शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

सरकार की पिटाई और मराई मामले में 1014 लोगों पर मुकदमे 14 किरारों ने 40 को पीटा, मरणासन्‍न किया जिसमें 20 पुलिस वाले, प्रशासन का हैरत अंगेज केस

सरकार की पिटाई और मराई मामले में 1014 लोगों पर मुकदमे 14 किरारों ने 40 को पीटा, मरणासन्‍न किया जिसमें 20 पुलिस वाले, प्रशासन का हैरत अंगेज केस

Narendra Singh Tomar "Anand"

मुरैना 6 सितम्‍बर 08, आखिर भैस ने पूंछ उठाई और गोबर कर ही दिया । अरे गोबर क्‍या कर दिया पोंक (लूज मोशन) कर दिया ।

4 सितम्‍बर में अंचल में हुये जनता बनाम सरकार संघर्ष में दोनो जन संग्रामों को सरकारी चश्‍में ने अपने नजरिये से नाप तौल लिया है ।

पहला मामला महाराजपुर के किरारों का है, यहॉं प्रलिस और प्रशासन की कुटाई पिटाई के साथ,द बंधक बनाने और मरणासन्‍न व अचेत करने तक कूटने पीटने का काण्‍ड हुआ सरकारी सूत्रान ने कहा था । यह भी कि बिजली चोरी हो रही थी ।

गॉंव में बिजली थी ही नहीं पर चोरी हो रही थी, खैर इस पर एक व्‍यंग्‍य लिखेंगें । दूसरी बात ये कि बीस बिजली वाले, बीस पुलिस वालों को लेकर चोर किसानों को पकड़ने और जेल में ठूंसने गये थे यानि कुल मिला कर अलीबाबा और 40 चोर यानि गब्‍बर बोले तो कित्‍ते आदमी थे, 40 थे पूरे 40 । अब गब्‍बर फिर पूछे कित्‍ते लोगों ने मारा, अब जवाब आया सरकारी कि 14 लोगों ने हुजूर ।

ससुरी हमारी पूरी जिन्‍दगी गणित पढ़ते पढ़ते बीत गयी, हमेशा टॉप किया, कभी गणित में 98 प्रतिशत से कम अंक नहीं आये, हमने जिन्‍दगी में कई दंगे देखे, कई फसाद भी देखे ससुरा ऐसा गणित आज हमारी समझ में नहीं आया कि 14 ग्रामीण किसान 40 सरकारी आदमीयों को कूट दें, पीट दें और बंधक बना लें तथा मरणासन्‍न तथा अचेत भी कर दें ।

भैया हमारे पल्‍ले तो नहीं पड़ा किसी के पल्‍ले पड़ जायेगा तो बता देना ।

पुलिस पर हथियार भी रहते हैं, ऊपर से बाहर से पुलिस बल भी पहुंचा, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस व बिजलीवालों सहित कुल मिला कर करीब 550 से ऊपर आदमी थे । फिर भी 14 निहत्‍थे ग्रामीण किसान 40 या 550 को कूट पीट दें, मेरे पल्‍ले नहीं पड़ी ।

मैं इंजीनियरिंग और एम.एससी करके वकील भी हूं, कानूनी तौर पर ऐसे केस पहले झटके में ही अदालत में उड़ जायेंगें यह मुझे पता है, क्‍योंकि प्रमुख आधारिक तथ्‍य सर्वथा अतार्किक व असंभाव्‍यता पर जुड़ा है ।

कोई भी चतुर वकील सिर्फ एक तर्क में ही बात खत्‍म करवा देगा । खैर महाराजपुर मामला आनन फानन में धोखे से कायम हो गया, पिटने वाले पिट गये, कुटने वाले कुट गये और मरणासन्‍न वाले अस्‍पताली मरघट की खटिया पर चित्‍त पड़े हैं ।

मुख्‍यमंत्री से किरारों के सम्‍बन्‍ध की बात अगर सरकार को पता नही लगती तो क्‍या होता, फिर ये होता नीचे दूसरा मामला उसी दिन का समान घटनाक्रम का देखिये, इसमें सरकार की खुपडि़या फोड़ दी, दांत तोड़ दिये और गाड़ी फूंक दी बताई गयी।

महाराजपुर में प्रशासन मुख्‍यमंत्री के किरारों के सामने पोंक गया (लूज मोशन कर गया) वही बानमोर में एक हजार लोगों पर मामले लादे गये, (है मजे की बात् बानमोर घटनाक्रम में एक हजार लोगों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज किये गये हैं । साली समूची बानमोर को ही क्‍यों नहीं धर दिया एफ.आई.आर में साला सब संकट ही खत्‍म हो जाता ।

अब वे संघर्ष शान्‍त कर रहे थे कि एक हजार लोगों के मुखमण्‍डल चीन्‍ह रहे थे, राम जाने । एक हजार चीन्‍ह लिये हैं सैकड़ों थाने में बन्‍द कर पीट कूट डाले । सरकार खिसया खिसिया कर पोंक रहे हैं ।

पिटे कुटे आदमी अपने घर जाकर सिकाई कराते हैं, चोट पर मल्‍हम लगवाते हैं, और मालिशमत्‍ता करवा करू कर हड्डी पसली चेक कराते हैं । कहॉं यार हजार लोगों के मुख मण्‍डल पहचान पहचान कर ढ़ढ़ते फिर रहे हो, अब कुट पिट तो गये ही, हजारों को अदालत ले जाकर का करोगे । वैसे ही फोकट बरी हो जायेंगें । तुम खिसियाये फिर रहे हो, जनता तुम से ज्‍यादा खिसिया जायेगी, और अबकी बार मारेगी तो और ज्‍यादा मारेगी ।

साला चार दिन चम्‍बल का पानी लिये हो, तुम भी बदला बदला नर्राने लगे । पुलिस कायमी कराना, जेल में ठूंसना चम्‍बल में बदला नहीं माना जाता भइये ।

