सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

चौ0 रणवीर सिंह हुड्डा को श्रद्धांजलि बुझ गया संविधान सभा का अंतिम चिरांग

चौ0 रणवीर सिंह हुड्डा को श्रद्धांजलि

                     बुझ गया संविधान सभा का अंतिम चिरांग

निर्मल रानी  163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा। फोन-09729229728 

अपनी खुशी से आए, न अपनी खुशी चले। लाई हयात आए, कजा ले चली, चले॥

       बेशक उपरोक्त पंक्तियों में शायर ने सही ंफरमाया है कि इस संसार में किसी प्राणी का आना और जाना उसके अपने ऊपर निर्भर नहीं करता बल्कि जीवनदाता ईश्वर जब किसी आत्मा को जीवात्मा में प्रविष्ट कर देता है तो उसे जीवन मिल जाता है तथा जब वही ईश्वर उसके नाम मौत का परवाना जारी कर देता है, तब वही व्यक्ति अपनी संसारिक यात्रा पूरी कर ईश्वर अल्लाह या गॉड की आंगोश में वापस चला जाता है। बेशक जीवन तथा मृत्यु की इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति की अपनी इच्छा या ंखुशी का कोई सरोकार नहीं होता। हां इतना ंजरूर है कि जीवन तथा मृत्यु के बीच के इस पड़ाव के दौरान यदि मनुष्य चाहे तो अपने सद्कर्मों के द्वारा संसार में वह स्थान बनाने में अवश्य सफल हो जाता है जिससे कि मरणोंपरान्त भी उस व्यक्ति विशेष का नाम अमर रहे। भारत मां ने ऐसे तमाम सपूत दिए हैं जिन्हें आज देश का बच्चा-बच्चा गौरवान्वित होकर न केवल याद करता है बल्कि उन्हें अपना सर्वोच्च आदर्श भी स्वीकार करता है। कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ऐसे ही महान व्यक्तित्व में एक थे।

              चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा भी हरियाणा की धरती पर जन्मे उस महान गांधीवादी व्यक्तित्व का नाम था जोकि गत् 1 ंफरवरी को इस संसार की यात्रा पूरी कर ईश्वर की शरण में जा बसे। 94 वर्ष की आयु में इस संसार को अलविदा कहने वाले चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा का जन्म 26 नवम्बर 1914 को रोहतक ंजिले के सांघी गांव के एक सुप्रसिद्ध आर्य समाजी चौधरी मातुराम के परिवार में हुआ था। इनका परिवार शुरु से ही आर्य समाजी होने के नाते अंधविश्वास से दूर तथा समाज व मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर रहता था। चौधरी रणवीर हुड्डा की प्रारम्भिक शिक्षा इनके गांव मे ही हुई। सर्वप्रथम इन्हें 1920 में गांव की ही एक पाठशाला में भर्ती कराया गया। उसके पश्चात आपने वरिष्ठ आर्य समाजी कार्यकर्ता तथा समाज सुधारक भगत फूल सिंह द्वारा सोनीपत में गोहाना के निकट स्थापित गुरुकुल भैंसवाल कलां में दांखिला लेकर अपनी आगे की शिक्षा ग्रहण की। गुरुकुल की शिक्षा पूरी करने के बाद आपने रोहतक में वैश्य हाई स्कूल में दांखिला लिया तथा 1933 में मैट्रिकुलेशन परीक्षा पास की। अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए हुड्डा जी ने गवर्नमेंट कॉलेज रोहतक में दांखिला लिया तथा 1935 में एंफ ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात आप दिल्ली चले गए तथा 1937 में रामजस कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद श्री हुड्डा के भीतर देश के लिए कुछ कर दिखाने की प्रबल इच्छा जागृत हुई। आर्य समाजी विचारधारा होने के नाते चूंकि आप महात्मा गांधी की शांति व अहिंसा की नीति से बहुत प्रभावित थे अत: आप में भी स्वतंत्रता संग्राम में कूदने का जंज्बा जगा और इस प्रकार आप गांधीजी की सेना में शामिल हो गए। इस प्रकार चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा ने कांग्रेस की सदस्यता भी ग्रहण कर ली। महात्मा गांधी के हरियाणा (तत्कालीन पंजाब) आगमन के अवसर पर चौधरी साहब प्राय: गांधीजी के साथ रहने लगे। गांधीजी ने जब रोहतक व गुड़गांव में अपना शांति मार्च किया उस समय चौ0 हुड्डा कंधे से कंधा मिलाकर गांधीजी के साथ चले।

