिकारी शामिल होते हैं।

पंचायत से पंचायत तक

       केरल में कम से कम 200 पंचायते हैं, जिन्होंने अपने यहां अभिनव कार्यक्रम चला रखे हैं। ऐसी पंचायतें जो विचारों, क्षमताओं, सेमीनारों, कार्यशालाओं और अवसर के क्षेत्र में पिछड़ी हुई है, उन्हें प्रेरणा देने तथा एक दूसरे से परिचित कराने के लिए, उनका अच्छा प्रदर्शन कर रही पंचायतों के साथ संपर्क बनाया जा रहा है।

कैंपस से बाहर प्रशिक्षण

       कैंपस के बाहर विभिन्न जगहों पर अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। जिसमें कार्यरत समूह प्रशिक्षण, तकनीकी सलाहकार समिति प्रशिक्षण, तकनीकी समिति प्रशिक्षण, ग्राम सभा प्रशिक्षण, नई व्यवस्था के लिए प्रशिक्षण और जनजातीय उप-योजना के लिए प्रशिक्षण इत्यादि शामिल है।

प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण

       ऊपर के कार्यक्रमों के लिए प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इनके अतिरिक्त नागरिक समिति के सदस्यों एवं अधिकारियों, राजनीतिक पार्टी के नेताओं तथा मीडियाकर्मियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम है।

       केआईएलए ने स्थानीय शासन में गंभीर सक्रिय भागीदारी के लिए अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ गठबंधन किया है। इन एजेंसियों में यूएनडीपी, यूएन हबीटेट, यूनेस्केप, एसडीसी, हुडको, मानव व्यवस्थापन प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान, अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान शामिल हैं। साथ ही इसको अपने खर्चों को  पूरा करने के लिए आवश्यक पर्याप्त संसाधन एकत्रित करने में भी सक्षम बनाया गया है।

शिक्षा

       केरल एक अनूठा तथा समृध्द अनुभव भी पेश करता है, जहाँ से अनेक शिक्षाएं प्राप्त की जा सकती हैं। विशेषताएं -

1.      प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम बहुत अधिक प्रभावी होते हैं जब वे व्यापक कार्यढांचे के अंतर्गत होते हैं जोकि व्यवस्था के सभी तत्वों से निपटता है। केवल सरपंचों, वार्ड सरपंचों या ज़िला परिषद् सदस्यों को प्रशिक्षण देने का कोई लाभ नहीं होगा जब तक स्थानीय शासन व्यवस्था तथा संबंधित अधिकारियों से रूबरू न हुआ जाए।   

2.     केरल उन कुछ राज्यो में से एक है जो विभिन्न स्तरों पर प्रमाणित पाठयक्रम और पहलगामी पाठयक्रमों के ज़रिए स्थानीय शासन पर प्रशिक्षण के मुद्दे को हल कर रहा है।

3.     केआईएलए के प्रशिक्षण प्रयास इतने व्यापक हैं कि वे राज्य विकास तंत्र के अन्य अंगों से जुड़े हुए हैं। ये प्रशिक्षण प्रयास राज्य विकास योजना के साथ बेहतरीन ढंग से समन्वित हैं। अत: वे एक विस्तृत परिप्रेक्ष्य तथा उद्देश्य स्थापित कर रहे हैं। पंचायती राज संस्थाएं अपने संबंधित समुदायों के लिए एक दृष्टिकोण का विकास करने के लिए सक्षम है।

4. अंतत: केरल ने यह दिखा दिया है कि यहां सभी उद्देश्यों को पूरा करने के वास्ते प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास के लिए एक ऐसे संस्थागत कार्य ढांचे की ज़रूरत है जो मानव तथा वित्तीय दोनों ही संसाधनों से लैस हो।

....

.. उपनिदेशक (मीडिया एवं संचार) पत्र सूचना कार्यालय, दिल्ली

शनिवार, 7 जून 2008

शहरी विकास मंत्री ने ई-गजट जारी किया

शहरी विकास मंत्री ने ई-गजट जारी किया

शहरी विकास मंत्री श्री जयपाल रेड्डी ने आज यहां ई-गजट जारी किया । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ई-गजट के जारी होने से नागरिकों और विश्वसनीय उपयोगकर्ताओं का सशक्तीकरण होगा । देशभर के लोग अब एक नियत शुल्क अदा करके कोई भी गजट अधिसूचना तुरंत ई-गजट के माध्यम से देख सकते हैं । इसकी वेबसाइट   www.egazette.nic.in  पर देखी जा सकती है ।

       विदित हो कि इस समय विभाग में 1962 से अधिसूचनाओं का रिकार्ड रखा है । रिकार्ड रूम में लगभग 61,7000 गजट अधिसूचनाएं है । वर्ष 1962 के पूर्व की गजट अधिसूचनाएं राष्ट्रीय अभिलेखागार में उपलब्ध हैं ।

       सरकार को गजट अधिसूचना की बिक्री से हर साल लगभग पांच करोड़ रूपए की आय होती है । ई-गजट के जारी हो जाने से आय बढने क़ी संभावना है क्योंकि अब उपयोगकर्ताओं को प्रकाशन विभाग के बिक्री काउंटर पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी ।

 

शुक्रवार, 6 जून 2008

खतरे में पर्यावरण

खतरे में पर्यावरण

श्रीमती राजबाला अरोड़ा

एम.एससी(बॉटनी)