बदला लेना ही है तो, जनसेवा करो प्‍यारे, गरीब की फरियाद सुनो, मजबूर को सहारा दो, रोते के ऑंसू पोंछों । आत्‍मा शान्‍त हो जायेगी, चित्‍त में धीरज आ जायेगा । काहे काे चम्‍बल की धरती पर एक महाभारत और एक घमासान का शिलान्‍यास कर रहे हो, ससुरा मंत्रियों से सीख गये हो पत्‍थर गाड़ना और रिमोटी शिलान्‍यास ।

खैर ये वक्‍त बतायेगा कि क्‍या करना उचित था और आप क्‍या गलत कर बैठे ।

हमें बात जमी नहीं दोस्‍त, पब्लिक पर मुकदमे बाजी जमी नहीं, अपनी ऑंख का टैंट देखो, लोक सेवक हो, लोक सेवक बन जाओ, जनता तुम्‍हारी माई बाप और अन्‍नदाता है, इस पर इतना जुल्‍म न ढाओ कि अबकी बार दांत तोड़ने और सिर फोड़ने के बजाय कुछ और गंभीर कर डाले । जन आक्रोश को स्‍वीकार करो, समस्‍या सुलझ जायेगी । वरना और पिटोगे । जनता की सुनो, जनता की करो, जनता का हुक्‍म मानो, नेता मंत्री ससुरे चार दिना के हैं फिर अंधेरी रात है, अंध भक्ति अच्‍छों अच्‍छों को मरवा डालती है ।

क्‍या साला 14 ने 40 को कूटा 550 को खदेड़ा, बानमोर में एक हजार ने भभ्‍भर किया, बात कुछ हजम नहीं हो रही । पूरे मुरैना जिला को ही क्‍यों नहीं साला ठोक के बन्‍द कर देते । क्‍योंकि भैया हम ज्‍योतिषी भी हैं और ज्‍योतिष कहता है कि नहीं सुधरे तो और कुटोगे ।

जनता और सरकार का तीसरा संघर्ष बाल बाल टला दिमनी में

जनता और सरकार का तीसरा संघर्ष बाल बाल टला दिमनी में

मुरैना 5 सितम्‍बर 08, चम्‍बल घाटी के इतिहास में एक ही दिन में तीन जन आन्‍दोलन या सरकार विरूद्ध जनता संघर्ष का तीसरा हादसा राजपूत बाहुल्‍य क्षेत्र दिमनी में होते होते बाल बाल टल गया । यहॉं भी पुलिस, प्रशासन और जनता आमने सामने आ गयी । यदि यह हादसा हो जाता तो तीन जनसंघर्ष एक साथ होने पर गृहयुद्ध घोषित हो जाता ।

यह स्थिति इसलिये भी भयावह होती क्‍योंकि दिमनी क्षेत्र राजपूत बाहुल्‍य क्षेत्र है साथ ही दिमनी कस्‍बा अम्‍बाह तहसील का संवेदनशील इलाका है, जहॉं तोमर राजपूतों की विशाल बसाहट है । दिमनी में हुआ हादसा तत्‍काल अम्‍बाह, पोरसा, बुधारा होते हुये भिण्‍ड जिला में भसी तत्‍काल फैल जाता क्‍योंकि भिण्‍ड भदौरिया और कछवाहे राजपूतों का बाहुल्‍य प्रधान क्षेत्र है साथ ही मुरैना के तोमर राजपूत इनके रिश्‍तेदार हैं ।

उधर यह संघर्ष भिण्‍ड क्षेत्र में प्रवेश करता इधर मुरैना के नजदीक होने के कारण चम्‍बल के सम्‍भागीय मुख्‍यालय मुरैना शहर में भी स्‍वत: ही जन आन्‍दोलन भड़क जाता । जबकि निकट ही चन्‍द गज के फासले पर किरारों ने महाराजपुर में तथा बानमोर में समूची जनता ने जन संघर्ष छेड़ ही दिया था । जिसकी खबरें पलक झपकते ही आग की तरह फैल कर मुरैना में आ चुकीं थीं और महज एक दो घण्‍टे के भीतर सारी चम्‍बल में फैल चुकीं थीं ।

जनता में अन्‍दरूनी आक्रोश इस कदर व्‍याप्‍त है कि केवल वश ही नहीं चल रहा वरना सरे राह सरे आम कत्‍लेआम कभी भी शुरू हो सकता है ।

दिमनी का घटनाक्रम इस प्रकार है, अम्‍बाह के एस.डी.एम. श्री एस.एम. दौलतानी मुरैना के दोनो जनसंघर्ष काण्‍ड में भाग लेकर अम्‍बाह लौट रहे थे कि तभी वहॉं गणेश महोत्‍सव का जबरन चन्‍दा बटोरते कुछ भाजपाईयों ने एस.डी.एम. दौलतानी से भी चन्‍दा वसूलने उनकी गाड़ी को रोक लिया । इस पर दौलतानी ने चन्‍दा वसूली अवैध बताते हुये कुछ लोगों को दिमनी थाने में बन्‍द करा दिया ।

इस पर जनता भड़क उठी और सैकड़ों लोगों ने दिमनी थाना घेर लिया । एस.डी.एम. दौलतानी ने तत्‍काल ही सूझ बूझ का परिचय देते हुये गिरफ्तार किये युवकों को तत्‍काल बिना केस कायम किये छुड़वा दिया । जिस पर आक्रोशित भीड़ भी खुद ही वहॉं से हट गयी । वरना जरा और मामला बढ़ता तो तिकड़ी काण्‍ड हो लेता ।

चम्‍बल में कोहराम, जनता सड़कों पर पुलिस, प्रशासन व जनता में जम कर संघर्ष

चम्‍बल में कोहराम, जनता सड़कों पर पुलिस, प्रशासन व जनता में जम कर संघर्ष

गोलीयां चलीं एक मरा सैकड़ों घायल, पुलिस की गाड़ी फूंकी, साठ वाहन फोड़े

चक्‍का जाम, पथराव और लठ्ठों से धुनी सरकार, प्रशासन व पुलिस के सिर फोड़े, दांत तोड़े

सरकार ने बन्‍द कराये फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट

चम्‍बल में मचे कोहराम तथा जनता और सरकार के बीच हुये खुलेआम संघर्ष की खबरों को नियंत्रित करने व मीडिया डीलिंग के लिये दोपहर 12 बजे से समूची चम्‍बल में प्रशासन ने फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट सेवायें ब्‍लॉक करवा दीं ।

स्थिति इतनी अधिक बदतर रही कि वायरलेस इण्‍टरनेट सेवायें भी चम्‍बल घाटी में दूसरे दिन सुबह पॉंच बजे तक ठप्‍प रहीं । इस बीच प्रशासन पत्रकारों को अपने फेवर में खबर लिखने के लिये साम दाम दण्‍ड भेद के जरिये साधता रहा ।

लगभग हर कम्‍पनी चाहे एयरटेल हो चाहे सरकारी क्षेत्र की बी.एस.एन.एल. सभी कम्‍पनीयों की समूची सेवायें 4 सितम्‍बर दोपहर बजे से 5 सितम्‍बर सुबह 5 बजे तक बन्‍द रहीं । एयरटेल ने जहॉं सेवायें बन्‍द करने के लिये डिस्‍कनेक्‍शन और सिग्‍नल जाम का सहारा लिया, उसका कस्‍टमर केयर सेण्‍टर इस दरम्‍यान पूरी तरह बन्‍द रहा । वहीं बी.एस.एन.एल. 3पी डिस्‍कनेक्‍शन और सिगनल जाम रखे । बी.एस.एन.एल. का कस्‍टमर केयर भी इस दरम्‍यान पूरी तरह ठप्‍प रहा । यही हालत आइडिया तथा अन्‍य कम्‍पनियों की सेवाओं की रही । देर रात तक प्रशासन मीडिया को सैटल करने में लगा रहा । 

भाजपा के इसी सरकार के ही कार्यकाल में प्रशासन की यह अंचल में तीसरी बार मोबाइल, फोन और इण्‍टरनेट बन्‍द कराने की कवायद थी । इससे पहले अम्‍बाह पोरसा काण्‍ड और जगजीवन परिहार मुठभेड़ काण्‍ड के वक्‍त भी अंचल में प्रशासन ने फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट सेवायें बन्‍द करवा दीं थीं ।

इण्‍टरनेट चालू होते ही फिर काटी बिजली

सुबह पॉंच बजे जैसे ही 5 सितम्‍बर को इण्‍टरनेट चालू हुआ वैसे ही प्रशासन ने अंचल की बिजली फिर काट दी जो कि फिर लौट कर ही नहीं आयी ।     

 

 

मुरैना 5 सितम्‍बर 08, कल जब महाराजपुर में पुलिस जनता और बिजली कर्मी संग्राम छिड़ा और अभी इसकी आग बुझ भी नहीं पायी थी कि अंचल के मुरैना जिला के बानमोर कस्‍बे में भारी उपद्रव हो गया ।

पॉंच छ: घण्‍टे तक चले इस उपद्रव मे जनता और पुलिस तथा प्रशासन के बीच जम कर संघर्ष, पथराव, गोलीबारी और लठियाई हुयी । जिसमें जनता ने पुलिस व प्रशासन को जम कर धुन दिया, पुलिस व प्रशासन की गाड़ीयां तोड़ फोड़ दीं वहीं पुलिस की एक गाड़ी को जला कर फूंक दिया । प्रशासन व पुलिस अधिकारीयों के दांत तोड़ दिये और सिर फोड़ दिये ।

भाजपा शासनकाल में यह जनता और सरकार के बीच मुरैना जिला का तीसरा संग्राम तथा एक ही दिन में दूसरा जनसंघर्ष था । यहॉं भी पुलिस और प्रशासन ही ठुका पिटा ।

उल्‍लेखनीय है कि कई कारणों से चम्‍बल की जनता सरकार और प्रशासन व पुलिस से नाक तक भरी बैठी है और किंचित भी मौका पाते ही जनता के गुस्‍से उबाल निकल पड़ता है । यदि हालात यही रहे तो आने वाले चुनावों में न केवल भाजपा की बुरी फजीहत होगी बल्कि कोई शक नहीं कि जगह जगह पिटाई ठुकाई भी हो ।

जनता व प्रशासन एवं पुलिस के बानमोर में हुये संघर्ष के बाद समूची चम्‍बल घाटी में फोन, मोबाइल एवं इण्‍टरनेट सेवायें सरकार ने ब्‍लॉक करवा दीं  और मीडिया सैटलमेण्‍ट में देर रात तक सरकार और भाजपाई लगे रहे ।

बानमोर में यह घटनाक्रम तब घटित हुआ जब एक साइकिल सवार विद्यालय से पढ़ कर वापस घर लौट रहे स्‍कूली छात्र श्‍यामवीर पुत्र कमलेश धाकड़ किरार को एक ट्रक ने कुचल कर मार दिया । और ट्रक लेकर भाग गया ।  जिससे बानमोर में भारी जन आक्रोश फैल गया ।

गुस्‍साये लोगों ने, राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर चक्‍का जाम कर दिया ( इसी मार्ग पर युवक कुचला था तथा यह मार्ग बानमोर से होकर ही गुजरता है, यह मार्ग बानमोर से पहले तक ही बना है और आगे अधूरा पड़ा है )

चक्‍का जाम की खबर पर जनता को खदेड़ने पहुँचे पुलिस एवं प्रशासन को मय पुलिस दलबल के जनता ने पथराव, और लठियाई कर बुरी तरह धुन दिया । जनता की संख्‍या इतनी अधिक थी कि यदि कई जिलों का पुलिस बल भी आता तो कम पड़ जाता ।

मुरैना जिले के हर थाने से पुलिस तलब की गयी लेकिन पीट कूट कर भागने पर जनता ने मजबूर करदिया ।