              स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आपने अनेकों बार जेल यात्राएं कीं तथा अंग्रेंजों के ंजुल्म सहे। एक शिक्षित, ज्ञानी तथा संविधान की भरपूर समझ रखने वाले नेता के रूप में आपने अपना स्थान कांग्रेस पार्टी में बनाया। यही वजह थी कि 1947 में कांग्रेस पार्टी ने श्री रणवीर सिंह हुड्डा को भारतीय संविधान सभा का सदस्य मनोनीत किया। भारतीय संविधान सभा का सदस्य होने के दौरान आपने भारतीय संविधान की भरपूर सेवा की तथा इसके सुगमतापूर्ण लागू होने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हुड्डा जी अपने समय के प्रथम श्रेणी के राजनेताओं में गिने जाते थे। हालांकि वे स्वयं किसी पद या कुर्सी के लिए कभी न तो लालायित रहते थे और न ही उसके पीछे भागते थे। जबकि ठीक इसके विपरीत उनमें विद्यमान गुण, उनकी योग्यता, एक कुशल प्रशासक व राजनेता के रूप में स्थापित होती जा रही उनकी पहचान ने उन्हें उनके सक्रिय राजनैतिक   जीवनकाल में प्राय: कभी बिना किसी पद व ंजिम्मेदारी के नहीं रखा। 1947 में संविधान सभा के सदस्य बनने के पश्चात 1950 से 1952 तक आप प्रांतीय संसद के सम्मानित सदस्य रहे। इसके पश्चात अपने राजनैतिक जीवन के सफर को और आगे बढ़ाते हुए पहली बार 1952 में हुड्डा जी ने रोहतक की लोकसभा सीट पर भारी मतों से विजय हासिल की। 1957 में दूसरी बार वे रोहतक लोकसभा से विजयी हुए। इस दौरान उनकी योग्यता को देखते हुए उन्हें पंजाब प्रांत के उर्जा व कृषि मंत्रालय जैसे अति महत्वपूर्ण विभाग का केबिनेट मंत्री बनाया गया। यही वह दौर था जबकि देश की उर्जा का गौरव समझा जाने वाला भाखड़ा नंगल डैम निर्माणाधीन था। पंजाब के एक संबंधित मंत्री के नाते हुड्डा साहब ने भी आंजाद देश के सबसे पहले इस अति विशाल डैम के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि भारत का प्रत्येक विद्युत उर्जा उपभोक्ता चाहे वह कोई साधारण सा व्यक्ति हो अथवा बड़ा उद्योगपति, सभी रणवीर सिंह हुड्डा जैसे उन महापुरुषों के सदैव ऋणी रहेंगे जिन्होंने स्वतंत्र भारत को पहले विशाल विद्युत उत्पादन केंद्र के रूप में भाखड़ा नंगल डैम जैसी बेशंकीमती सौगात पेश की।