बी.जे.सी,

       प्रकृति के पाँच तत्व जल, अग्नि, वायु, आकाश एवं पृथ्वी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं जिनका आपस में गहरा सम्बंध है । इन पाँचों तत्वों में किसी एक का भी असंतुलन पर्यावरण के लिये अपूर्णनीय क्षतिकारक और विनाशकारी है । पर्यावरण दो शब्दों परि और आवरण से बना है जिसका अर्थ है चारों ओर का घेरा हमारे चारों ओर जो भी वस्तुएं, परिस्थितियां या शक्तियां विद्यमान हैं, वे मानवीय क्रियाकलापों को प्रभावित करती हैं और उसके लिये दायरा सुनिश्चित करती हैं । इसी दायरे को पर्यावरण कहते हैं ।

       पर्यावरण के अंग्रेजी शब्द इनवायरन्मेंट का उद्भव फ्रांसीसी भाषा के इनविरोनिर शब्द से हुआ है, जिसका अर्थ है घेरना । इनवायरन्मेंट का समानार्थक शब्द हैबिटैट है जो लैटिन भाषा के हैबिटायर शब्द से निकला है । हबिटैट शब्द पर्यावरण के सभी घटकों को स्थानीय रूप से लागू करता है इसका प्रभाव आवास स्थल तक सीमित है । जबकि इनवायरन्मेंट शब्द हैबिटैट की तुलना में अधिक व्यापक है ।

       देखा जाये तो पर्यावरण को दो प्रमुख घटकों में विभाजित किया जा सकता है । पहला जैविक अर्थात बायोटिक जिसमें समस्त प्रकार के जीवजन्तु व वनस्पतियां (एक कोशिकीय से लेकर जटिल कोशिकीय तक ) दूसरे प्रकार के घटक में भौतिक अर्थात अजैविक जिसमें थलमण्डल, जलमण्डल व वायुमण्डल सम्मिलित हैं । इन सभी घटकों में सृष्टि ने मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ  जीव के रूप में उत्पत्ति की है । अत: मानव सम्पूर्ण जीव जगत का केन्द्र बिन्दु है । पर्यावरण के सभी महत्वपूर्ण घटक मानव को परावृत्त करते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी पर्यावरण के प्रभावों को परिलक्षित करती है। वस्तुत: अनुवांशिकी एवं पर्यावरण ये दो महत्वपूर्ण कारक मानव जीवन को प्रभावित करते हैं । समस्त जीवों में सर्वश्रेष्ठ जीव होने के नाते मनुष्य ने प्रकृति की प्राकृतिक सम्पदाओं का सदियों से भरपूर दोहन किया है । लेकिन वर्तमान दौर में बढ़ती जनसंख्या, पश्चिमी उपभोक्तावाद एवं वैश्विक भूमण्डलीकरण के मकड़जाल में फँस कर मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सुख को खोता जा रहा है । वह नहीं जान पा रहा कि कंकरीट का शहर बसाने की चाहत के बदले में वह अपना भविष्य दाँव पर लगा बैठा है ।

       प्रकृति के समस्त संसाधन प्रदूषण की चपेट में है । हवा, जल और मिट्टी जो हमारे जीवन के आधार हैं जिनके बिना जीवन की कल्पना ही बेमानी है , आज अपना मौलिक स्वरूप एवं गुण खोते जा रहा है । पर्यावरण की छतरी अर्थात ओजोन परत जो हमें सौर मण्डल से आने वाली घातक किरणों से बचाती है उसमें छेद होना, वातावरण में बढ़ती कार्बन डाई-आक्सॉइड की मात्रा से उत्पन्न समस्या ग्लोबल वार्मिंग, दिनो दिन घातक बीमारियों का प्रादुर्भाव व स्वास्थ्य संकट ये सब मानव के समक्ष एक विकराल दानव का रूप ले चुके हैं  जो भस्मासुर की तरह समस्त मानव जाति को लीलने को आतुर हैं, जिससे सावधान होना बहुत जरूरी है ।

जैव मण्डल में मौजूद संसाधनों में जल सर्वाधिक मूल्यवान है क्योंकि यह केवल मानव ही नहीं अपितु सभी जीवों तथा वनस्पति के लिये उपयोगी है । प्रकृति में जल तीन रूपों में विद्यमान है ठोस, तरल एवं गैस । ठोस के रूप में बर्फ जल का शुध्द रूप है । इसके बाद वर्षा का जल, पर्वतीय झीलें, नदियां एवं कुएं शुध्दता क्रम में आते हैं । धरातल पर प्रवाहित तथा झीलों, तालाबों आदि के रूप में उपलब्ध स्वच्छ जल की मात्रा केवल 7 प्रतिशत है । लेकिन बढ़ती संख्या , कुकरमुत्ते से उगे बहुमंजिला इमारतों , खेती में रसायनों का उपयोग तथा रासायनिक फैक्ट्रियों से निकला पानी नदियों, तालाबों, झरनों को प्रदूषित कर रहा है, जो  मानव जाति सहित जीवजन्तुओं के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक साबित हो रहा है । जल को प्रदूषित करने वाले तत्व जल में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर को कम कर जल को पीने योग्य नहीं रहने देते।

