मंगलवार, 1 जुलाई 2008

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था –भाग- 1, मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था भाग- 1

किश्‍तबद्ध रिपोर्ट ऑंखों देखी, भुक्‍त भोगी- नो कायमी नो चालान

मजे की बातें पते की बातें- 100 प्रतिशत सच

 मय सबूत

टीप इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया जाने से पहले सारी सच्‍चाई का स्‍पष्‍ट ध्‍यान रखा गया है साथ ही सावधानी बरती गयी है कि , हम यह जानते हैं इसके प्रकाशन का अंजाम क्‍या हो सकता है, इसके लिये हमने अपने स्‍तर पर पूर्ण व्‍यवस्‍था की है । और हम अपने सूत्र वाक्‍य '' यदा यदा हि धर्मस्‍य ग्‍लानिर्भवति भारत...'' तथा ''स्‍वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:'' एवं '' धर्म युक्‍त युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिये अन्‍य कोई कल्‍याण कारक कर्तव्‍य नहीं है , को स्‍मरण व आधार बना कर इस धर्म युद्ध व सत्‍य संग्राम का प्रारंभ करते हैं । ''यत्र योगेश्‍वर कृष्‍णो यत्र पार्थो: धनुर्धर: । तत्र श्री: र्विजयोर्भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।   

·          पॉंच साल में एक भी चोर नहीं पकड़ पाई मुरैना पुलिस (सबूत हमारे पास है)

·          हाईकोर्ट के आदेश से दर्ज मामलों एवं पुलिस विवेचना में सिद्ध पाये गये अपराधों में छह साल में एक भी अपराधी नहीं गिरफ्तार कर पायी न चालान पेश कर पायी मुरैना पुलिस, फर्जी खात्‍मा रिपोर्ट भी लगा देती है पुलिस

·          थाने बने व्‍यावसायिक परिसर और दलाली केन्‍द्र, नहीं दर्ज होतीं थानों में एफ.आई.आर., दिल बहलाने को गालिब ख्‍याल अच्‍छा बनकर रह गयी दण्‍ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154, 154(3) और इण्‍टरनेट से दर्ज रिपोर्टें

·          पुलिस की नौकरी बनाम अपराध करने का खुला लायसेन्‍स और कमाई का बेस्‍ट जरिया, महज राजनेताओं और अपराधियों के नौकर और दलाल बन कर रह गयी है पुलिस

·          नवाचार प्रणाली और इण्‍टेलीजेन्‍सी क्राइम तथा सायबर क्राइम में शून्‍य बटा सन्‍नाटा है मुरैना पुलिस

·          दिनदहाड़े सुबह शाम और रात हर घड़ी घटित हुये अपराध, दिन के सोलह प्रहर चौबीस घण्‍टे जनजीवन असुरक्षित

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·          पुलिसिया बदला, फर्जी मुठभेड़ों, फर्जी केसों में फंसाने में अव्‍वल एवं माहिर है मुरैना पुलिस

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·          दण्‍ड प्रक्रिया संहिता एवं उसके संशोधनों का , पुलिस एक्‍ट (संशोधित) का ज्ञान शून्‍य बटा सन्‍नाटा, खुलेआम सरे थाने रात दिन टूटता है कानून 

·          डकैत खुल कर होते हैं डकैत, मगर पुलिस है लायसेन्‍स्‍ड डकैत, चोर, ठग, और जेबकट   

 

मुरैना 1 जुलाई 08, शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों ताबड़तोड़ वारदातों का सिलसिला जारी है । मजे की बात ये है कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठकर महज तमाशाई बन कर रह गयी है । और मलाल ये है कि घट रहे अपराधों में से 70 फीसदी मामलों में पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती । सबसे अधिक बुरे हालात सिटी कोतवाली मुरैना के क्षेत्र के हैं । हमने इस रिपोर्ताज के लिये पुखता सबूत जुटाये हैं ।  

अभी इस साल की होली के आसपास से शुरू हुआ वारदातों का सिलसिला खत्‍म होने के बजाय दिनोंदिन रफ्तार पकड़ता जा रहा है । सबसे अधिक बुरे हालात मई जून के महीने में रहे । जिसमें चोरी, लूट, अपहरण और हत्‍याओं की आंधी सी चल पड़ी ।

हमारे सूत्रों से संकलित जानकारी के मुताबिक महज मई जून के महीने में समूचे जिले को छोड़कर केवल शहर मुरैना में 7 अपहरण, 71 लूट, 13 हत्‍यायें और लगभग ढाई सैकड़ा चोरीयां हुयीं । अफसोस जनक तथ्‍य यह है कि पुलिस ने 70 फीसदी मामलों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की । सर्वाधिक घटनायें मोबाइल लूटने, चोरी किये जाने और छीनने की घटनायें हुयीं केवल मई जून में मुरैना शहर से 1700 मोबाइल छीने, लूटे और चोरी किये गये । पुलिस ने अधिकांश या लगभग सभी मामलों में (अपवाद स्‍वरूप कुछ मामले छोड़ दीजिये) रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कीं ।

