गुरुवार, 17 अप्रैल 2008

क्रिकेट के ये नये सिलसिले

क्रिकेट के ये नये सिलसिले

मनीष कुमार जोषी, सीताराम गेट के सामने, बीकानेर (राज) 9413769053

जी समूह के सुभाष चंद्रा ने जब एक ख्वाब  देखा तो क्रिकेट के ये नये सिलसिले शुरू हुए। क्रिकेट अपने परंपरागत रूप  से बाहर आई। क्रिकेट इस सिलसिले में जिस ने भी निगाह डाली उसे दूर दूर तक गुल ही गुल नजर आये। सुभाष चंद्रा ने क्रिकेट का एक अलग साम्राज्य स्थापित  कर उसका सम्राट बनने का सपना देखा तो कई और ख्वाब उससे जुड गयें। कपिल देव, ललित मोदी और शाहरूख खान के ख्वाब भी क्रिकेट के इस नये सिलसिले से जुड़ गये। सभी जुट गये गन्ने रूपी क्रिकेट को मषीन में डाल कर मिठास निचाड़ने की कोषिष में । हर एक ख्वाब क्रिकेट से जुड़ गया और क्रिकेट के नये सिलसिले शुरू हो गये। हर एक कासे क्रिकेट में दूर तक बहार ही बहार नजर आ रही है।

 

       सुभाष चंद्रा ने आईसीएल की शुरूआत कर अपने ख्वाब हो हकीकत में बदलने की कोषिष की तो कपिलदेव को भी एक बार फिर क्रिकैट में लहलहाती फसल नजर आने लगी। क्रिकेट की काल्पनिक नई सल्तनत में वो अपने आपको सुभाष चंद्रा जैसे सम्राट के प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे। सुभाष चंद्रा और कपिलदेव का ख्वाब हकीकत का रूप लेता उससे पहले ही बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ललित मोदी का ख्वाब भी क्रिकेट नये सिलसिले से जुड़ गया। मोदी की निगाह सुभाष चंद्रा से भी आगे गई और उन्हे तो क्रिकेट में बहुत दूर तक बहार की लहलहाती फसल नजर आने लगी। मोदी ने जब इस फसल को काटने की योजना बनाई तो फिल्म स्टार शाहरूख खान के मन में भी क्रिकेट की इस लहलहाती फसल को काटने की चाहत हुई। शाहरूख खान की आंखे भी क्रिकेट के सपने देखने लगी। ललित मोदी और शाहरूख  का ख्वाब हकीकत में बदलता नजर आने लगा तो इस कड़ी में विजय माल्या और प्रीती जिंटा के ख्वाब भी इससे जुड़ गये। चाहतो और ख्वाबो के इसी सिलसिले की कड़ी है आईपीएल।

 

      एक ख्वाब से क्रिकेट का यह नया सिलसिला शुरू हुआ। नये क्रिकेट के हर मोड़ नया गुल खिला रहा है। एक ख्वाब से शुरू हुए इस सिलसिले से सैकड़ो ख्वाब जुड़ चुके है। जहां सुभाष चंद्रा का ख्वाब हकीकत पर टूटता नजर आ रहा है वहीं ललित मोदी का ख्वाब हकीकत में तब्दील नजर होता आ रहा है। क्रिकेट से मनोरंजन रूपी जैसे का ज्यूस निकालने के इस ख्वाब ने खेलो की दुनिया को हिलाकर रख दिया।  क्रिकेट के इस नये सिलसिले ने क्रिकेट की परिभाषा को बदल दिया है।

 

       ख्वाबो के इस सिलसिले में सभी को क्रिकेट माषूका की तरह नजर आ रही है। लेकिन वह तो बेचारी निरीह रूप  से खड़ी मूक दर्षक बनी हुई है। गन्ने जैसी मिठास भरी क्रिकेट को मषीन से बार बार निकालकर  उसके मिठास को निचोड़ने की पूरी कोषिष की जा रही है। अब गेंद और बल्ले का संघर्ष नहीं है। थिरकती सिने बालाओ के बीच चौको और छक्को का क्रिकेट हें। क्रिकेट का स्वयं  का ख्वाब टूट गया है। क्रिकेट में फुटबाल और हॉकी की प्रतिकृति बनती जा रही है। अब मैदाने में मैच बचाने के लिए संघर्ष नहीं होता है बल्कि क्रिकेट को पीटने का संघर्ष होता है । क्रिकेट पिटती जा रही हेै। क्रिकेट का समृध्द होने का ख्वाब टूट रहा है परन्तु क्रिकेट से जुड़े लोगो का ख्वाब बुलंदिया छु रहा है। दूर तक निगाह में खिले हुए गुल में हर कोई खो जाना चाहता है। क्रिकेट के इस सिलसिले के अभी कुछ ही मोड़ देखे है परन्तु आगे इस सिलसिले को कड़वे मोड़ देखने पड़ सकते है।

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर (राज)

9413769053

 

1 टिप्पणी:

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