वसुन्धरा को माता का दर्जा दिया गया है जो अपने गर्भ में मौजूद तमाम आवश्यक धातुओं, अधातुओं, खनिज लवणों के सहयोग से बीज का पोषण कर खाद्य पदार्थ के रूप में विकसित करती है जो समस्त जीव जन्तुओं में जीवन का संचार करते हैं । भूमि या मिट्टी भी जल की भाँति सर्वाधिक मूल्यवान संसाधन है,क्यों कि विश्व के 71 प्रतिशत खाद्य पदार्थ मिट्टी से ही उत्पन्न होते हैं यह संसाधन इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता कि सम्पूर्ण ग्लोब के मात्र 2 प्रतिशत भाग में ही कृषि योग्य भूमि है लेकिन बढ़ती जनसंख्या के पोषण के लिये खाद्यानों की बढ़ती मांग के कारण कृषि उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है । जिसके कारण विश्व में खाद्यान्न की समस्या पर काफी हद तक काबू किया जा सका है लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रयोग, नित नए रासायनिक उर्वरकों, रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण धरती की उर्वरता कम हो गई है। शहरों व महानगरों से निकला अपशिष्ट पदार्थ जैसे पॉलीथिन, कूड़ाकरकट, राख, औद्योगिक अपशिष्ट, दफ्ती, चमड़ा, शीशा, रबर आदि के कारण मिट्टी के प्रदूषण को तेजी से बढ़ावा दिया है ।

पृथ्वी के चारों ओर गैसों का घेरा है जिसे वायुमण्डल कहते हैं । यह वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है जिसमें लगभग 73 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन एवं .03 प्रतिशत कार्बन  डाई-ऑक्साइड है । ये सभी तत्व पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने में सहायक हैं । पृथ्वी पर मौजूद पेड़ पौधे वायुमण्डल में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित कर प्रकाश की उपस्थिति में एवं जड़ों के माध्यम से जल एवं आवश्यक खनिज लवण लेकर अपना भोजन तैयार करते हैं । बदले में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं यही ऑक्सीजन वायुमण्डल में मिलकर मानव जाति के लिये प्राणवायु का काम करती है। मनुष्य व जीव-जन्तु भी जब वातावरण से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तो कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं जो कि पेड़ पौधों के लिये भोजन बनाने में सहायक होती है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पर्यावरण में मौजूद सभी घटक सिम्बायोटिक तरीके से एक दूसरे से सम्बध्द है और इस प्रकार पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते  है लेकिन विकसित देशों की प्रभुता की लालसा ने अंधाधुंध परमाणु हथियारों का जखीरा खड़ा करने, रासायनिक हथियार बनाने की होड़ ने मनुष्य को अंधा बना दिया है। बढ़ती जनसंख्या के कारण मनुष्य ने वनों को काटकर कंकरीट की बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर ली । ऐसा कर उसने अपने भविष्य का नाश कर दिया । पेड़ों के कटने के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड का संतुलन बिगड़ने से ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा मिला है। वायुमण्डल में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण के तापमान को भी नियंत्रित करती है । पेड़ों के कटने के कारण वायुमण्डल में कार्बन डाई ऑक्साइड की निरंतर बढ़ती मात्रा  के कारण वातावरण के तापमान को दिनों-दिन बढ़ाती जा रही है जो अप्रत्यक्ष रूप से वर्षा, सर्दी, गर्मी के चक्र को भी प्रभावित कर रही है । निकट भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का जलस्तर इस हद तक बढ़ जायेगा कि समुद्र के किनारे बसे समूचे शहरों को लील जाए तो अतिशयोक्ति न होगी ।

       पर्यावरण के इस असंतुलन की जिम्मेदार हमारी समस्त मानव जाति है । यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो विनाश अवश्यंभावी है । इसीलिए वेद मनीषियों ने भी द्यूलोक से लेकर व्यक्ति तक शांति की प्रार्थना की है

 

ओं द्यौं :शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:पृथिवी शान्तिराप:

शान्तिरोषघय: शान्तिर्वनस्पतय: शान्ति र्विश्वे देवा:

शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वंशान्ति: शान्तिरेव

शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ (शुक्ल यजुर्वेद)

 

श्रीमती राजबाला अरोड़ा

एम.एससी(बॉटनी)

बी.जे.सी,

 

गुरुवार, 5 जून 2008

दूंगा दस लाख को हर साल रोजगार, बेटियों को बना दूंगा वरदान, म.प्र. को नंबर 1 का स्‍टेट और खेती को कर दूंगा मुनाफे का सौदा – आंधी वारिश के बीच गरजे बरसे सी.एम. शिवराज सिंह

दूंगा दस लाख को हर साल रोजगार, बेटियों को बना दूंगा वरदान, म.प्र. को नंबर 1 का स्‍टेट और खेती को कर दूंगा मुनाफे का सौदा आंधी वारिश के बीच गरजे बरसे सी.एम. शिवराज सिंह

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

  • मैं मुख्‍यमंत्री जैसा नहीं लगता, लगता ही नहीं कि मैं मुख्‍यमंत्री हूँ
  • वीरों की जन्‍मदाता, जन्‍मजात फौजीयों की प्रसूता, महान अमर शहीद रामप्रसाद विस्मिल की इस धरती इस जन्‍मभूमि को मेरा प्रणाम
  • प्रदेश की हर बेटी मेरी बेटी है, बनाऊंगा लखपति, करूंगा उसका ब्‍याह
  • मैं 11 रूपये का किलो गेंहूं खरीदूंगा, बेचूंगा 3 रू किलो में, नहीं मरने दूंगा किसी को भूखा
  • नहीं रहेंगे प्‍यासे खेत, जानवर और लोग
  • नहीं मरने दूंगा किसी को इलाज के बगैर, हर गरीब का बड़े से बड़ा मुफ्त इलाज कराऊंगा
  • हरेक को दूंगा काम, धन्‍धा और रोजगार, स्‍वरोजगार की नई योजना शीघ्र दूंगा
  • कांग्रेस ने केवल राज किया, और हमने की गरीब की सेवा
  • मैं सेवक, मैं पुजारी जनता का, बोलो मैं सी.एम. हूं कि तुम्‍हारा भईया  