मामला नियंत्रण से बाहर देख पुलिस ने अन्‍धाधुन्‍ध गोलीयां चलानीं शुरू कर दीं । जिससे मौके पर कई लोग घायल हो गये एक किशोर बच्‍चे के गोली लगने से घायल होने से गंभीर हालत हो गयी । जनता पर पुलिस की गोलीयां चलती देख बरबस ही लोगों को जलियांवाला काण्‍ड याद आ गया ।

पुलिस की अन्‍धाधुन्‍ध फायरिंग से जहां लोगों का गुस्‍सा और अधिक उबल पड़ा, वही पथराव तथा लठियाई और बढ़ गयी ।

जनता के सैकड़ों लोग (शायद हजारों) लोग चोटिल व घायल हो गये वही अनेक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारीयों के दांत टूट गये तथा सिर फूट गये । क्षेत्र के सारा मंजर रक्‍त रंजित एवं हृदय विदारक था वहीं चारों ओर मारो मारो, तथा कोहराम मचा था ।

पिटे कुटे पुलिस व प्रशासन ने गुरूवार देर रात तक बिजली बन्‍द करवा कर रखी वहीं खबरों के रिलीज पर रोक लगा कर रखी ।

पुलिस ने कई बेगुनाहो पर खबर लिखे जाने तक कई मामले लाद दिये हैं ।

घटना के दरम्‍यान जनता ने पुलिय का वाहन क्रमांक एम.पी.03 4139 जला कर फूंक दिया । साथ ही हाई वे से गुजर रही लगभग साठ सत्‍तर गाड़ीयों की पथराव एवं तोड़ फोड़ कर क्षतिग्रस्‍त कर दिया ।

पुलिस द्वारा इस घटना के सम्‍बन्‍ध में सैकड़ा लोगों को पकड़ कर थाने में बन्‍द कर पूछताछ के नाम पर बुरी तरह पीटा जा रहा है ।

 

चम्‍बल में किसानों की बगावत, बिजली कटौती से गुस्‍साये किसानों ने बिजली कर्मियों और पुलिस को धुना, बिजली घर का जे.ई. मरणासन्‍न हालत में अस्‍पताल में भर्ती

चम्‍बल में किसानों की बगावत, बिजली कटौती से गुस्‍साये किसानों ने बिजली कर्मियों और पुलिस को धुना, बिजली घर का जे.ई. मरणासन्‍न हालत में अस्‍पताल में भर्ती

घटना के बाद समूची चम्‍बल की बिजली दिन भर के लिये काटी, किसानों के गॉंवों की बिजली सप्‍लाई स्‍थायी रूप से बन्‍द की  

मामला मुख्‍यमंत्री के नजदीकी बिरादरी वालों का, गंभीर हो सकते हैं अंजाम

मुरैना महाराजपुर में जनता और सरकार के बीच हुयी जंग में एक खास पहलू यह भी है कि सम्‍पूर्ण महाराजपुर और उसके आसपास के गॉंव किरार जाति समुदाय के हैं । घटनाक्रम में जो लोग मुल्जिम बनाये गये हैं या जिनसे पुलिस, प्रशासन व बिजलीकर्मियों का युद्ध हुआ है वे सभी किरार हैं । और इस क्षेत्र के सारे किरार शिवराज सिंह के अंधे समर्थक एवं शिवराज सिंह से शक्ति प्राप्‍त हैं । इस क्षेत्र के किरार धन बल, जनबल एवं बाहुबल में काफी समृद्ध एवं शक्तिशाली हैं । मुख्‍यमंत्री से सीधे जुड़े होने तथा मुख्‍यमंत्री का समर्थन व संरक्षण होने से दु:साहस इन किरारों में स्‍वत: ही आ गया है ।  ये लोग मुख्‍यमंत्री को किरारों का गौरव और नक्षत्र बताकर सम्‍मानित एवं अभिनन्दित भी कर चुके हैं ।

मुरैना 4 सितम्‍बर आज प्रात: चम्‍बल में मुरैना शहर के नजदीकी गॉंव महाराजपुर के किसानों और बिजली घर कर्मियों तथा पुलिस के बीच जम कर दंगा और उपद्रव हुआ जिसमें सारे ग्रामीण और किसान पुलिस और बिजली कर्मियों पर टूट पड़े, और पुलिस तथा बिजली वालों की जम कर धुनाई पिटाई कर डाली जिसके दौरान बिजली घर का जे.ई. फेरन सिंह तोमर मारपीट से मरणासन्‍न हो कर अचेत हो गया, गंभीर अवस्‍था में उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है ।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार चम्‍बल में चल रही भारी बिजली कटौती से अंचल की जनता में भारी आक्रोश व रोष व्‍याप्‍त है जिसका आज तेज असर किसानों और ग्रामीणों की भड़ास के रूप में निकला । एक तो अंचल में बिजली नहीं दी जा रही, ऊपर से किसानों को अनाप शनाप बिजली के बिल थमा कर उन्‍हें जबरदस्‍ती भरने को मजबूर किया जाता है, अन्‍यथा उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे और पुलिस प्रकरण कायम कर उन्‍हें जेलों में ठूंस कर उनके घरबार, खेत खलिहानों, पशुओं और सामान की कुर्की करा ली जाती है । जिससे चम्‍बल के किसान काफी समय से भरे बैठे हैं, अम्‍बाह, जौरा और पोरसा जैसी घटनाओं के बाद एक गंभीर घटना के रूप में आज की घटना का परिदृश्‍य उभर कर सामने आया है । अम्‍बाह पोरसा काण्‍ड में जनता और पुलिस के बीच हुये संघर्ष व संग्राम का एक छोटा सा सीन इस घटनाक्रम में नजर आया जिसमें पुलिस, बिजली कर्मी और जनता फिर एक बार आमने सामने आ गयी । जनता फिर यहॉं भारी पड़ी और फिर एक बार भाजपा सरकार के ही राज में (अम्‍बाह पोरसा काण्‍ड भी भाजपा शासन काल के इसी सत्र में हुआ था) जनता और सरकार के बीच तगड़ा संग्राम हुआ, और जनता ने सरकार को न केवल बंधक बना लिया अपितु खदेड़ खदेड़ कर घसीट घसीट कर पीटा  ।

बिजली विभाग और पुलिस का कहना है कि वे ग्राम महाराज पुर में बिजली चोरी पकड़ने गये थे (उल्‍लेखनीय है कि चम्‍बल के गांवों में बिजली है ही नहीं , गांव वालों ने बिजली का प्रायवेट तार खींच कर एक जुगाड़ बना कर अन्‍यत्र से बिजली ले रखी थी जिस पर पूरे पूरे दिन और पूरी पूरी रात कटौती चल रही थी, मजे की बात यह भी है कि स्‍थानीय उद्योगों और कारखानों में करोड़ों की बिजली चोरी खुद बिजली वाले ही कराते हैं, महाशय उन्‍हें कभी पकड़ने नहीं जाते, इनसे एवज में हर माह दो करोड़ रूपये रिश्‍वत वसूली जाती है, तर्क है कि सौ पचास या ढाई सौ रूपये के मजबूर गरीब किसानों को चोर बनाने और जेल में ठूंसने गये थे)

मुतल्लिक सरकारी सूत्रान इन्‍हें देख ग्रामीण और किसान भड़क कर इन पर टूट पड़े और सबको बंधक बना कर धुन पीट दिया । बाद में मौके पर मुरैना कलेक्‍टर श्री रामकिंकर गुप्‍ता और पुलिस अधीक्षक मुरैना संतोष सिंह (ये अधिकारी जनता की बिजली समस्‍या पर कभी नहीं चेतते न पहुँचते न जनता की हिमायत और शिकायत दूर करते हैं) पहुंचे, इसके बाद भारी संख्‍या में अतिरिक्‍त पुलिस बल बुलाया गया और बंधक बनाये अधिकारीयों को छुड़ाया, इसके बाद ग्राम पंचायत महाराजपुर और उसके सभी संलग्‍न गांवों की बिजली सप्‍लाई तथा कनेक्‍शन पूर्णत: काट दी गयी ।

असल हकीकत क्‍या हुआ था वहॉं

असल घटनाक्रम और प्रत्‍यक्ष घटनादर्शीयों के बयान सरकारी बयान से मेल नहीं खाते,

असल घटनाक्रम और बकौल जनता-

बिजली कर्मियों और पुलिस की पिटाई से खुश था सारा शहर – महाराजपुर के घटनाक्रम की खबर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गयी, जिसके भी मुँह से निकला, सिर्फ वाह बहुत अच्‍छा हुआ निकला, लगभग सौ प्रतिशत ने सिफ यही कहा कि इन सालों में तो रोज ही ऐसे ही पड़नी चाहिये, सालों ने जीना हराम कर दिया है । चौतरफा जनता में प्रसन्‍नता की लहर थी । किसी एकमात्र ने भी नहीं कहा कि यह गलत हुआ ।

महाराजपुर में है सारे शहर की बिजली सप्‍लाई का मुख्‍य सब स्‍टेशन

महाराजपुर में सारे मुरैना शहर की बिजली सप्‍लाई का बृहद सबस्‍टेशन है मुरैना शहर और आसपास की ग्राम पंचायतों की बिजली सप्‍लाई तथा बिजली कटौती यहीं से नियंत्रित होती है, यहॉं पदस्‍थ अधिकार कर्मचारी मनमर्जी मनमानी बिजली कटौती अपने स्‍तर पर करते रहते हैं ।

आज का घटनाक्रम-

भारी बिजली कटौती से नाक तक भरे बैठे, ग्रामीणों की प्रायवेट तार लाइनों को बिजली वाले काट कर ले गये जिसकी खबर अंचल में फैलते ही जनता आक्रोशित हो गयी जनता ने मौके पर विरोध किया जिस पर पुलिस ने किसानों और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज कर दिया । जिसमें कई लोग बुरी तरह घायल हो गये, कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया ।

धीरे धीरे भारी संख्‍या में ग्रामीण जनता एकत्रित हो गयी, महिलायें औंर बच्‍चे भी निकल कर मैदान में आ गये । जम कर पथराव हुआ, दोनो ओर से लठ्ठ चले, भारी संख्‍या में किसान और ग्रामीण, उनकी महिलायें तथा बच्‍चे घायल हो गये तथा कई गंभीर अवस्‍था में पहुंच गये । बाद में पहुँची भारी संख्‍या के पुलिस बल ने जम कर महिलाओं, बच्‍चों किसानों और ग्रामीणों पर लाठीयां भांजीं ।

दोनो ओर से चले इस युद्ध के बाद घटनाक्रम में पिट कुट कर गंभीर रूप से घायल जे.ई. फेरन सिंह तोमर को मरणासन्‍न व अचेत हालत में अस्‍पताल में भर्ती किया गया ।

ग्रामीण किसानों और महिला बच्‍चों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही करने और जेलों में ठूंसने की प्रशासन ने धमकी दी है । घायल ग्रामीणों की फरियाद सुनने और चिकित्‍सापर्यादि से प्रशासन व पुलिस ने सर्वथा मना कर दिया है ।

समूची चम्‍बल की बिजली की काटी

इस घटनाक्रम से खिसियाये झल्‍लाये बिजली कर्मियों ने समची चम्‍बल की बिजली आज दिन भर के लिये काट दी जिससे मुरैना व भिण्‍ड शहर सहित समस्‍त गॉंवों में आज दिन भर बिजली बन्‍द रही ।

देर रात दस बजे (समाचार लिखे जाने के वक्‍त यह बिजली कटौती जारी थी )  

बिजली कर्मी घर छोड़ छोड़ कर भागे, अधिकारी परिवार सहित चम्‍पत हुये

महाराजपुर के घटनाक्रम की खबर सुनकर मुरैना शहर में रहने वाले बिजली कर्मी अपने घर छोड़ छोड़ कर भाग गये, उन्‍हें लगा कि शहर में इससे अधिक खतरनाक आक्रोश व्‍याप्‍त है और यहॉं हालत और भी बुरी हो सकती है । बिजली घर के सभी बड़े अधिकारी भी पिटाई के डर से शहर मुरैना से अपने परिवारों सहित भाग खड़े हुये, एस.ई. ए.ई. डी.ई. आज सभी मय परिवार चम्‍पत थे ।