मुरैना को भयमुक्‍त व आतंकमुक्‍त करने का नारा और वायदा देकर चुनाव जीतने वाले मध्‍यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रूस्‍तम सिंह स्‍थानीय मुरैना विधानसभा से ही विधायक हैं । उनके मुरैना जिला को भय व आतंक से मुक्‍त करने की बात तो छोड़ कर फेंक ही दीजिये उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र विशेषकर शहर मुरैना में सबसे ज्‍यादा भय व आतंक का कहर इस समय व्‍याप्‍त है ।

मुरैना शहर तो इन दिनों अपराधियों की राजधानी या यूं कहिये कि स्‍वर्ग है । जहॉं आप शौक से कहीं भी कभी भी वारदातें करिये, मजे से रहिये, खुले आम घूमिये । पुलिस आपको न तंग करेगी न परेशान बल्कि फुल प्रोटेक्‍शन मिलेगा और अगले क्‍लास या लेवल तक उन्‍नत वारदातें सीखने के तौर तरीके भी जानने को मिलेंगें ।

हमारी रिसर्च के मुताबिक मध्‍यप्रदेश तो क्‍या भारत के किसी भी पुलिस वाले या उसके रिश्‍तेदार को यदि मोबाइल फोन की जरूरत है तो उसका कोई परिचित मुरैना पुलिस में होना चाहिये । आप मुरैना पुलिस के अदने से सिपाही से लेकर बड़े अफसर तक से फ्री के मोबाइल आसानी से प्राप्‍त कर सकते हैं । इन मोबाइल सेटों की कीमत हजार ग्‍यारह सौ रूपये से लेकर तीस चालीस हजार रूपये तक होती है लेकिन सब फ्री में या चार पॉंच सौ रूपये में आपको मुरैना से उपलब्‍ध हो जाते हैं ।

मुरैना के केवल स्‍थानीय वाशिन्‍दों के ही मोबाइल छीने, लूटे या चोरी जाते हों ऐसी बात नहीं है । बाहर से आने वाले लोगों के सड़क चलते, बस से उतरते ट्रेन में चढ़ते मोबाइल छीन, लूट या चोरी कर लिये जाते हैं ।

कौन छीनता लूटता या चोरी करता है मोबाइल

मोबाइल छीनने, लूटने और चोरी करने वालों के कई जुदा रैकेटस हैं लेकिन आश्‍चर्य जनक तथ्‍य यह है कि इन सभी की किशोर वय या नवयुवा अवस्‍था है जो कि 13-14 साल की उम्र से लेकर करीब 27 -28 साल के दरम्‍यान ही हैं । सबके लगभग जुदा ग्रुप हैं । ये लोग रास्‍ता चलते मोबाइल पर बात कर रहे लोगों से या उनके कपड़ो की जेबों में से पलक झपकते या कुछ ही सेकण्‍डों के भीतर मोबाइल उड़ा देते हैं, आदमी तब तक सारा माजरा समझे तब तक मोटर साइकिल या बाइक से उड़नछू हो जाते हैं । घरों में चोरी होने की 60-65 फीसदी वारदातों में मोबाइल अवश्‍य ही चुराये गये । घरों में रात को या दिन को कूदने या गृह भेदन के मामलों में इन किशोरों के नाम आना निसंदेह भारत के भविष्‍य के लिये चिन्‍ताजनक है । जहॉं इन किशोरों को छात्र होने का कानूनी लाभ और सहानुभूति मिलती है वहीं किशोर वर्ग में शराब, जुआ, चोरी, सट्टा और लूट की बेतहाशा रूचि वृद्धि कुछ खतरनाक संकेत भी देती है । समझने वाले समझ सकते हैं कि इन कुप्रवृत्तियों के पीछे क्‍या कारण और मकसद हैं ।

मैंने लम्‍बा समय अपराधीयों के रिसर्च और तरीकों पर गुजारा है, मुझे हैरत है कि कभी बम्‍बई या मुम्‍बई में घटित होने वाली क्राइम प्रणाली चम्‍बल में आज आम हो गयी है, जबकि कुछ समय पहले यहॉं की अपराध प्रणाली सर्वथा भिन्‍न थी । आज किशोरों को लाभ, लोभ, ऐश, आराम और शराब, पैसे तथा नाम रूतबा बुलन्‍दी के लिये आसानी से लोग हायर कर लेते हैं । जिसे दूसरी भाषा में गुण्‍डे पालना या सुपारी देना कहा जाता है । चम्‍बल का हर अदना या बड़ा नेता इन किशोर गुण्‍डों को हायर कर रहा है यह बात ठीक है लेकिन समाज का व्‍यवसायी वर्ग या प्रतिष्ठित वर्ग भी इन्‍हें हायर करने में लगा है, पुलिस ने व्‍यावसायिक तौर पर एवं बदला कार्यवाही के लिये इन्‍हें हायर करना शुरू कर दिया है यह चिन्‍ताजनक है । कई लोगों को नहीं मालुम होगा कि उनकी संतान गलत संगत में है या हायर्ड है लेकिन बहुतेरे लोगों को बाकायदा यह पता होता है कि उनकी संतान हायर्ड है और कई कारणों से वे इस हायरिंग को कन्‍टीन्‍यू रहने देते हैं । मसलन एक गुण्‍डे के आतंक से बचने का अच्‍छा उपाय है दूसरे गुण्‍डे की शरण में बने रहो, या उनकी किशोर संतान उन्‍हें मरने या आत्‍महत्‍या करने की धमकियां देतीं हैं, या आत्‍महत्‍या के प्रयास तक एकाध बार करके दिखा देते हैं , जिससे घर परिवार के लोग भयवश मौन हो जाते हैं । यह सतत प्रक्रिया है । कभी कभी घर वाले खुद ही लोभ लालच में फंस कर उनकी संतान के आपराधिक लाभों में भागीदार बन कर इलेक्‍ट्रानिक सामानों और कई चीजों व रूपये पैसे से समृद्ध होने लगते हैं । हालांकि कई कारण इस सम्‍बन्‍ध में प्रखर हैं किन्‍तु हर कारण इन किशोर युवाओं को आपराधिक दलदल में प्रविष्‍ट होने और सतत रहने की ओर ही प्रेरित करता है । सबसे अधिक खतरनाक तथ्‍य यह है कि केवल बालक किशोर युवा ही नहीं वरन बालिकायें किशोर नवयुवतियां भी इब इन गिरोहों में शामिल हो गयीं हैं । पिछले दिनों कई मामलों में मुरैना शहर में इस तरह की लड़कियों को पकड़ा गया ।  

 

क्रमश : जारी अगले अंक में .....      

 

शुक्रवार, 27 जून 2008

//लेख//स्वाधीनता समर के 150 वें वर्ष पर कमल,रोटी से गरीबों के जीवन में खुशहाली लाने का शंखनाद

//लेख//

 

स्वाधीनता समर के 150 वें वर्ष पर कमल,रोटी से गरीबों के जीवन में खुशहाली लाने का शंखनाद

       दस मई 1857 को मेरठ में सैनिक विद्रोह और दूसरे दिन 11 मई 1857 को दिल्ली की घेराबंदी से हुआ था देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का शंख नाद जिसकी प्रतिध्वनि देशकाल की सीमा लांघती हुई देश की आजादी के लिये समय-समय पर चलाये गये छोटे बड़े हर आन्दोलन में गूंजती रही । आज भी उसका स्मरण हर भारतीय को आन्दोलित कर जाता है । चाहे 19 वीं शताब्दी के अंत का स्वदेशी आन्दोलन या फिर क्रांतिकारियों की सिलसिलेवार कोशिशें । वर्ष 1946 में नेता सुभाषचंद्र बोस ने 1857 के '' दिल्ली चलो'' के नारे को बुलंद कर पूरे राष्ट्र को अंग्रजी शासकों के विरूध्द एक जुट होने का पैगाम दिया । दरअसल स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 देश की आजादी तक हर प्रयास में 1857 की क्रांति की अनुगूंज मुखरित होती रही । प्रथम स्वाधीनता संग्राम के 50 साल बाद वर्ष 1907 में राष्ट्रवादी क्रांतिवीर कलम के धनी विनायक दामोदर सावरकर ने अपने भारतीय स्वातंत्र्य समर नाम के ग्रन्थ की रचना कर 1857 के संग्राम पर सभी प्रकार के मतभेदों का अंत कर दिया । चर्बी लगे कारतूस प्रकरण पर वह लिखते हैं - .. यदि विस्फोट केवल कारतूसों के कारण हुआ था तो फिर कानपुर के नाना साहब, दिल्ली के बादशाह, झांसी की रानी और रूहेलखंड के खान बहादुर खान ने इसमें क्यों योगदान किया था ? वे न तो अंग्रेजों की सेना के सैनिक थे और न ही किसी प्रकार से उन्हें विवश किया जा रहा था कि वे दांतों से उन कारतूसों को तोड़ें ? और यदि कारतूसों के कारण ही वह ज्वाला भड़क रही थी तो अंग्रेज जनरल द्वारा उनकी वापसी के आदेश प्रसारित होते ही क्रांति की उस ज्वाला पर पानी पड़ जाना चाहिये था।  अत: स्पष्ट है कि प्रासंगिक कारण कारतूस नहीं थे, क्यों कि इस महान् यज्ञ में तो सैनिक-असैनिक, राजा और रंक, हिन्दू और मुसलमान, किसान और दुकानदार सभी ने समिधा समर्पित करने का संकल्प ले लिया था । वे आगे लिखते हैं - भारत की स्वतंत्रता स्थापना के लिये ही 1857 का समर हुआ ।

       काल मार्क्स ने विद्रोह के दौरान हो रहे अत्याचारों और क्रांतिकारियों के अभियानों पर न्यूयार्क डेली ट्रिब्यून में 28 जुलाई 1857 के अंक में लिखा -  '' भारतीय उथल-पुथल कोई सैनिक बगावत नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय विद्रोह है ।'' उन्होंने यह भी दावा किया कि ' धीरे-धीरे ऐसे तथ्य सामने आते जायेंगें' जिनसे स्वयं जॉन बुल को विश्वास हो जायेगा कि जिसे वह सिपाही विद्रोह समझते हैं वह वास्तव में एक राष्ट्रीय विद्रोह है । मार्क्स ने इस महाविद्रोह में विभिन्न समुदायों की एकता का उल्लेख करते हुये 30 जून 1857 को लिखा कि मुसलमान और हिन्दू अपने समान मालिकों के खिलाफ एक हो गये हैं । मार्क्स ने विद्रोह की शुरूआत सैनिकों द्वारा किये जाने के सवाल को इस प्रकार उठाते हुये उसे आम जन से जोड़ा - फ्रांसीसी राजशाही पर पहला वार भी अभिजात वर्ग ने किया था न कि किसानों ने ।

       देश की आजादी के बाद 1957 में पूरे राष्ट्र ने स्वाधीनता संग्राम 1857 की शताब्दी मनायी । सरकारी , गैर सरकारी स्तर पर महासंग्राम के विविध पक्षों और घटनाओं का विश्लेषण किया गया । शायद अपेक्षित परिणाम आना अभी बाकी है । इसी क्रम में 1857 के डेढ़ सौवें साल पर कुछ हासिल करने का प्रयास करते हुये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 मई 2008 को  18.57 अर्थात 6 बजकर 57 मिनिट पर ग्वालियर में वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि पर शहीदों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये न केवल अखण्ड ज्योति प्रज्वलित की अपितु क्षेत्रीय पंच-सरपंचों को कमल रोटी देकर सम्प्रेषण के इस प्राचीन प्रयोग को दोहराया जो 1857 में क्रांति घोष का गुप्त संदेश सूचक थे । स्थान चयन की दृष्टि से शायद यह प्रदेश का सबसे अधिक उपयुक्त स्थल था जो इतिहासक्रम का साक्षी रहा है । जहां गंगादास आश्रम के 376 साधुओं ने वीरांगना लक्ष्मीबाई को बचाने के लिये फिरंगी सेना से लड़ते-लड़ते जीवन बलिदान कर दिया था और सैकड़ों घायल हुये व अंग्रेजी सेना के दमन का शिकार भी बावजूद इसके वीर साधुओं ने महारानी लक्ष्मीबाई का शव भी अंग्रेजों के हाथ नहीं आने दिया और बड़ी शाला की घास की गंजी में आग लगा कर लक्ष्मीबाई को अग्नि संस्कार कर दिया था ।

       मुख्यमंत्री ने प्रदेश के ग्राम-ग्राम तक रोटी और कमल की यात्रा के माध्यम से जनता में गरीबों की खुशहाली लाने का खुला संदेश भेजा है । उन्होंने इस अवसर पर महती जनसभा को संबोधित करते हुये कहा कि गरीबों में खुशहाली लाकर ही शहीदों के सपनों को पूरा किया जा सकता है । उन्होंने आगे कहा कि वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई तथा अन्य क्रांतिवीर योध्दाओं की स्मृति यह ज्योति नागरिकों को देश के लिये जीने-मरने और देश को समृध्दशाली बनाने की प्रेरणा देती रहेगी ।

       समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह श्री मदनदास ने की । इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री डोंगर सिंह कक्का, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, जलसंसाधन एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, नगरीय कल्याण एवं विकास मंत्री  डा. नरोत्तम मिश्रा, 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर , सुप्रसिध्द साहित्यकार श्रीमती क्षमाकौल तथा महापौर परिषद के सदस्य मंचासीन थे ।

       मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 10 मई के दिन ही आज से 150 वर्ष पहले स्वाधीनता संग्राम के प्रथम शहीद मंगल पाण्डे के जीवन बलिदान से क्रांति की एक आंधी चली थी और हजारों देशभक्तों ने इससे प्रेरणा लेकर अपने प्राणों का बलिदान किया था । उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि आज इतिहास के पन्नों पर भारत के इस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को विद्रोह के रूप में वर्णित किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिये शहीदों के त्याग तपस्या और बलिदान सदैव नमन योग्य है और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को विद्रोह कहना उन महान बलिदानियों का न केवल अपमान है अपितु राष्ट्रद्रोह भी।

       अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री मदन दास ने कहा कि 1857 से 1862 तक चले प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ने जिस नेतृत्व,पराक्रम और कौशल का संदेश दिया, उसने देश की आजादी के लिये जनजागृति का काम किया । उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और नेतृत्व ने देशभक्तों में देश को स्वतंत्र कराने की भावना को बलवती किया । उन्होंने कहा कि शहीदों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरणीय बनाये रखने के लिये अखंड ज्योति की स्थापना की जो पहल की गई है, वह गौरव की बात है साथ ही यह  ग्वालियर की जनता और  देश की जनता को शहीदों की शहादत से परिचित कराने के लिये एक अनूठी मिसाल बनेगी ।

       भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश में सरकार की पहल पर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 150 वीं वर्षगांठ पर सालभर देश भक्ति के कार्यक्रम होते रहे हैं । उन्होंने कहा कि वीरांगना की समाधि पर इस अखंड ज्योति की स्थापना सदैव भावी पीढ़ी को प्रेरणा देती रहेगी ।

 

तिघरा व सोजना के सरपंचों को भेंट किये स्वातंत्र्य समर के प्रतीक चिन्ह

       सन् 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में स्वातंत्र्य वीरों द्वारा गांव-गांव में क्रांति का संदेश देने के लिये प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाये गये रोटी, कमल व ध्वज मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत तिघरा व सोजना के सरपंचों को भेंट किये । मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आजादी की लड़ाई के यह प्रतीक चिन्ह देश की बलिवेदी पर मर मिटने वाले रणबांकुरों की याद दिलायेंगें जो देश के स्वाभिमान को जगाने में सहायक होगा । साथ ही यह शहीदों के प्रति सच्ची श्रध्दांजलि भी होगी और गरीबों में खुशहाली लाने का संदेश भी ।

 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डोंगर सिंह कक्का का सम्मान

       वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर अखंड ज्योति की स्थापना समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह श्री मदन दास ने ग्वालियर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 104 वर्षीय श्री डोंगर सिंह कक्का का शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया ।

 

 

इति।

 

रविवार, 15 जून 2008

चोर की मौत खुशी की बात, चोर लुटेरों के हाथ में आते ही जनता हाथ में ले कानून-फ्री लड़ूंगा मुकदमे -तोमर

चोर की मौत खुशी की बात, चोर लुटेरों के हाथ में आते ही जनता हाथ में ले कानून-फ्री लड़ूंगा मुकदमे -तोमर

 

मुरैना ! राष्ट्रीय जनता दल के मध्यप्रदेश के महासचिव एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में मुरैना की सिध्द नगर कालोनी में चोरी कर रहे चोर की मौत पर प्रसन्नता जाहिर की है, और सिध्द नगर की जनता द्वारा उसे स्वयं गिरफ्तार कर पुलिस को हवाले किये जाने के बाद हार्ट अटैक से अस्पताल में मरने को जनता की बहादुरी और खुद मुख्यतारी कर कानून का सही पालन करने पर सिध्द नगर की जनता को बधाई दी है !

तोमर ने चम्बल की जनता से अपील की है कि सिध्द नगर की घटना से प्रेरणा लेते हुये चम्बल घाटी के हर गाँव मोहल्ले में चोरों लुटैरों के साथ यही व्यवहार किया जाना चाहिये ! और ऐसी अवस्था में कानूनन जनता को उसे गिरफ्तार करने तथा जान या सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु या खतरे की आशंका मात्र होने पर किसी चोर लुटेरे की मौत भी हो जाती है तो भारतीय कानून उसे संरक्षण प्रदान करता है तथा उसे पकड़ना या जान से मार देना जनता को कानूनी हक के रूप में प्राप्त है ! चम्बल घाटी में पूरी तरह कानून व्यवस्था फेल होने तथा चोरी व लूट की घटनाओं की बेतहाशा वृध्दि का कारण फर्जी मुखबिरों के नाम पर बड़ी संख्या में चम्बल के राजनेताओं, और पुलिस द्वारा चोर लुटेरों का पाला जाना है ! नेताओं और पुलिस ने चोर लुटेरों की एक लम्बी फौज पाल रखी है, जिसे आने वाले चुनावों के मद्दे नजर इन दिनों जनता में अपराध, भय व आतंक कायम करने के लिये, भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी के लिये खुला छोड़ दिया गया है ! सिध्द नगर की घटना इन लोगों के मुँह पर करारा तमाचा है, और यह जारी रहना चाहिये !

तोमर ने बताया कि इस प्रकार चोर लुटेरों के साथ व्यवहार कर उन्हें गिरफ्तार करने वाले और मार देने वाले लोगों के मुकदमे मैं फ्री लड़ूंगा और यह सिध्द कर दूंगा कि पुलिस व नेताओं के पालतू चोरों व लुटेरों को जनता कानून के भीतर रहकर ही जबरन कानून का पालन कैसे करवाती है ! और यह कानूनन उचित व वैध है ! तोमर ने यह भी कहा कि मेरे पास पर्याप्त सबूत उपलब्ध है कि किस नेता और किस पुलिस वाले ने किस किस चोर, लुटेरे और गुण्डों को पाल रखा है और कितना चोरी व लूट का माल, उनको कमीशन के रूप में मिलता है ! अत: जनता पुलिस से उम्मीद न रखे, पुलिस की हालत अत्यंत खराब है, चम्बल के थाने बिके हुये हैं और करोड़ों रूपये की उगाही केवल थानों से ही होती है ! जिसका बड़ा भाग ऊपर तक जाता है ! अत: जनता कानून में प्राप्त अपने अधिकारों का पूरा पूरा इस्तेमाल करे और भ्रष्ट व नैतिक रूप से पूरी तरह पैदल हो चुके पुलिस और नेताओं को मुँह तोड़ जवाब दे !

तोमर पेशे से एडवोकेट हैं, तोमर ने बताया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 43 में किसी भी प्रायवेट व्यक्ति द्वारा अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है तथा भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं 96 से 106 तक प्रायवेट प्रतिरक्षा का अधिकार प्रदान करतीं हैं और शरीर या सम्पत्ति की सुरक्षा के लिये या उसके खतरे में होने पर किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है !

तोमर ने जनता से अपील की है कि जनता खुद जागे, खुद सचेत हो, खुद अपनी रक्षा करे, खुद पहरा दे पुलिस और नेताओं के पालतू चोर,ु लुटेरो और गुण्डों से निजात पाने का यही सर्वोत्तम तरीका है ! चोर लुटेरो और गुण्डों के घरों में उनके पालकों व संरक्षकों के यहाँ मातम छाया रहे यही आज की सबसे बड़ी जरूरत है !

तोमर ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित राजद के वरिष्ठ नेताओं व कई केन्द्रीय मंत्रियों को पत्र लिख कर चम्बल में कुछ जाति विशेष के लोगों को लेकर चल रही पुलिस व अपराधिया मुहिम को लेकर विस्तृत पत्र लिखे हैं ! तोमर ने कल्ला सिकरवार की मुठभेडृ को भी पूरी तरह फर्जी बताया है और चम्बल में क्या हो रहा है इसको लेकर अति उच्च स्तर तक अपनी भावनाओं व पड़ताल रिपोर्ट भेज दी है ! उल्लेखनीय है कि अपराधों पर तोमर ने कई रिसर्च संपादित कीं हैं ! 

मंगलवार, 10 जून 2008

शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी– Dainik Madhyarajya

शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी– Dainik Madhyarajya

 

विशेष लेख

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दो प्रमुख कार्यकर्मों सर्वशिक्षा अभियान तथा मधयाह्न भोजन योजना के कारण क्रमश: स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ी है साथ ही साथ उनके पोषण स्तर में भी सुधार हुआ है। इन कार्यक्रमों को लागू करने के बाद प्राथमिक स्तर पर छात्रों के द्वारा शिक्षा पूरी करने के कारण माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए मांग में भी वृध्दि हुई है।

       समाज के कमजोर वर्गों, शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, बालिकाओं, शिक्षकों, ग्रामीण बच्चों तथा अन्य सीमान्त वर्गों जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। न केवल सभी के लिए नामांकन बल्कि सभी के लिए स्थायी एवं संतोषजनक शिक्षा प्रदान करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

       11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान माध्यमिक शिक्षा के लिए नई पहलें की जा रही हैं जिनमें स्कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी भी शामिल है। राज्य सरकार तथा निजी भागीदारी के साथ स्कूलों में एक संशोधित सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी योजना को लागू किया जाएगा। यह योजना एक लाख स्कूलों से भी ज्यादा सरकारी, स्थानीय निकायों तथा सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में ब्रॉडबैण्ड संपर्कता के साथ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी साक्षरता एवं कम्प्यूटरीकृत शिक्षा मुहैया करायेगी। प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर पर भी कम्प्यूटरीकृत शिक्षा आरंभ करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।