पोरसा 4 जून 2008, आज यहॉं मुरैना जिला की पोरसा तहसील के मण्‍डी प्रांगण में म.प्र. के मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एक पंच सरपंच कार्यक्रम के दौरान विशाल जनसभा में तकरीबन पॉंच छह हजार लोगों के जनसमूह को सम्‍बोधित करते हुये अपनी राजनीतिक शैली के सारे दॉंव पेंच जम कर इस्‍तेमाल किये वहीं मनमोहक वायदों और घोषणाओं की झड़ी लगा दी । मुख्‍यमंत्री ने इस दरम्‍यान कई शिलान्‍यास भी किये और जनता से आगामी चुनावों पर जनता से सीधा प्रत्‍युत्‍तरीय संवाद भी किया ।

 

विलम्‍ब से पहुँचे मुख्‍यमंत्री

हालांकि मुख्‍यमंत्री के पोरसा आगमन से पूर्व शिवपुरी और कोलारस के कार्यक्रम तय थे और अंचल के प्रशासनिक क्षेत्र व पत्रकारों तथा जनता के बीच एक अनुमान की लहर थी कि मुख्‍यमंत्री डेढ़ या दो बजे तक पोरसा पहुँच जायेंगे, सो अधिकांश लोग सुबह साढ़े ग्‍यारह बजे से ही कार्यक्रम स्‍थल पर पहुँच गये थे । मुख्‍यमंत्री कार्यक्रम स्‍थल पर लगभग पौने चार बजे पहुँचे तब तक जनता का गर्मी, पसीने और भीड़ से बुरा हाल हो चुका था । हवायें बन्‍द थीं ऊपर से तेज धूप और चारों ओर से बन्‍द वातावरण के साथ हजारों लोगों के बदन की गर्मी ने वहॉं का माहौल तपती भट्टी जैसा कर दिया था । 

पत्रकारों का दौरा और कवरेज

स्‍थानीय पोरसा के पत्रकार वहॉं सुबह से ही विद्यमान थे जबकि हमारी टीम (मुरैना वाले सभी) लगभग डेढ़ बजे वहॉं पहुँचे ।

अब चूंकि वहॉं भीड़ भड़क्‍का भी ज्‍यादा था और दूसरे कार्यक्रम की व्‍यवस्‍थाओं में भारी किफायत बरती गयी थी, अत: कुछ अव्‍यवस्‍थायें वहॉं स्‍वत: ही व्‍याप्‍त हो गयीं ।

पत्रकारों के लिये कुल 10 कुर्सियां वहॉं डाली गयीं थीं वह भी तीखी धूप के ठीक सामने । मुरैना जिला जनसम्‍पर्क कार्यालय ने अपनी व्‍यवस्‍थाओं के चलते पत्रकारों के दो दल अलग अलग भेजे जिससे किसी को असुविधा न हो, वहीं विभागीय टीम पृथक से अलग टीम में पहुँचे ।

यह मेरा सौभाग्‍य था कि मैं सादा गाड़ी में (बिना ए.सी. की) में सवार हुआ और वरिष्‍ठतम व अनुभवी पत्रकारगण मेरे साथ मेरी टीम में थे । जिसमें बेचारे दो चार नये पत्रकारों को यदि छोड़ दें तो सभी इस पोरसा यात्रा का भरपूर आनन्‍द लेते हुये अपनी यात्रा कर रहे थे ।

रास्‍ते में हमारे सीनीयर पत्रकार शुक्‍ला जी और हम बतियाते रहे पोरसा कार्यक्रम के सन्‍दर्भ में और हमारी चर्चा के मुताबिक वहॉं जो भी हुआ वह वही हुआ जैसा कि हम बतियाते रहे थे, कुछ भी भिन्‍न नहीं था । हमारे नये पत्रकार बन्‍धुओं ने भी बड़ राज की बातें बताईं जो अमूमन सौ फीसदी सच ही निकलीं । बतियाते बतियाते हम दिमनी पार कर रहे थे, मैं चर्चा के साथ दनादन फोटो भी रास्‍ते भर खींचता जा रहा था, पत्रकार मित्र बोले कि 90 100 की स्‍पीड पर गाड़ी है और आप फोटो कैसे खींच लेते हो, जवाब हमारे सीनीयर पत्रकार शुक्‍ला जी ने दे दिया कि भई ये कला है । और रास्‍ते के ऐसे फोटो बचत के फोटो कहे जाते हैं, और वक्‍त बेवक्‍त काम आते हैं ।

 

ऑंधी के साथ आये मुख्‍यमंत्री वारिश के साथ गये

मुख्‍यमंत्री हालांकि विलम्‍ब से कार्यक्रम स्‍थल पर पहुँचे और आते ही सबसे पहले उन्‍होंने थोकबन्‍द शिलान्‍यास किये । उसके बाद मंच पर पहुँच कर कई लाड़ली लक्ष्‍मीयों को अपनी गोद में लेकर दुलारते हुये नाड़ली लक्ष्‍मी बचत पत्र सौंपे और बच्चियों को दुलारते हुये ही आशीर्वाद दिया । कई महिलाओं की मंच पर ही व्‍यथा सुनी तथा ज्ञापन भी प्राप्‍त किये । कुछ महिलाओं को कुछ सहायता देते या कुछ देते हुये भी शिवराज सिंह नजर आये लेकिन भारी शोरशराबे के बीच समझ नहीं आया कि क्‍या हुआ ।