 

सरकार ने बन्‍द कराये फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट

चम्‍बल में मचे कोहराम तथा जनता और सरकार के बीच हुये खुलेआम संघर्ष की खबरों को नियंत्रित करने व मीडिया डीलिंग के लिये दोपहर 12 बजे से समूची चम्‍बल में प्रशासन ने फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट सेवायें ब्‍लॉक करवा दीं ।

स्थिति इतनी अधिक बदतर रही कि वायरलेस इण्‍टरनेट सेवायें भी चम्‍बल घाटी में दूसरे दिन सुबह पॉंच बजे तक ठप्‍प रहीं । इस बीच प्रशासन पत्रकारों को अपने फेवर में खबर लिखने के लिये साम दाम दण्‍ड भेद के जरिये साधता रहा ।

लगभग हर कम्‍पनी चाहे एयरटेल हो चाहे सरकारी क्षेत्र की बी.एस.एन.एल. सभी कम्‍पनीयों की समूची सेवायें 4 सितम्‍बर दोपहर बजे से 5 सितम्‍बर सुबह 5 बजे तक बन्‍द रहीं । एयरटेल ने जहॉं सेवायें बन्‍द करने के लिये डिस्‍कनेक्‍शन और सिग्‍नल जाम का सहारा लिया, उसका कस्‍टमर केयर सेण्‍टर इस दरम्‍यान पूरी तरह बन्‍द रहा । वहीं बी.एस.एन.एल. 3पी डिस्‍कनेक्‍शन और सिगनल जाम रखे । बी.एस.एन.एल. का कस्‍टमर केयर भी इस दरम्‍यान पूरी तरह ठप्‍प रहा । यही हालत आइडिया तथा अन्‍य कम्‍पनियों की सेवाओं की रही । देर रात तक प्रशासन मीडिया को सैटल करने में लगा रहा ।  

भाजपा के इसी सरकार के ही कार्यकाल में प्रशासन की यह अंचल में तीसरी बार मोबाइल, फोन और इण्‍टरनेट बन्‍द कराने की कवायद थी । इससे पहले अम्‍बाह पोरसा काण्‍ड और जगजीवन परिहार मुठभेड़ काण्‍ड के वक्‍त भी अंचल में प्रशासन ने फोन, मोबाइल और इण्‍टरनेट सेवायें बन्‍द करवा दीं थीं ।

 

इण्‍टरनेट चालू होते ही फिर काटी बिजली

सुबह पॉंच बजे जैसे ही 5 सितम्‍बर को इण्‍टरनेट चालू हुआ वैसे ही प्रशासन ने अंचल की बिजली फिर काट दी जो कि फिर लौट कर ही नहीं आयी ।        

 

गुरुवार, 4 सितंबर 2008

चम्‍बल का बहादुर अन्‍तर्राष्‍ट्रीय धावक जो डकैत बना, पान सिंह तोमर पर बनेगी फिल्‍म

चम्‍बल का बहादुर अन्‍तर्राष्‍ट्रीय धावक जो डकैत बना, पान सिंह तोमर पर बनेगी फिल्‍म

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

चम्‍बल के सीने में न जाने कितने देशभक्‍तों और बहादुरों की कहानीयां दफन हैं । चम्‍बल में इन्‍हे कभी वीर गाथाओं के तौर पर किस्‍से कहानीयों के रूप में तो कभी चौपाली चर्चाओं  में तो कभी सर्दियों में अगिहानो (अलावों) पर बैठकर तापते हुये बुजुर्गवार बच्‍चों को सुनाते हैं ।

यूं कहीं किस्‍से कहानी सुनते सुनते चम्‍बल के बेटे बड़े हो लेते हैं, चम्‍बल का पानी कहिये या राजपूतों का खून या फिर पाण्‍डवों में सदा से अन्‍याय के प्रति हिकारत का भाव (तोमर राजवंश पाण्‍डवों के वंशज हैं) । चम्‍बल के बेटे अन्‍याय बर्दाश्‍त नहीं करते, चम्‍बल के बेटे दूसरे किसी अन्‍य के साथ होते अन्‍याय या अत्‍याचार को भी बर्दाश्‍त नहीं करते । और बस लड़ जाते हैं, भिड़ जाते हैं ।

आल्‍हा महाकाव्‍य में कुछ पंक्‍ितयां चम्‍बल के बेटो पर सटीक बैठती हैं –

ताको बैरी जीवित बैठो ताके जीवन कों धरकार ।

बरस अठारह कूकर जीवे, औ तेरह लौं जिये सियार ।

बरस अठारह क्षत्री जीवे आगें जीवन को धक्‍कार ।

गुम्‍मट बंध गये रजपूतन के, सेना गोलबन्‍द हे जाय ।

एकैं मारें, दो मरि जाय, तीजों दहशत सों मरि जाय ।

ईंट फूंटि के गुटईं हे जाय, गुटईं फूट छार हे जाय ।

छार फूटि कें रेता हो जाय, रेता आसमान मंडराय । 

सबके माथे चढ़ी भवानी, सबकीं ऑंख खून लहराय ।

चम्‍बल में अन्‍याय और अत्‍याचार (अब नया आइटम है भ्रष्‍टाचार) कतई बर्दाश्‍त नहीं हैं । चम्‍बल सत्‍ताद्रोही रही है, चम्‍बल बगावत करती आयी है, बगावत चम्‍बल की शान है । मगर यह बगावत कभी न्‍याय और न्‍यायप्रियता के विरूद्ध नहीं रही, कभी भी सही बात के खिलाफ आज तलक चम्‍बल के बेटे नहीं गये ।

चम्‍बल के बेटों ने भारत मॉं के मस्‍तक पर हमेशा अपने रक्‍त चन्‍दन का तिलक किया है, उसे हमेशा अपना रक्‍त स्‍नान करा कर ही उसका अभिषेक किया है ।

सत्‍ता पक्ष के अन्‍याय, भ्रष्‍टाचार और अनसुनवाई से सदा चम्‍बल नाराज रहती आयी है, स्‍वाभिमान चम्‍बल की रग रग में बसता है । जिसने सत्‍य की आवाज नहीं सुनी, जिसने न्‍याय की फरियाद नहीं सुनी वही चम्‍बल का दुश्‍मन हो गया । चम्‍बल के बेटे उसके खिलाफ बागी हो गये, सरकार ने न्‍याय नहीं किया, पुलिस ने न्‍याय नहीं किया, अदालत ने न्‍याय नहीं किया तो चम्‍बल के बेटों ने खुद की अदालत कायम की, खुद मुख्‍त्‍यार हुये, खुद ही पुलिस और खुद ही जज हो गये । देश की सर्वोच्‍च अदालत जो फैसला मुकम्‍मल न कर सके ऐसे फैसले चम्‍बल के बागीयों ने किये और सर्व मान्‍य हुये ।

हल से बल तक और बल से छल तक छल से खल तक यह एक अजीब दास्‍तान है जिस पर चम्‍बल के बेटो ने अपने लहू बहाये, इतिहास रचे ।

कोई जब गलत करे तो उसका विरोध कभी गलत नहीं होता, हॉं बात का विरोध करने का अपना अपना अलग अलग ढंग होता है, चम्‍बल के बेटो ने शठे शाठयम् अर्थात खग जाने खग ही की भाषा की नीति अख्‍त्‍यार की और बदमाशों को उन्‍हीं की भाषा में ज्ञान और नीति पढ़ाई ।

चम्‍बल के बेटे जब भारत के रक्षक हैं, देशभक्‍त हैं, वे बागी हो सकते हैं लेकिन डकैत कतई नहीं हो सकते । बागी को डाकू कहना एक बागी के लिये सबसे बड़ी गाली है । बागीयों ने जब कहीं गुजारा के लिये या गिरोह चलाने के लिये कहीं डाके डाले तो उन्‍हें डकैत की संज्ञा स्‍वत: प्राप्‍त हो गयी । वे पेशेवर डकैत कभी नहीं रहे ।

चम्‍बल में आजकल तो छिछोरे और ठग लुटेरे लम्‍पट हैं जिनका काम राहजनी , अपहरण और नकबजनी जैसे छिछोरे कामों से धन उपार्जन मात्र तक सीमित है ।

चम्‍बल की एक ताजी कहावत है कि जब तक जगजीवन परिहार (अभी इसकी मृत्‍यु प्रश्‍नचिह्नित है) जिन्‍दा रहा तब तक एक भी भैंस चोर (आजकल चम्‍बल में भभ्‍भर मचा रहे तथाकथित पुलिस मुखबिर रहे लोग उत्‍पात मचा कर चम्‍बल को परेशान किये हैं) नजर नहीं आया । सारे भैंस चोर (आजकल के छिछोरे) अपने अपने बिलों में दुबके बैठे रहे । चम्‍बल में चोरी, भडि़याई, लूट यब एक दम बन्‍द हों गयीं थीं । जगजीवन की तथाकथत मृत्‍यु के बाद सारे भैंस चोर आजाद हो गये और डकैत कहे जाने लगे ।

अब अन्‍याय के दुश्‍मन रहे या अत्‍याचार से ताजिन्‍दगी जूझे व्‍यक्ति ने बन्‍दूक उठाई तो न्‍याय और समाज की रक्षा के लिये, वे लोकतंत्र के सच्‍चे पहरेदार रहे । पुलिस और तथाकथित चम्‍बल से बाहर के कबाड़ी लेखकों और उपन्‍यासकारों ने उन्‍हें कभी दुर्दान्‍त कह कर तो कभी अत्‍याचारी और जुल्‍मी बता कर बदनाम किया । जबकि हकीकत इससे हजारों गुना दूर थी ।

खैर डकैतों को महिमा मण्डित करना गलत है, मैं इससे सहमत हूँ , लेकिन जब एक राबिनहुड पैदा होता है या कहीं कृष्‍ण अपना अवतार धारण करता है तो अन्‍याय और अत्‍याचार के खात्‍मे के लिये, आप उसे महिमा मण्डित भले ही न करें लेकिन उसके किस्‍से अपने आप लोगों के दिल पर अमिट हो जाते हैं, आप उन्‍हें रोक नहीं सकते, उनका स्‍वत: होने वाला अचूक महिमा मण्‍डन रोका नहीं जा सकता ।

बस आप तो यह इंतजार करिये कि आप जो भ्रष्‍टाचार, अंधेरगर्दी और जुल्‍म व अत्‍याचार की आंधी चला रहे हैं, जस्‍ट वैट कि कब चम्‍बल के किसी बेटे की खुपडि़या घूमती है, फिर देखिये कि क्‍या होता है – मारेगा पचास गिनेगा एक, खाल खींच कर भुस भर देगा । भोपाल और दिल्‍ली या बम्‍बई में बैठकर चम्‍बल के बारे में काल्‍पनिक लिखना बहुत आसान है, मुझे फख्र है , मैं चम्‍बल में पैदा होकर बाहर पढ़ लिख कर चम्‍बल को ही अपने कर्मक्षेत्र के रूप में चुना । हालांकि पैसा नहीं कमाया लेकिन एक आत्‍म संतोष है, मेरा ज्ञान मेरी विद्या मेरी मेहनत सब मेरी मातृभूमि की खिदमत में गुजर रही है । मैं उन लोगों में से नहीं जो अपनी मॉं के दूध को हराम कर गये, या जन्‍मभूमि का कर्ज चुकाये बगैर यहॉं से भाग गये । हॉं हम चम्‍बल से लिख रहे हैं ।