       11वीं योजना में उच्चतर शिक्षा के लिए कुछ प्राथमिकताएं है जो इस प्रकार है सुविधा का विस्तार, (जैसे संस्थागत बुनियादी ढांचा), समानता (जैसे पिछड़े समूहों की भागीदारी को सुनिश्चित करने और क्षेत्राीय असमानता को दूर करने), गुणवत्ता में सुधार और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग करना आदि ताकि इन लक्ष्यों की प्राप्ति को बढ़ावा दिया जाए। 11वीं योजना के अंत तक 18-24 वर्ष के आयु वर्ग के लिए सकल नामांकन अनुपात को बढ़कर कम से कम 15 प्रतिशत करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए योजना में लगभग 85,000 करोड़ रूपये का प्रावधान है जो 10वीं योजना से 9 गुणा अधिक है।

       इस अभियान के तहत संपर्कता के ज़रिए उच्च गुणवत्ता की ई-सामग्री को उपलब्ध कराने के अलावा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के ज़रिए राष्ट्रीय शिक्षा अभियान आरंभ करने का भी प्रस्ताव किया गया है जो 400 से अधिक विश्वविद्यालयों के समकक्ष संस्थानों और 20,000 से अधिक डिग्री कॉलेजों को ब्रॉडबैण्ड संपर्कता उपलब्ध करायेगा।

       11वीं योजना में उच्च शिक्षा स्तर पर श्रेष्ठ अनुसंधान को बढ़ावा देने, नियमित जीवन वृत में सुधार एवं नियमित मूल्यांकन पर जोर देने, प्रत्यायित व्यवस्था का विस्तार करने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् जैसी उच्च संस्थाओं में सुधार के लिए प्राथमिकता देने की बात कही गई है ताकि इन्हें वर्तमान तथा आने वाली चुनौतियों तथा आवश्यकताओं के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाया जा सके।

       भारतीय प्रत्यायित राष्ट्रीय बोर्ड को वर्ष 2007 के दौरान वॉशिंगटन संधि का अंतरिम सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के भारतीय प्रत्यायित राष्ट्रीय बोर्ड के द्वारा मान्य पाठयक्रमों में स्नातक छात्रों को इस संधि के सदस्य देशों जैसे अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान आदि में शिक्षा तथा रोज़गार प्राप्त करने में आसानी हो जाएगी।

दिल्ली के स्कूलों में अच्छा प्रचलन

       राष्ट्रीय राजधनी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों सहित, अध्यापकों की ज़िम्मेदारी तथा विद्यार्थियों के प्रदर्शन, कक्षा में अध्यापन से संबंधित प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष चुनौतियों से निपटते हुए आईसीटी में शैक्षिक नवीनताओं और प्रशासन में सक्षम करते हुए राष्ट्रीय राजधनी क्षेत्र दिल्ली, सरकार ने एक व्यापक सूचना प्रौद्योगिकी कार्य योजना आरंभ की है।

       इन पहलों में निदेशालयों में कार्मिक एवं कार्यालय प्रबधन के लिए हस्तक्षेप भी शामिल है, जैसे कर्मचारी सूचना व्यवस्था, हस्तांतरण नियुक्ति इकाई, वित्त इकाई, पुस्तकालय प्रबंधन और अवसंरचना इकाई इत्यादि इसके परिणाम स्वरूप मानवीय हस्तक्षेप के साथ विभाग के शैक्षिक तथा प्रशासनिक परिणामों में एक आम बदलाव आया है, अनन्यता को भी कम किया गया है जिसके कारण साफ-सुथरी, पारदर्शी, उत्तरदायी तथा जवाबदेह व्यवस्था सामने आई है।

       सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सबसे अधिक महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार है -

विभाग का सारा कार्य इस सिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है ताकि उपयोगकर्ता सिस्टम के ज़रिए बच्चे की अंक तालिका इत्यादि बना सके बजाय इसके कि पहले आपके पास डाटा आये और फिर आप अपना कार्य शुरू करें।

किसी भी इकाई को हमेशा पूरी तरह से ही लागू किया जाएगा। यहां पर कोई भी परीक्षण परियोजना नहीं होगी। सभी उपयोगकर्ता सिस्टम को एक साथ ही उपयोग करते हैं।

यह सिस्टम अपने ही देश में बनाया गया है। इसके लिए पहले आवश्यकताओं की पहचान की गई, जवाबों पर विचार किया गया, सम्भवत: आसान सिस्टम को लागू किया गया, परीक्षण किया गया और फिर इसे ठीक प्रकार से चलाया गया।