इन औपचारिकताओं के बाद मुख्‍यमंत्री को 1857 की क्रान्ति के सम्‍बन्‍ध में कमल और रोटी यात्रा का पीला ध्‍वज थमाया गया  । रूस्‍तम सिंह ने इस ध्‍वज में अपना हाथ बंटाया ।

मुख्‍यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस को कोसने के बजाय प्रश्‍नचिह्नों के भारी भरकम कठघरे में खड़ा कर दिया और लगभग अपनी हर वाक्‍य पंक्ति पर अपनी उपलब्धियां गिनाते हुये प्रश्‍न पूछते रहे कि मैंने ऐसा किया , बताओ कांगेस ने इतने साल के राज में ऐसा किया क्‍या, जनता बार बार प्रत्‍युत्‍तर देती रही कि नहीं किया ।

अमूमन मुख्‍यमंत्री के भाषण का वही रटारटाया पारम्‍परिक भाष्‍यांश ही था जो वे हर जगह हर बार बोलते हैं । लाड़ली लक्ष्‍मी, अन्‍नपूर्णा, मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना वगैरह वगैरह । लगभग 90 -95 फीसदी पारम्‍परिक भाषण के बाद केवल कुछ नयी बातें और नयी घोषणायें मुख्‍यमंत्री ने वहॉं कीं ।

मुख्‍यमंत्री ने बेरोजगारों को एक आश्‍वासन घोषणा दी और कहा कि प्रदेश में किसी को भी बेरोजगार नहीं रहने दूंगा, हर साल दस लाख नौजवानों को रोजगार दूंगा । किसी को भी भूखा और बगैर इलाज के मरने नही दूंगा ।

मुख्‍यमंत्री ने एक स्‍वरोजगार योजना लाने का वायदा भी किया और कहा कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह मध्‍यप्रदेश में किसी को भी रोजगार, काम धन्‍धे और रोजी रोटी के बगैर नहीं रहने देगा ।

शिवराज सिंह ने मध्‍यप्रदेश की हर बेटी को अपनी बेटी को अपनी बेटी बताते हुये उनकी शादी, पढ़ाई और लखपति बनाने की जिम्‍मेवारी अपने ऊपर ली ।

शिवराज सिंह ने किसानों से कहा कि जो कर्जा केन्‍द्र सरकार आपका उतार नहीं पायी उसे आधा शिवराज सिंह चुकायेगा आधा आप ।

मध्‍यप्रदेश में हर गरीब का बड़े से बड़ा इलाज मैं मुफ्त कराऊंगा, हर गरीब को हर हालत में रोटी दूंगा । म.प्र. की जनता मेरी भगवान है और मैं इस भगवान का पुजारी और सेवक हूं । मैं अगर दोबारा मुख्‍यमंत्री बना तो मध्‍यप्रदेश को नंबर 1 का राज्‍य बना दूंगा ।

अपनी योजनाओं की ही शिवराज व्‍याख्‍यात्‍मक रूप से फैला फैला कर बताते रहे और पूछते रहे कि कांग्रेस ने कभी ऐसा किया क्‍या ।

देश भर में बढ़ी मंहगाई पर केन्‍द्र सरकार मनमोहन और सोनिया को कोसते हुये गरीब पर मार कहकर मंहगाई का पूरा ठीकरा केन्‍द्र सरकार पर फोड़ दिया और पूछा कि अटल सरकार के राज में मंहगाई कभी बढ़ी क्‍या । (शायद तेल प्‍याज आलू भूल गये शिवराज, पेट्रोल, गैस और डीजल भी बिसरा दिया)

जनता जहॉं लगातार उन्‍हें प्रत्‍युत्‍तर देती रह वहीं कुछ बातों पर जनता ने स्‍पष्‍ट नकारात्‍मक उत्‍तर देकर भी शिवराज सिंह को भौंचक्‍क क‍र दिया । (हमने पूरे कार्यक्रम का वीडियो रिकार्ड किया है)

अपनी उपलब्धियां गिनाते गिनाते शिवराज सिंह अचानक लोगों से पूछ बैठे कि बताओ शिवराज सिंह अगला मुख्‍यमंत्री होना चाहिये कि नहीं लोगों ने उत्‍तर दिया होना चाहिये, शिवराज सिंह ने पूछा बंसीलाल अगला विधायक होना चाहिये कि नहीं लोगों ने कहा कि नहीं, नहीं नहीं ( प्रतिक्रिया बहुत तेज व लम्‍बी थी लोग चीख चीख कर बोले कुछ भद्दी गालियां भी विधायक को दीं, और कई आरोप लगा डाले) शिवराज सिंह ने कहा कि ( शिवराज हतप्रभ रह गये और चेहरा उतर गया तथा गला सूख कर आवाज चिपक गयी) भई बंसीलाल ने तो यहां के गांवों में 120 सड़के बनवाईं हैं, - लोगों ने कहा कि नहीं बनवाईं हर सड़क में पैसा खाया है, सड़कें तो केन्‍द्र सरकार ने बनवाईं हैं । सारी सड़के खराब हैं, घटिया माल डाला है, उखड़ गयीं हैं । आगे शिवराज बंसीलाल की उपलब्धियों के बारे में कुछ न बोलते हुये बात बदल कर बोले कि तो संध्‍याराय विधायक होना चाहिये कि नहीं (उल्‍लेखनीय है संध्‍या राय इस समय अम्‍बाह पोरसा की नहीं बल्‍ि‍क अन्‍य विधानसभा क्षेत्र दिमनी विधानसभा की विधायक हैं और दिमनी विधानसभा में काफी अलोकप्रिय और बदनाम हैं ) लोग बोले कि चल जायेगी, (मंचासीन मुंशीलाल और अशोक अर्गल के खिसिया कर चेहरे उतर जाते हैं, दिमनी विधानसभा सीट सामान्‍य हो जाने से अम्‍बाह विधानसभा सीट के लिये ये भी प्रत्‍याशी बनना चाहते हैं)

मामला कुछ गर्मा गया था, शिवराज सिंह स्थिति भांप चुके थे । अत: बोले कि बताओं मैं मुख्‍यमंत्री हूं कि तुम्‍हारा भईया लोग बोले कि मुख्‍यमंत्री, शिवराज सिंह ने संशोधन करवाते हुये कहा कि भईया कहो भईया मैं तुम्‍हारा भईया हूं ।

उल्‍लेखनीय है कि चम्‍बल अंचल में स्‍वयं शिवराज सिंह की व्‍यक्तिगत छवि काफी अच्‍छी है और लोग ईश्‍वर के मानिन्‍द उनका सम्‍मान करते हैं तथा श्रद्धा से नाम लेते हैं । लोग यह भी कहते नहीं अघाते कि सात साख तक ऐसा सी.एम. नहीं होगा । सबसे बढि़या सी.एम. हैं,( गरीब का सी.एम. है ) और सबकी सुनता है, सुन लेता है और मदद कर देता है, हरेक के काम कर देता है । सी.एम. शिवराज ही रहना चाहिये वगैरह वगैरह ।

मुख्‍यमंत्री ने यह भी पूछा कि बताओ क्‍या मैं मुख्‍यमंत्री जैसा लगता हूं क्‍या, फिर खुद ही कहा कि मैं मुख्‍यमंत्री जैसा लगता ही नहीं हूं, न मेरे पास रूतबा है न रूकावट, मैं आपका हूं आपके बीच हूं । आपके ही बीच रहना चाहता हूं । फिर पूछा बताओं कांग्रेस में कभी कोई पी.एम. या सी.एम. ऐसा हुआ क्‍या जिससे आप मजे से खुलकर बतिया लेते थे, सारी बातें कर लेते थे लोगों ने कहा नहीं नहीं नहीं । फिर पूछा कि क्‍या इतनी आसानी से मिल लेते थे लोगों ने कहा नहीं नहीं नहीं । शिवराज सिंह ने कहा कि पुलिस की घेराबन्‍दी में रूतबा बुलन्‍द कर चलने वालों को सी.एम. बनाओगे कि अपने इस गरीब भईया को जो गरीबों के लिये काम करता है, गरीबों के लिये जीता और मरता है लोग बोले शिवराज को शिवराज को ।

उल्‍लेखनीय है कि शिवराज सिंह पर आम लोग अपना हक समझते हैं और आसानी से शिवराज से मिल बतिया सकते हैं । कांग्रेस मुख्‍यमंत्री के यहॉं मुख्‍यमंत्री निवास पर द्वारापालों को ताकीद थी कि सी.एम. मुरैना भिण्‍ड वालों से नहीं मिलते ।

कुल मिला कर भौंचक्‍क हुये मुख्‍यमंत्री ने वारिश कह परवाह किये बगैर (वारिश के दरम्‍यान हुआ था भाषण) वारिश के बहाने अपना हेलीकॉप्‍टर पोरसा में ही छोड़ कर पोरसा अम्‍बाह मुरैना मार्ग से सड़क द्वारा ग्‍वालियर की ओर वापसी की । शायद मुरैना की सड़कों का सच टटोलने के लिये और सच उन्‍हें मिल भी गया होगा । नजर भी आ गया होगा ।

मुख्‍यमंत्री की इस कवायद से इतना तो साफ हो ही गया, सार मेहनत पर पानी फिरना तय है, लोकल जनप्रतिनिधियों की छवि बहुत खराब है बौर बंटाढार साफमसाफ है । चाहे दिमनी की संध्‍याराय हो चाहे बंसीलाल चाहे कोई अन्‍य । मामला हद तक खिलाफ है । ऊपर से परिसीमन ने सारे गणित उलट पुलट डाले हैं सो अलग । अब बिगड़े मामले का क्‍या इलाज मुख्‍यमंत्री करते हैं यह वक्‍त बतायेगा फिलहाल वे खुद तो अच्‍छे फोरम में हैं लेकिन अब भाषण भी बदल लें तो ठीक है, कम से कम कुछ नया कवरेज तो मिले ।

पत्रकारों की टिप्‍पणी थी (मेरी नहीं) कि यार कित्‍ती बार छापें एक ही बात) आप समझ गये होंगें कि वे क्‍या कहना चाह रहे थे ।

संध्‍याराय, और मुंशी तथा अशोक पर लगे आरोप

पोरसा कार्यक्रम को लेकर अन्‍य हरिजन नेताओं पर भाजपा और मीडिया में खुलकर आरोप लगे हैं तथा कहा गया है कि जानबूझ कर बंसीलाल को चलता करने के लिये यह रची गयी लीला (प्रायोजित कार्यक्रम) इन विरोधी नेताओं का था जिससे बंसी का टिकिट कट जायेगा । कुछ सबूत भी मौके के यही कह रहे थे ।

 

रविवार, 1 जून 2008

उपभोक्ता के अधिकार

उपभोक्ता के अधिकार

ग्वालियर 31 मई 08 । उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अनुसार कोई व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिये सामान अथवा सेवायें खरीदता है वह उपभोक्ता है । क्रेता की अनुमति से ऐसे सामान/सेवाओं का प्रयोग करने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है । अत: हम में से प्रत्येक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता ही है ।

उपभोक्ता के रूप में हमें कुछ अधिकार प्राप्त हैं । मसलन सुरक्षा का अधिकार, जानकारी होने का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, शिकायत-निवारण का अधिकार तथा उपभोक्ता-शिक्षा का अधिकार ।

उपभोक्ता या कोई स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन जो समिति पंजीकरण अधिनियम 1860 अथवा कंपनी अधिनियम 1951 अथवा फिलहाल लागू किसी अन्य विधि के अधीन पंजीकृत है । इसके अलावा केन्द्र सरकार या राज्य सरकार अथवा संघ क्षेत्र का प्रशासन भी शिकायत दर्ज करवा सकता है ।

किसी व्यापारी द्वारा अनुचित/प्रतिबंधात्मक पध्दति के प्रयोग करने से यदि आपको हानि/क्षति हुई है अथवा खरीदे गये सामान में यदि कोई खराबी है या फिर किराये पर ली गई/उपभोग की गई सेवाओं मे कमी पाई गई है या फिर विक्रेता ने आपसे प्रदर्शित मूल्य अथवा लागू कानून द्वारा अथवा इसके मूल्य से अधिक मूल्य लिया गया है । इसके अलावा यदि किसी कानून का उल्लंघन करते हुये जीवन तथा सुरक्षा के लिये जोखिम पैदा करने वाला सामान जनता को बेचा जा रहा है तो आप शिकायत दर्ज करवा सकते हैं ।

उपभोक्ता द्वारा अथवा शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत सादे कागज पर की जा सकती है । शिकायत में शिकायतकर्ताओं तथा विपरीत पार्टी के नाम का विवरण तथा पता, शिकायत से संबंधित तथ्य एवं यह सब कब और कहां हुआ आदि का विवरण, शिकायत में उल्लिखित आरोपों के समर्थन में दस्तावेज साथ ही प्राधिकृत एजेंट के हस्ताक्षर होने चाहिये । इस प्रकार की शिकायत दर्ज कराने के लिये किसी वकील की आवश्यकता नही होती । साथ ही इस कार्य पर नाममात्र न्यायालय शुल्क ली जाती है ।

शिकायत कहां की जाये, यह बात सामान सेवाओं की लागत अथवा मांगी गई क्षतिपूर्ति पर निर्भर करती है । अगर यह राशि 20 लाख रूपये से कम है तो जिला फोरम में शिकायत करें । यदि यह राशि 20 लाख रूपये से अधिक लेकिन एक करोड़ रूपये से कम है तो राज्य आयोग के समक्ष और यदि एक करोड़ रूपसे अधिक है तो राष्ट्रीय आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करायें । वैबसाईट www.fcamin.nic.in पर सभी पते उपलब्ध हैं ।

उपभोक्ताओं को प्रदाय सामान से खराबियां हटाना, सामान को बदलना, चुकाये गये मूल्य को वापिस देने के अलावा हानि अथवा चोट के लिये क्षतिपूर्ति । सेवाओं में त्रुटियां अथवा कमियां हटाने के साथ-साथ पार्टियों को पर्याप्त न्यायालय वाद-व्यय प्रदान कर राहत दी जाती है ।

 

जूनून की हद

जूनून की हद

मनीष कुमार जोशी

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर 9413769053

इस दुनिया में किसी को पैसे का जूनून है , किसी को नाम कमाने का, किसी को मोहब्बत का तो किसी को जीत का जूनून है। आदमी पर किसी भी चीज का जूनून सवार हो जाता है तो वह सारी हदे तोड़ देता है। खेला में भी किसी भी को खेलने का जूनून होता है तो किसी को खेल देखने का । खेलने के जूनून में खिलाड़ी खेल के शिखर को छु लेना चाहता है जबकि खेलो को देखने का जूनून भी सिर चढ़ कर बोलता है। खेल देखने वाला खेल के रोमांच में डूब जाना चाहता है। दक्षिण एशिया में क्रिकेट का, यूरोप में फुटबाल का, अमेरीका में टेनिस का और अफ्रीका में रग्बी का जूनून देखा जा सकता है। इस जूनून को खेल प्रबंधको ने विभिन्न लीग प्रतियोगिताओ के द्वारा हद में बांध दिया है। इस जूनून को हद में बांधकर खेल प्रबधको ने इसे भूनाने की कोशिश की है। दक्षिण एशिया में क्रिकेट की इ्रंडियन प्रीमीयर लीग ,यूरोप में फुटबाल की यूरो लीग, दक्षिण्ा अफ्रीका में रग्बी लीग और टेनिस की ग्राण्ड स्लेमप्रतियोगिताऐं इन खेलो के जूनून को भूनाने की कोशिश है।

 