अभी बीबीसी हिन्‍दी पर खबर थी कि चम्‍बल के एक अन्‍तर्राष्‍ट्रीय धावक डाकू पान सिंह तोमर पर फिल्‍म बनेगी हम नीचे खबर को बीबीसी से सधन्‍यवाद उदृत कर हैं, मैं उन सौभाग्‍यशाली लोगों में से हूं जिन्‍हें पान सिंह तोमर तथा उसके गिरोह के सदस्‍यों से साक्षात मिलने का सौभाग्‍य नसीब हुआ था । पान सिंह तब डाकू नहीं थे, न उनके गिरोह में रहे लोग तब डाकू थे । तब वे भारी भले आदमी और भारी देशभक्‍त माने जाते थे । समय चक्र ने उन्‍हें डाकू बनाया । अम्‍बाह तहसील के गॉंव लेपा भिड़ौसा के रहने वाले पान सिंह तोमर के गिरोह में परिहार राजपूत, बीच का पुरा (उत्‍तर प्रदेश) तक के लोग सम्मिलित थे । पान सिंह तोमर एक बहादुर और वीर देशभक्‍त के रूप में ख्‍यात हैं, पुलिस जब हर प्रकार उन्‍हें मार पाने या पकड़ पाने में असफल रही तो उन्‍हे पूरे गिरोह सहित शराब और मुर्गो में जहर मिलवा कर मरवा दिया था । खैर जब फिल्‍म आयेगी तो हम भी देखेंगें कि वे क्‍या दिखाते बताते हैं, वैसे भाई इरफान खान जो पान सिंह तोमर का किरदार करने जा रहे हैं बहुत उम्‍दा कलाकार हैं, मुझे उनका अभिनय बेहद पसन्‍द है, भाई आशुतोष राणा भी साथ होते तो आनन्‍द आ जाता खैर एक समय की फिल्‍म कच्‍चे धागे में विनोद खन्‍ना या मुझे जीने दो में सुनील दत्‍त साहब ने जो जान फूंकी थी या चम्‍बल की कसम में राजकुमार या कसम भवानी की में जो तेवर थे उम्‍मीद है इरफान भाई बखूबी निभा ले जायेंगें –

बीबीसी हिन्‍दी से साभार

 

चंबल के डाकू बनेंगे इरफ़ान खान

वंदना
बीबसी संवाददाता

 

पान सिंह तोमर- ये उस शख़्स का नाम है जिसने एथलेटिक्स में राष्ट्रीय चैंपियन की बुलंदियों से चंबल का कुख्यात डाकू बनने तक का सफ़र तय किया है.

इरफ़ान खान
इरफ़ान खान राष्ट्रीय चैंपियन से डाकू बने शख़्स का रोल निभाएँगे.इसी शख़्स की सच्ची कहानी को फ़िल्मी पर्दे पर उतारेंगे फ़िल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया.

किरदार को पर्दे पर उतारने का काम इरफ़ान खान करेंगे.

तिंग्माशु धूलिया ने इस बारे में बताया, "पान सिंह तोमर स्टीपलचेज़ में राष्ट्रीय चैंपियन थे. 10-11 वर्षों तक कोई उनका रिकॉर्ड तोड़ नहीं पाया था. उन्होंने टोक्यो में एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था लेकिन बाद में हालात कुछ यूँ बदले कि वे एक डाकू बन गए."

 पान सिंह तोमर स्टीपलचेज़ में राष्ट्रीय चैंपियन थे. 10-11 वर्षों तक कोई उनका रिकॉर्ड तोड़ नहीं पाया था. उन्होंने टोक्यो में एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था लेकिन बाद में हालात कुछ यूँ बदले कि वे एक डाकू बन गए.एक व्यक्ति जो देश के लिए दौड़ता था बाद में देश के क़ानून के ख़िलाफ़ हो गया और भागता रहा, ये कहानी मुझे दिलचस्प लगी

 

तिग्मांशु धूलिया

तिंग्माशु ने कहा कि एक व्यक्ति जो देश के लिए दौड़ता था बाद में देश के क़ानून के ख़िलाफ़ हो गया और भागता रहा, ये कहानी उन्हें दिलचस्प लगी और इसलिए इसे पर्दे पर उतारने का फ़ैसला किया.

खेल और खिलाड़ियों की दशा- दुर्दशा पर यूँ तो भारत में कई फ़िल्में बनीं हैं लेकिन तिग्मांशु मानते हैं कि इनमे से ज़्यातार फ़िल्में सतही और फ़र्ज़ी किस्म की रही हैं.

वे कहते हैं, "चक दे इंडिया बहुत अच्छी फ़िल्म थी, आपको प्रेरित भी करती है लेकिन सच्चाई अलग है- पुरुष हॉकी टीम की ही हालत देखिए तो महिलाओं की हॉकी टीम का क्या होगा. मैं उस किस्म की फ़िल्म बनाना चाहता हूँ कि बॉक्सर ने स्वर्ण पदक जीता है, उसके नाम पर सड़क है लेकिन उसी सड़क पर वो भीख माँगता है. ऐसे पता नहीं कितने खिलाड़ी हैं देश में अगर क्रिकेटर को छोड़ दें तो."

ख़िलाड़ी से डाकू बने पान सिंह तोमर का किरदान निभाने वाले इरफ़ान खान ने किरदार की तैयारी शुरु कर दी है.

तिग्मांशु और इरफ़ान इससे पहले भी एक साथ काम कर चुके हैं. तिग्मांशु की पहली फ़िल्म हासिल में इरफ़ान ने अहम भूमिका निभाई थी.

इस रोल के लिए वर्ष 2003 में इरफ़ान खान को नकारात्मक भूमिका की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी मिला था. उसके बाद से बॉलीवुड में इरफ़ान खान का ग्राफ़ तेज़ी से बढ़ा है.

बतौर निर्देशक ख़ुद तिग्मांशु को भी इस फ़िल्म के लिए ओलोचकों की काफ़ी सराहना मिली थी. दोनों ने फ़िल्म चरस में भी एक साथ काम किया था.

फ़िल्म की शूटिंग इस साल के अंत में शुरु होगी. तिग्मांशु की नई फ़िल्म शागिर्द अक्तूबर में रिलीज़ हो रही है जिसमें नाना पाटेकर ने काम किया है.