यह बात सच है कि बेव आधारित यह सिस्टम अनूठा नहीं है। परन्तु फिर भी यह सुनिश्चित किया गया है कि यह हर बार प्रत्येक स्तर पर अभिप्राय पूर्ण परिणाम दे।

इस सिस्टम को सभी हितधारकों ने पहले ही स्वीकार कर लिया है। सच तो यह है कि अध्यापक संघ ने यह दावा किया है कि यह उपलब्धि उसके अथक प्रयासों का परिणाम है।

       उन सभी पैमानों पर, जिन पर एक स्कूल शिक्षा प्रणाली का मूल्यांकन किया जा सकता, उनमें एक निश्चित तथा अतुलनीय सुधार हुआ है।

       दसवीं कक्षा के परिणामों में भी अतुलनीय वृध्दि हुई है। वर्ष 2006 में 11.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2007 में यह 17.39 प्रतिशत हो गया है। जिन स्कूलों में दसवीं कक्षा का परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक है, उन स्कूलों की भी संख्या बढ़ी है। अध्यापकों की उपस्थिति की पुष्टि किसी भी समय व्यक्तिगत रूप से या समूह के द्वारा की जा सकती है। इस बारे में अधिक जानकारी वेबसाईट .ङ्ढड्डद्वड्डङ्ढथ्.दत्ड़.त्द  पर भी मौजूद है। कार्यान्वयन के पहले वर्ष के दौरान ही आन लाईन दाखिला व्यवस्था के कारण कक्षा 6 में नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या में 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

       हस्तांतरण तथा नियुक्ति की अनन्य शक्तियां भी समाप्त कर दी गई हैं। अब सभी हस्तांतरण तथा नियुक्तियां पारदर्शी कम्प्यूटरीकृत हस्तांतरण व्यवस्था के ज़रिए की जाएगीं। इसमें जीआईएस आधारित नियुक्तियां भी हैं।

       प्रबंधन सूचना व्यवस्था (एमआईएस) के ज़रिए वास्तविक समय संचार तंत्र मुहैया कराया गया है। महत्वपूर्ण सूचनाओं को प्रत्येक कर्मचारी को भेजा जा रहा है ताकि सूचना में देरी से बचा जा  सके। समय सीमा के भीतर फंड के शत-प्रतिशत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक विशुध्द एवं सक्षम वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था को सक्षम बनाया गया है।

       वित्तीय व्यवस्था का कम्प्यूटरीकरण होने के कारण अध्यापन तथा गैर अध्यापन कर्मचारियों के उनका बकाया अब समय पर मिल जाया करेगा। ऑन लाईन (ईओआर) निगरानी व्यवस्था के उपयोग से स्कूलों में रखरखाव में सुधार आया है। एमआईएस में नागरिकों के लिए फीड़बैक सिस्टम भी उपलब्ध हैं जिसके ज़रिए माता-पिता या नागरिक विभाग या शिक्षा मंत्री से अपनी बात कह सकते है और सूचना का आदान प्रदान भी कर सकते है।

       दिल्ली सरकार ने वर्ष 2007 में राष्ट्रीय विद्यालय खेलों में सबसे अधिक पदक जीते थे। शिक्षा विभाग ने भी पिछले तीन वर्षों में चार बार नेशनल गवर्नेन्स अवार्ड जीता है।

अन्य राज्यों में इसे लागू करना

       यह सिस्टम ऑन-लाईन है और पूरे देश में एक जैसा है। इस सिस्टम की अनुकृतियां भी बनाई  जा सकती हैं।

       यह न केवल अंतर्राज्यीय बल्कि अंत:विभागीय स्तर पर भी इसकी अनुकृतियां बनाई जा सकती हैं। सारे देश और राज्यों में विभागीय कार्य लगभग एक समान ही होता है। उदाहरणत: कार्मिक-प्रबंधन सूचना व्यवस्था (पीआईएमएस) को शुरू में लोक निर्माण विभाग, दिल्ली ने लागू किया था। बाद में इसे केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने पूरे देश में फैला दिया।

       सबसे पहले इसका डिज़ाइन निर्माण और इसका कार्यान्वयन शिक्षा विभाग ने लोक निर्माण, दिल्ली के लिए किया था। हाल ही में हरियाणा सरकार ने अपने एडूसेट पर मल्टी-मीडिया पाठयक्रम का प्रसारण आरंभ किया है। पंजाब सरकार से भी राज्य में भी इसे लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और अण्डमान सरकारों ने भी इसे अपने यहां लागू करने में रूचि दिखाई है। (पसूका)

Û मानव संसाधन विकास मंत्रालय से साभार