       यूरोप में फुटबाल का जूनून सर चढ़ कर बोलता है। पूरे यूरोप में फुटबाल के रोमांच को देखने का जूनून है। इस जूनून में कई बार वे हिंसक भी हो जाते हे। यूरोपवासियों के इस जूनून को भूनाने के लिए यूरो फुटबाल  लीग शुरू की गई। 1950 के आस-पास यूरोप में फुटबाल को देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी। यहां छोटी छोटी प्रतियोगिताओ में भी स्टेडियम भरे हुए देखे जा सकते थे। इस खेल के प्रबंधको ने इस जूनून को भांप लिया और 1962 में यूरो फुटबाल लीग इस जूनून को हद में बांध दिया। आज यूरो फुटबाल लीग द्वारा इसके प्रबंधक करोड़ो डालर कमा रहे है। 7 जून से इसका 12वां संस्करण शुरू हो रहा है। एक बार फिर एक महीने तक पूरा यूरोप फुटबाल के रोमांच से सरोबार हो जायेगा। इसी तरह दक्षिण अमेंरीका में कोपा कप फुटबाल लीग का आयोजन होता है। लोगो के फुटबाल के प्रति जूनून को इस खेल में देखा जा सकता है। खेल प्रेमी इस खेल के रोमांच में डूब जाना चाहते है और खेल के आका इस समंदर में तैर रहे है।

 

       दक्षिण एशिया खासकर भारत मे क्रिकेट का जूनून है। यहां के लोगो के लिए क्रिकेट प्रतिष्ठा से जुूड़ा है। क्रिकेट मैच के दौरान यहां के स्टेडियमो में भीड़ उमड़ती है। क्रिकेट के इसी जूनून के कारण कई बार स्टेडियमो में खिलाड़ियों के भिड़ने की घटनाऐ भी देखी जा सकती है। क्रिकेट के इसी जूनून को इ्रडियन प्रीमीयर लीग द्वारा हद में बांधा गया है। प्रीमीयर लीग द्वारा इस जूनून को पूरी तरह भूनाने की कोशिश की गई। इस लीग के दौरान स्टेडियमो में भीड़ी उमड़ पड़ी और क्रिकेट आकाओ के बैक एकाउंटस मे पैसा। क्रिकेट प्रेमी क्रिकेट रोमांच के चरम को पाने के लिए स्टेडियम मे आता है  और आईपीएल में उनको रोमांच का यह चरमोत्कर्ष मिला।

 

       अमेंरिका और यूरोप में टेनिस के खेल का भी जूनून है। इस खेल के दर्शक अनुशासित होते है परन्तु अपने खेल सितारो को अपनी जान से भी ज्यादा चाहते है। यह इस खेल का ही जूनून है कि टेनिस की मल्ल्किा रही मोनिका सैलेस को फं्रैच ओपन के दौरान  चाकू घाेंप दिया गया। इसी जूनून को हद में बांधने के लिए इस खेल के आकाओ ने ग्राण्ड स्लेम प्रतियोगिताऐं आरंभ की । साल मे चार ग्र्राण्ड स्लेम प्रतियोगिताऐं आयोजित होती है। इन प्रतियोगिताओ में टेनिस स्टेडियम खचाखच भरे रहते है। स्टेडियम में आने वाली  भीड़ के कारण इस खेल के आका करोड़ो में खेलते है और यही जूनून इन प्रतियोगिताओ को जिंदा रखे हुए है।

 

 

       फुटबाल की तरह रग्बी भी विश्व के कई देशो  में जूनून है। रग्बी का जूनून क्रिकेट और फुटबाल को भी पीछे छोड़ता है। अमेरीका, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में लोग रग्बी को दीवानो की तरह चाहते है। इस खेल को देखने के लिए वे उमड़ पड़ते हे। इस जूनून को भूनाने के लिए रग्बी में दक्षिण अफ्रीका में लीग का आयोजन होता है। इस लीग से इस खेल के आका करोड़ो कमा रहे हे और खेल प्रेमी रग्बी के रोमांच में खो जाते है। आस्ट्रेलिया और अमेरीका में भी रग्बी का जूनून सिर चढ़ कर बोलता है और खेल प्रबंधक इस जूनून को भूनाने के लिए लीग जैसी प्रतियोगिताऐं आयोजित करते है।

 

 

       खेलो के जूनून ने खेलो की बड़ी प्रतियोगिताओ को जन्म दिया है। बड़ी खेल प्रतियोगिताओ के द्वारा खेलो के जूनून को हद में बांधने की कोशिश की जाती है। खेल प्रेमी इन खेल आयोजनो में उमड़ पड़ते है। खेल प्रबंधक खेल के रोमांच को खेल प्रेमियो के लिए उपलब्ध कराते है। परन्तु इसके पीछे इनकी मंशा इस जूनून को भुनाने की होती है न कि खेल के संरक्ष्ण की। जूनून को भूनाने की इसी कोशिश में क्रिकेट में टेस्ट मैच उपेक्षा के शिकार हो रहे हे। फुटबाल में कई देशो की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओ में सितारा खिलाड़ियों का अकाल रहता है। टेनिस में डेविस कप और फेडरेशन कप में न तो दर्शक मिलते और न ही खिलाड़ी। यही कारण दुनिया के गिने चुने खेलो के लिए ही लोकप्रिय खेल प्रतियोगिताऐं आयोजित होती है। खेलो के प्रति जूनून को हर कोई भूना लेना चाहता है। हर कोई इस जूनून की मिठास का स्वाद ले लेना चाहता है।

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर 9413769053