              1 नवम्बर 1966 को हरियाणा राज्य देश के एक नए प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया। मूल रूप से हरियाणा के ही निवासी होने के कारण आपने भी हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहना उचित समझा। जब पंडित भगवत दयाल शर्मा के नेतृत्व में हरियाणा का पहला मंत्रिमंडल गठित हुआ, उस समय श्री हुड्डा उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ केबिनेट मंत्री बने। इसके पश्चात हरियाणा में हुए मध्यावधि विधानसभा चुनावों में आपने किलोई विधानसभा सीट से 1968 में चुनाव लड़ा तथा विजयी हुए। अभी आपने हरियाणा की राजनीति में एक मंत्री के रूप में दिलचस्पी लेनी शुरु ही की थी कि कांग्रेस पार्टी ने एक बार पुन: केंद्रीय राजनीति में आपकी सेवाओं की ंजरूरत महसूस की। इस प्रकार 1972 में एक बार फिर आपने केंद्रीय राजनीति का रुंख किया तथा राज्यसभा के सदस्य चुने गए। लगभग 5 वर्षों तक केंद्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के बाद पार्टी ने उन्हें हरियाणा की राजनीति में वापस भेज दिया। 1977 से 1980 तक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के पद पर रहते हुए हुड्डा जी ने हरियाणा के एक-एक गांव तक कांग्रेस का झंडा फहरा दिया। कहा जा सकता है कि आज हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का जो भी जनाधार है, उसे सींचने, बनाने तथा स्थापित करने में चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान है। उनके बुलन्द राजनैतिक रुतबे को यूं भी समझा जा सकता है कि जब अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला पहली बार भारत आए तो वरिष्ठ गांधीवादी नेता के रूप में उनका स्वागत करने वाले श्री रणवीर सिंह हुड्डा एक विशिष्ट भारतीय नेता थे।

              रणवीर सिंह हुड्डा के रूप में भारत माता के इस सपूत ने एक लंबी, अनुभवी एवं समर्पित राजनैतिक पारी खेलने के बाद आंखिरकार गत् 1 ंफरवरी को इस संसार से अपना नाता तोड़ते हुए अपनी वास्तविक ईश्वरीय यात्रा का रुंख कर लिया। कितने गौरव की बात है कि उनके नक्शेंकदम पर चलते हुए उनके योग्य पुत्र भुपेन्द्र सिंह हुड्डा ने भी न केवल राजनीति में स्वयं को पूरी सफलता से स्थापित किया बल्कि अपने पिता द्वारा दो बार जीती गई लोकसभा सीट को भी लगातार तीन बार जीतकर अपने पिता के राजनैतिक उत्कर्ष को बरंकरार रखा। इतना ही नहीं बल्कि भुपेन्द्र सिंह हुड्डा अपने पिता ही की तरह हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। यहां तक कि वर्तमान समय में हरियाणा के सफल मुख्यमंत्री के रूप में हुड्डा जी राज्य को जिन बुलंदियों पर जिस कौशल व निपुणता के साथ ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, इसमें भी हो न हो उनके पिता स्व0 चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा के वे संस्कार अवश्य शामिल हैं जोकि उन्हें बाल्यकाल से ही प्राप्त हुए हैं।

              चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा के मरणोपरांत जिस प्रकार लाखों लोगों का जनसमूह रोहतक स्थित उनके निवास से लेकर आई एम टी स्थित शमशान घाट पर बनाए गए संविधान स्थल तक पटा पड़ा था तथा जिस तरह से देश के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं ने उनकी अंतिम शव यात्रा में उपस्थित होकर भारतीय संविधान सभा के इस अकेले बचे अन्तिम सदस्य को अपनी ओर से अलविदा कहा, उससे यह प्रमाणित हो गया कि चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा वास्तव में समाज के हर वर्ग में लोकप्रिय थे तथा राजनैतिक विद्वेष तथा व्यक्तिगत् राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता से स्वयं को वे कितना दूर रखते थे। देश व प्रदेश के अनेकों नेताओं के अतिरिक्त भारतीय थल सेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने भारतीय सेना की ओर से अंतिम बिदाई देकर भारतीय संविधान सभा के इस अंतिम सदस्य के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त की। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी, योग्य प्रशासक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, महान समाजसेवी तथा भारतीय समाज में शालीनता एवं मृदुभाषी होने का अपना अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करने वाले इस महान आर्य समाजी व्यक्तित्व को मेरा भी शत्-शत् प्रणाम तथा शत्-शत् नमन।       निर्मल रानी

 

कोई टिप्पणी नहीं: